पेट्रोकेमिकल उद्योग, उन रसायनिक उद्योगों में से है जिसके विभिन्न चरणों के दौरान तेल या प्राकृतिक गैस के कच्चे पदार्थों से रसायनिक पदार्थों का निर्माण किया पाता है।

आज की ज़िंदगी में तेल और उससे बनने वाली चीज़ों के प्रचलन से पहले, आवश्यकता के रसायनिक पदार्थ परिततन के कारण वनस्पतियों और जानवरों से प्राप्त होते थे। बीसवीं शताब्दी के आरंभ में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस, मनुष्य की आवश्यकता के पदार्थ को तैयार करने का आरंभिक पदार्थ हुआ करत थे तथा विज्ञान व तकनीक के विकास के बाद तथा हाइड्रोकार्बन पदार्थों के विस्तार के कारण हज़ार पदार्थ तेल और प्राकृतिक गैस से हासिल होती हैं। वर्तमान समय में इस तेल और उससे बनने वाली वस्तुओं का प्रयोग व्यापक हो गया है और इसी का एक अन्य रूप पेट्रोकेमिकल उद्योग है। पेट्रोकेमिकल, पेट्रोकेमिकल उद्योग, बिजली, इलेक्ट्रानिक, करघा, चिकित्सा, वाहन निर्माण, खाद्य और घरेल सामान के उत्पादन और उद्योग में प्रयोग होता है।

पेट्रोकेमिकल्स मुख्यतः हाइड्रोकार्बन से , विभिन्न रासायनिक यौगिकों से निकाली गई है। ये हाइड्रोकार्बन कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से प्राप्त होने है।

आज, पेट्रो उत्पादों दैनिक उपयोग की वस्तुओं के पूरे स्पेक्ट्रम को चूना और आदि वस्त्र, आवास , निर्माण, फर्नीचर , वाहन, घरेलू सामान, कृषि, बागवानी , सिंचाई, पैकेजिंग, चिकित्सा उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली की तरह जीवन के लगभग हर क्षेत्र में प्रयोग हो रहा है।

कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की तुलना में पेट्रोकेमिकल उद्योग की एक महत्वपूर्ण विशेषता, इसका बहुत अधिक फ़ायदा है। आर्थिक लेहाज़ से वैश्विक बाज़ार में पेट्रोकेमिकल की मांग, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से बहुत अधिक है। विशेषकर उन देशों के लिए जहां यह उत्पादन एक कड़ी के रूप में आरंभिक पदार्थों से लेकर बड़े उद्योगों और पदार्थों में प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार से यह पदार्थ पूंजी निवेश का ज़रिया भी बन जाता है।

दूसरे हिसाब से देखें तो पेट्रोकेमिकल उद्योग, समस्त उद्योगों की मां है अर्थात यह सभी उद्योगों को हरकत देता है और उसकी आवश्यकताओं को पूरा करता है। पेट्रोकेमिकल उद्योग की एक अन्य आर्थिक विशेषता यह है कि इससे बेरोज़गारी में कमी होती है और रोज़गार के अवसर बढ़ते हैं। इस बात को यूं समझना चाहिए कि पेट्रोकेमिकल उत्पादों के क्रम में जितना में इस उद्योग में बाज़ार से निकट होंगे तो हमारे पास रोज़गार के उतने ही अवसर होंगे और इसमें ख़र्चा भी कम आएगा।

उदाहरण स्वरूप हमको यदि तेल उद्योग में काम पैदा करने के लिए कम से कम पांच लाख डॉलर के पूंजीनिवेश की आवश्यकता होगी तो पेट्रोकेमिकल उद्योग के 3 लाख 60 हज़ार डॉलर की ही आवश्यकता होगी।

ईरान चूंकि पेट्रोकेमिकल उद्योग में आगे है बहुत ज़्यादा पेट्रोकेमिकल उत्पादों का उत्पादन करता है इसलिए वह दुनिया में प्लास्टिक पदार्थ के उत्पादकों में गिना जाता है। प्लास्टिक पेट्रोकेमिकल उद्योग के उत्पादों में है और इसमें पेट्रोकेमिकल के अन्य उत्पादों की तुलना में विकसित होने की सबसे ज़्यादा क्षमता है। जैसा कि आप जानते हैं कि तेल व गैस के स्रोतों से संपन्न देशों में आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए ज़रूरी उद्योगों में पेट्रोकेमिकल उद्योग भी है। ईरान में पूंजिनिवेश की प्राथमिकताओं में पेट्रोकेमिकल उद्योग में विकास करना शामिल है। ईरान में पेट्रोकेमिकल उद्योग में बहुत ज़्यादा संभावना के मद्देनज़र पूंजिनिवेश के माहिर एलिस्टर हेनमन का मानना है कि ईरान में पूंजिनिवेश के अपार अवसर हैं। ईरान में उत्पादन के लिए ढांचागत सुविधा मौजूद है और दीर्घकाल में ईरान बहुत अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पाद का निर्यात करने वाले देशों में ज़रूर होगा।

वर्ष 2014 में पश्चिम एशिया में कुल पेट्रोकेमिकल उत्पाद में ईरान की अकेले भागीदारी 25 फ़ीसद थी। ईरान में सालाना 50 लाख टन पालिमर का उत्पादन होता है और 10 लाख टन से ज़्यादा पालिमर व्यापारिक इस्तेमाल में आने वाली प्लास्टिक के उत्पाद में इस्तेमाल होता है। इस समय ईरान में 50 से ज़्यादा पेट्रोकेमिकल कंपनियां हैं जो घरेलू सामान, ऑटोमोबाइल और टेक्सटाइल उद्योग में नाना प्रकार के उत्पाद बना रही हैं। पेट्रोकेमिकल से जुड़े लोग इसके डाउनस्ट्रीम उद्योग में अधिक पूंजिनिवेश की कोशिश कर रहे हैं ताकि नई तकनीक के ज़रिए अच्छे उत्पाद बाज़ार में उतारें।

 

ईरान में पेट्रोकेमिकल उद्योग लगभग पचास वर्ष पुराना है। ईरान के राष्ट्रीय पेट्रोकेमिकल उद्योग कंपनी ने वर्ष 1963 में सरकार के नेतृत्व में राष्ट्रीय तेल कंपनी ने काम करना शुरु किया। दक्षिणी पश्चिमी ईरान के शीराज़ शहर में रसायनिक खाद्य यूनिट का उद्घाटन किया गया। ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद तथा इराक़ द्वारा थोपे गये युद्ध के दौरान शीराज़ की अधूरी पड़ी योजना को पूरा किया गया और पूरे वैश्विक मापदंड का ख़्याल रखा गया है। ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग ने क्रांति की सफलता से पहले ही तुलना में वैश्विक बाज़ार में धूम मचा दी। जर्मनी के प्रसिद्ध आरूस ग्रुप के प्रबंधक वुल्फ़गैंग क्लिकर ने वर्ष 2017 में ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग के 13वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आईपीएफ़ में संबोधित करते हुए कहा कि ईरान ने दशकों तक पेट्रोकेमिकल उद्योग के बाज़ार में मुख्य भूमिका अदा की है और अब तक उसने अपनी यह पोज़ीशन सुरक्षित रखी है। मेरा मानना है कि अगले कुछ वर्षों के दौरान ईरान और अधिक बेहतर पोज़ीशन में होगा और पेट्रोकेमिकल सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवीन तकनीक के प्रयोग के कारण ईरान दूसरे अंतर्राष्ट्रीय प्रतिद्वंदियों को ज़बरदस्त टक्कर दे रहा है।

 

ईरान से निर्यात होने वाले आंकड़ों के अनुसार ईरान से सबसे अधिक ग़ैर पेट्रोलियिम पदार्थों में सबसे अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पादन निर्यात होते हैं। ईरान से निर्यात होने वाले ग़ैर पेट्रोलियम पदार्थों में सबसे अधिक पेट्रोकेमिकल उद्योग से संबंधित है। भारतीय उपमहाद्वीप 13 प्रतिशत, दक्षिणपूर्वी एशिया 23 प्रतिशत,  चीन 22 प्रतिशत, सूदूर 18 प्रतिशत, यूरोपीय देश 5 प्रतिशत और मध्यपूर्व 19 प्रतिशत के साथ ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग के निर्यात में भागीदार हैं। कहा जाता है कि हालिया वर्षों के दौरान तथा प्रतिबंधों के काल में विभिन्न पेट्रोकेमिकल के उत्पादन के कारण भारी आर्थिक समस्याओं के बावजूद अपनी गतिविधियां जारी रखने में सफल रहा है। ईरान के तेल उद्योग पर प्रतिबंधों और तेल के निर्यात में कमी के कारण, ईरान के पेट्रोकेमिकल उत्पाद की बाज़ार में आवश्यकता की वजह से प्रतिबंध ईरान के पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्यात को रोक नहीं सके। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि प्रतिबंधों के दौरान ईरान के विदेशी मुद्रा के आय का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत पेट्रोकेमिकल उद्योग था।

ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग की एक अन्य विशेषता यह है कि इस उद्योग ने विदेशी और आंतरिक पूंजी निवेश को ज़बरदस्त आकर्षित किया है। ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग की एक अन्य विशिष्टता यह है कि देश के पेट्रोकेमिकल उद्योग के ईंधन को पूर करने के लिए देश में गैस और तेल के स्रोत पाए जाते हैं। ईरान तेल उद्योग की दृष्टि से दुनिया का चौथा तथा गैस का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है।

 

यह ऐसी स्थिति में है कि क्षेत्रीय देश, श्रमबल को पूरा करने के लिए पेट्रोकेमिकल उद्योग के उत्पादन से लेकर विभिन्न योजनाओं में विदेशी श्रम बल लगाने पर मजबूर हैं। यह ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग के शक्तिशाली होने का एक महत्वपूर्ण बिन्दु है जो विदेशी पूंजीनिवेशकों की नज़र से भी दूर नहीं है।

ईरान की भौगोलिक स्थिति, यूरोप तथा एशिया के बाज़ारों तक उसकी पहुंच की संभावना, निर्यात की सुविधा के लेहाज़ से स्वतंत्र जलक्षेत्र तक पहुंच तथा यातायात के ख़र्चे में कमी, ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग की एक अन्य विशिष्टता है। ईरान मध्यपूर्व का एकमात्र देश है जिसने आंतरिक उद्योग के कारख़ानों में अपनी आवश्यकता के समस्त संसाधनों को पूरा किया है। ईरान के पेट्रोकेमिकल उद्योग में नवीन तकनीक का प्रयोग हो रहा है और विशेषज्ञों और दक्ष लोगों के प्रयोग किए जाने के कारण ईरान के पेट्रोकेमिल उद्योग का भविष्य बहुत ही उज्जवल लगता है।

ग्लोबल डाटा एनर्जी संस्था के आंकड़ों के अनुसार अगले वर्षों के दौरान  ईरान अगले कुछ वर्षों में दुनिया में मैथेनल के उत्पादन में वृद्धि करेगा। दुनिया में मैथेनल पदार्थ तीसरे नंबर पर सबसे अधिक प्रयोग होने वाला रसायनिक पदार्थ है।  इसका प्रयोग रंग, दवा निर्माण, कृषि के ज़हर और स्वच्छ ईंधन क निर्माण सहित विभन्न क्षेत्रों में किया जाता है। वर्तमान समय में ईरान में औसतन प्रतिवर्ष पेट्रोकेमिकल उद्योग में पांच लाख टन से अधिक मैथेनल का उत्पादन किया है और दुनिया के बाज़ार विशेषकर पूर्वी एशिया और पश्चिमी यूरोप के बाज़ारों में निर्यात किया है। इस रिपोर्ट में बताया गया हैकि वर्ष 2022 तक ईरान में मैथेनल का उत्पादन तीन करोड़ टन तक पहुंच जाएगा। (AK)

 

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Jun २५, २०१८ १६:४३ Asia/Kolkata
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