विकास पक्ष कार्यक्रम श्रंखला की आख़री कड़ी में हम अबतक की बातों कासारांश प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।

हम ईरान के भीतर विकास के बारे में विस्तार से बता चुके हैं। ईरान ने इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद से विकास के मार्ग पर जो क़दम रखा उसपर वह तेज़ी से आगे बढ़ता रहा । ईरान की इस्लामी क्रांति की आयु अभी 40 वर्ष भी नहीं हुई है किंतु इस दौरान देश के भीतर होने वाली तरक़्क़ी उल्लेखनीय रहीं है। इस बात का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की कई विश्वसनीय संस्थाओं ने यह बात स्वीकार की है कि हालिया कुछ वर्षों के दौरान ईरान में होने वाली तरक़्क़ी की रफ़्तार बहुत तेज़ है। ईरान ने जिन क्षेत्रों में बहुत तेज़ी से विकास किया है उनमें से एक विज्ञान और तकनीक है। वर्तमान समय में ईरान मध्यपूर्व के बहुत से देशों की तुलना में वैज्ञानिक विकास की दृष्टि से उच्च स्तर पर है।

 

किसी भी देश के वैज्ञानिक विकास में साइंस पार्क की बहुत ही अहम भूमिका होती है। आपको याद होगा कि हमने ईरान में साइंस पार्क, विज्ञान पार्क या विज्ञान वाटिका के विकास के बारे में चर्चा की थी। सन 2000 के आरंभ में ईरान में जहां सांइस पार्कों की संख्या बहुत कम थी वहीं पर सन 2011 तक इनकी संख्या 131 हो गई। इसी के साथ इस अवधि में साइंस पार्क या विज्ञान पार्क में मौजूद कंपनियों की संख्या 600 से बढ़कर लगभग 3000 हो गई है। ईरान में सन 2000 से साइंस पार्कों की संख्या में तेज़ी आई। एक दशक के ही भीतर इनकी संख्या बढ़कर 131 से अधिक हो चुकी थी। इसी के साथ साइंस पार्कों में मौजूद कंपनियों की संख्या पहले बहुत कम थी और अब उनकी संख्या 676 है।

ईरान में वैज्ञानिक दृष्टि से होने वाली तरक़्क़ी में रोयान केन्द्र को अनदेखा नहीं किया जा सकता । रोयान एक वैज्ञानिक अनुसंधानिक केन्द्र है। इस केन्द्र ने जहां ईरान के भीतर लोगों को लाभ पहुंचाया वहीं पर इसने क्षेत्रीय देशों के लोगों को भी फ़ायदा पहुंचाया है। रोयान में किये जाने वाले कामों में से एक बांध लोगों का उपचार है। मध्यपूर्व के अतिरिक्त भी कई देश के नागरिक यहां पर इलाज के लिए आते हैं। हमने यह भी बताया था कि रोयान के वैज्ञानिकों ने क्लोनिंग के माध्यम से भेड़ पैदा की। इस केन्द्र ने स्टेम सेलज़ के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय काम किये। इस प्रकार से विज्ञान की कई शाखाओं में ईरान ने संसार में अपनी अलग पहचान बनाई। अपने कार्यक्रम में हमने अंतरिक्ष के क्षेत्र में ईरान की उपलब्धियों का ज़िक्र किया था। विश्व अंतरिक्ष क्लब का सदस्य होने के साथ ही ईरान इस समय उपग्रह बनाने, उसे नियंत्रित करने और उसे प्रक्षेपित करने में पूर्ण रूप में सक्षम है। इस हिसाब से वह दुनिया में नवें नंबर पर है। दूसरी ओर अंतरिक्ष में प्राणी को भेजने के साथ ही ईरान विश्व में यह काम करने वाला छठा देश हो चुका है। वैज्ञानिक लेखों की दृष्टि से ईरान सन 2013 में मध्यपूर्व में दूसरे नंबर पर था जबकि विश्व में उसका स्थान 21वां था।

 

हमने बताया था कि ईरान में बहुत कम समय में जो वैज्ञानिक प्रगति हुई है उसमें देश के मेधावियों के योगदान के साथ ही साथ ईरान की सरकार की नीतियों की भी बहुत प्रभावी भूमिका रही है। नि:सन्देह, ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता ने ईरान के भीतर व्यापक स्तर पर न केवल राजनैतिक और सामाजिक स्तर पर बड़े प्रभाव डाले बल्कि इस क्रांति ने देश में शिका के क्षेत्र को भी प्रभावित किया। ईरान की इस्लामी क्रांति, देश के भीतर एक एसे आन्दोलन की भूमिका बनी जिसके परिणामों ने हालिया दो दशकों के दौरान ईरान को बहुत कुछ दिया। इसी आन्दोलन के नतीजे में ईरान ने शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तर पर बहुत प्रगति की है।

इस्लामी क्रांति के आरंभिक काल में ईरान में यूनिवर्सिटी के छात्रों की संख्या लगभग 16 हज़ार थी जो 1999 में बढकर एक लाख बीस हज़ार से अधिक हो गई थी। इस समय चालीस लाख से अधिक छात्र, ईरान में विश्वविद्यालयों में शिक्षा गहण कर रहे हैं। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार ईरान वैज्ञानिक क्षेत्र में रफ़्तार विकास की दृष्टि से दुनिया में पहले नंबर पर है। ईरान की दुनिया के 25 देशों के साथ वैज्ञानिक प्रतिस्पर्धा है और इन देशों की तुलना में ईरान 14 प्रतिशत आगे है। इनवेशंन सहित दूसरे क्षेत्रों में ईरान 113 स्थान से 78वें स्थान पर पहुंच गया है। क्षेत्र सहित इस्लामी जगत में ईरान पहले स्थान पर है।

हमने ईरान में साइंस पार्क, विज्ञान पार्क या विज्ञान वाटिका के विकास के बारे में चर्चा की थी। सन 2000 के आरंभ में ईरान में जहां सांइस पार्कों की संख्या बहुत कम थी वहीं पर सन 2011 तक इनकी संख्या 131 हो गई। इसी के साथ इस अविध में साइंस पार्क या विज्ञान पार्क में मौजूद कंपनियों संख्या 600 से बढ़कर लगभग 3000 हो गई है।

आईएसआई की रिपोर्ट के अनुसार सन 1979 में ईरान में आने वाली इस्लामी क्रांति से पहले अर्थात पहलवी के शासनकाल में ईरान के विद्धानों की ओर से अन्रर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओ में 2026 लेख छापे गए।

वहीं ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद के लगभग 37 वर्षों में ईरान में दो लाख पैंतालिस हज़ार थोधपत्र और वैज्ञानिक लेख सामने आए हैं। इस प्रकार से शिक्षा के क्षेत्र में ईरान में बहुत तेज़ी से विकास हुआ और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान की भागीदार बढ़कर पचास प्रतिशत हो गई। विशेष बात यह है कि यह विकास और प्रगति एसी स्थिति में हुई है कि जब ईरान ने आठ वर्ष युद्ध में बिताए और आरंभ से उसे अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों का सामना रहा है।

इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान ने ईश्वर की सहायता और देश की जनता के दृढ संकल्प के माध्यम से ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। यह देश इस समय बहुत से देशों विशेषकर अत्याचारग्रस्त के लिए आदर्श के रूप में बदल चुका है। 

 

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Jun २७, २०१८ १५:०५ Asia/Kolkata
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