कीश फ़ार्स खाड़ी के अहम द्वीपों में है और पर्यटन की नज़र से ईरान के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थल में शामिल है।

कीश द्वीप प्राकृतिक, ऐतिहासिक, व्यापारिक व मनोरंजनात्मक विविधताओं से संपन्न होने के नाते पूरे साल पर्यटकों से भरा रहता है।

कीश द्वीप अंडाकार है और इसका क्षेत्रफल 89 दश्मलव 7 वर्ग किलोमीटर है। इसकी लंबाई 15 दश्मलव 6 किलोमीटर और चौड़ाई 7 किलोमीटर है। यह द्वीप बंदर अब्बास के दक्षिण-पश्चिम में फ़ार्स खाड़ी के नीले समुद्र में स्थित है। इस द्वीप से लंगे बंदरगाह की दूरी 50 नॉटिकल मील है।

मूंगे की चट्टानों वाला यह द्वीप अपने सुंदर तटों के लिए मशहूर है। यह द्वीप न सिर्फ़ विभिन्न मौसमों बल्कि एक ही दिन के अलग अलग घंटों में प्रकृति की बहुत ही सुंदर नज़ारा पेश करता है। कीश के पूर्वी, पूर्वोत्तरी और दक्षिणी तट दुनिया के सबसे सुंदर तटों में गिने जाते हैं। इसके दक्षिण-पश्चिमी तटों में सूरज के डूबने का दृष्य सबसे ज़्यादा सम्मोहित करने वाला होता है।           

कीश द्वीप अतीत में "क़ैस" के नाम से मशहूर था और इतिहास में है कि ईश्वरीय दूत हज़रत नूह के तूफ़ान के बाद कीश द्वीप वह पहला बिन्दु था जहां से पानी छटना शुरु हुआ और इस द्वीप की ज़मीन सबसे पहले उभरी लेकिन इतिहास से पता चलता है कि हख़ामनेशी, उसके बाद अश्कानी और फिर सासानी शासन काल में कीश द्वीप ईरान का था और इस्लाम के विस्तार से यह द्वीप उमवी शासकों के अधीन हो गया। यह स्थिति तीसरी हिजरी शताब्दी के मध्य तक जारी रही यहां तक कि "रय" के निवासियों के एक गुट ने शासक के विरुद्ध विद्रोह किया और कीश सहित फ़ार्स खाड़ी के सभी द्वीपों को अपने नियंत्रण में ले लिया।

कीश पर ईरानियों की संप्रभुता, पहलवी भाषा में लिखे गए ख़त से पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है। सल्जूक़ी शासन काल में कीश फ़ार्स खाड़ी का सबसे बड़ा व्यापारिक केन्द्र था। बहुत से इतिहासकारों ने कीश और उसके स्वर्णिम दौर के बारे में कुछ न कुछ लिखा है। इब्ने ख़ुर्दाद, इब्ने बतूता और याक़ूत हमवी ने या तो कीश का भ्रमण किया या इसके बारे में विस्तार से वर्णन किया है।     

मशहूर ईरानी भुगोल शास्त्री, विद्वान, इतिहासकार व दर्शनशास्त्री ज़करिया क़ज़वीनी ने अपनी किताब "आसारुल बिलाद व अख़बारुल एबाद" में लिखा है, "क़ैस फ़ार्स समुद्र में एक बसा हुआ द्वीप है जिसकी परिधि चार फ़र्सख़ अर्थात 22 किलोमीटर है। इस द्वीप में एक बहुत ही सुंदर शहर बसा है। भारतीय पोत वहां आते हैं। यह द्वीप भारतीय, अरबों और ग़ैर अरबों का व्यापारिक केन्द्र है। कुएं का पानी पीते हैं और हौज़ व पानी के भंडारण के केन्द्र बनाए हैं।"

फ़ारसी साहित्य के बड़े साहित्यकारों में कोई भी शायर व लेखक ने शैख़ सअदी के जितना भ्रमण नहीं किया है। सअदी एक बहुत ही बुद्धिमान व मशहूर साहित्यकार थे। उनकी किताबों व रचनाओं को पढ़ने से प्राचीन ईरान के इतिहास और दुनिया के दूसरे क्षेत्रों के बारे में बहुत सी जानकारी हासिल की जी सकती है।      

कीश में पांचवी से सातवीं हिजरी क़मरी तक बहुत चहल पहल थी। इतिहासकारों के अलावा ईरानी व अरबी पर्यटकों का भ्रमण और हरीरे शहर के अवशेष इस बात के गवाह हैं कि ईलख़ानी, तैमूरी और अताबकी शासन काल में कीश एक आबाद द्वीप, सुंदर शहर से संपन्न व क्षेत्र में बड़ा व्यापार केन्द्र था। गुलिस्तान और बोस्तान किताब पढ़ने से पता चलता है कि इनमें से हर एक में एक बार कीश का उल्लेख मिलता है और इस द्वीप और उसके निवासियों के बारे में सामाजिक दृष्टि से बहुत सटीक वर्णन हुआ है।

शैख़ सअदी अपनी किताब गुलिस्तान के तीसरे अध्याय की इक्कीसवीं कहानी में कीश में एक व्यापारी के कमरे में ठहरने के दौरान घटी घटना का वर्णन करते हैं। यह कहानी संतोष की अहमियत बारे में है।

इस कहानी का संक्षेप यह है कि कीश द्वीप में जो बूढ़ा व्यापारी शैख़ सअदी को अपने कमरे में ठहरने की दावत देता है, वह सुबह तक अपनी इच्छाओं के बारे मे सअदी से बात करता है। इस व्यापारी के पास 150 ऊंट और 40 नौकर थे लेकिन उसके लोभ की कोई थाह न थी। कभी भारत और तुर्की में अपनी संपत्ति के बारे में बात करता, तो कभी कहता था कि इस्कंदरिया जाऊंगा और फिर वह अपने इरादे से फिरता। वह कहता था कि उसे एक छोटे से सफ़र पर जाना है और वह सफ़र यह कि ईरान से चीन गंधक ले जाना चाहता है, चीनी प्याले को रोम, रोम से रेशम को भारत, भारत के स्पात को हलब, हलब के बिल्लौरी शीशे के बर्तन को यमन, यमनी कपड़े को पार्स ले जाना चाहता और उसके बाद व्यापार से सन्यास लेना चाहता है। इस लोभी व्यापारी की बातों से थक चुके शैख़ सअदी ने उससे कहा कि एक लोभी व्यक्ति को ईश्वर की ओर से दी गयी चीज़ों पर संतोष करने से संतुष्टि मिलती है या फिर क़ब्र में।    

 

कीश के इतिहास से पता चलता है कि दूसरे पहलवी शासन के आरंभिक वर्ष में कीश फ़ार्स खाड़ी के मोतियों के व्यापार व मछली के शिकार का केन्द्र था।

जापानी मोतियों के ईरान की मंडी में आने से कीश के मोतियों की अहमियत धीरे-धीरे कम होती गयी। 1970 में कीश द्वीप को उसकी प्राकृतिक विशेषताओं जैसे मूंगे की चट्टानों के तट और उसके आस पास साफ़ पानी के मद्देनज़र अंतर्राष्ट्रीय पर्यटनक केन्द्र चुना गया और कई साल के दौरान सरकार ने इस द्वीप के विकास की कोशिश  की जिसके तहत होटल, अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी केन्द्र, एयरपोर्ट और मनोरंजन केन्द्र बनाए गए।

 

कीश द्वीप को 1982 में ईरान का पहला आज़ाद व्यापार केन्द्र चुना गया और आज इस द्वीप की अर्थव्यवस्था पर्यटन व व्यापार पर टिकी हुयी है। कीश समुद्री और हवाई दोनों तरीक़ों से पहुंचा जा सकता है। कीश में बंदरगाह और एयरपोर्ट भी है। कीश अनेक उड़ानों से ईरान के अनेक शहरों से जुड़ा हुआ है।

 

कीश में कई यूनिवर्सिटियां हैं जो ईरान की मशहूर यूनिवर्सिटियों जैसे सनअती शरीफ़ और तेहरान यूनिवर्सिटी से अफ़िलिएटेड है। इन  यूनिवर्सिटियों में मलेशिया और ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटियों के सहयोग से सूचना प्रद्यौगिकी, एम बी ए, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग और क़ानून के विषय पर ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और डॉक्ट्रेट की पढ़ायी होती है। 

 

 

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Jun २३, २०१८ १६:३५ Asia/Kolkata
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