बीसवीं ईसवी शताब्दी के 70 के दशक से माहिर लोगों ने दुनिया में ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों में प्राकृतिक गैस पर विशेष रूप से ध्यान दिया और दुनिया में इस्तेमाल होने वाले ऊर्जा के स्रोतों में, प्राकृतिक गैस बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होती है।

दुनिया में एनर्जी बास्केट में प्राकृतिक गैस के बेहतर स्थान पर होने का कारण जनसंख्या में वृद्धि, ऊर्जा के उत्पादन की प्रौद्योगिकी में विकास और ऊर्जा से संबंधित विज्ञान में प्रगति और इसी तरह ऊर्जा के उपभोग के बढ़ते बाज़ार हैं। हालिया दशकों में दुनिया में ऊर्जा की मांग पर्यावरण को कम नुक़सान पहंचाने वाले ईंधन की ओर बढ़ी है। पत्थर के कोयले और तेल जैसे जीवाष्म ईंधन की तुलना में प्राकृतिक गैस से कम प्रदूषण होता है।

 

प्राकृतिक गैस से हासिल ऊर्जा की हर इकाई से कच्चे तेल की तुलना में लगभग 24 फ़ीसद और पत्थर के कोयले की तुलना में 42 फ़ीसद कम प्रदूषण फैलाने वाली गैसों का उत्पादन होता है हालांकि इससे हासिल ऊर्जा अधिक होती है। प्राकृतिक गैस बिजली का उत्पादन करने वाले अहम स्रोतों में है और इस स्वच्छ ऊर्जा की मांग बढ़ती जा रही है। अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2007 से 2035 के बीच बिजली के उत्पादन में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल 1.2 फ़ीसद की दर से बढ़ेगा। कम प्रदूषण व कम पूंजिनिवेश और अधिक उपयोगिता वे तत्व हैं जिनकी वजह से प्राकृतिक गैस ने ऊर्जा के अहम स्रोत के रूप में अपना स्थान बनाया है। अध्ययन से पता चलता है कि 2015 में दुनिया में 3500 अरब घन मीटर प्राकृतिक गैस का उपभोग हुआ और यह वर्ष 2000 की तुलना में 41 फ़ीसद वृद्धि को दर्शाता है। प्राकृतिक गैस की खोज का इतिहास हज़ारों साल पुराना है। ऐतिहासिक दस्तावेज़ के अनुसार, चीनी 3000 साल पहले ज़मीन के भीतर 300 से 600 मीटर की गहराई में गैस निकालते और उससे नमकीन पानी का वाष्पीकरण करते थे। ऐतिहासिक दस्तावेज़ के अनुसार, प्राचीन युग के ईरानी तेल और गैस को संयोगवश उसके प्राकृतिक रूप में इस्तेमाल करते थे। अतीत में ज़मीन के नीचे कुछ भंडारों की परत के कम गहराई में स्थित होने की वजह से तैलीय पदार्थ मिट्टी के क्षरण या भूगर्भीय फ़ॉल्टलाइन के हिलने की वजह से रिसते थे और इसके नतीजे में अपने आप जलने वाला फ़िनामिनन वुजूद में आता था।

 

मस्जिद सुलैमान के निकट पारसियों के उपासना स्थल के अवशेष और आज़रबाइजान में आज़र गशस्ब अग्निकुंड वे स्थल हैं जहां पारसी अपने अग्निकुंड को हमेशा ज्वलंत स्थिति में बाक़ी रखने के लिए अपने आप जलने वाले फ़िनामिनन को इस्तेमाल करते थे।

  

गैस, जीवाष्म ईंधन का एक प्रकार है जिससे अन्य जीवाष्म ईंधन की तुलना में पर्यावरण को कम ख़तरा होता है और इसे रिसाइकल न होने वाले स्रोतों में गिना जाता है। आज गैस औद्योगिक और घरेलू स्तर पर उपभोग होने वाले प्रचलित ईंधनों में शामिल है। आज गैस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है और इस बात का अनुमान है कि अगले दशकों में इसका इस्तेमाल बढ़ेगा। ब्रिटिश पेट्रोलिमय नामक ब्रिटिश पेट्रोलियम कंपनी की "2017 में दुनिया में ऊर्जा के इस्तेमाल की समीक्षा" शीर्षक के तहत एक रिपोर्ट में आया हैः "2016 में दुनिया में गैस का उत्पादन बढ़ा और औसतन 3500 अरब घन मीटर से ज़्यादा रहा।" यह आंकड़ा 2015 की तुलना में 21 अरब घन मीटर अधिक उत्पादन को दर्शाता है।

 

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान 190 अरब घन मीटर गैस के उत्पादन के साथ दुनिया में गैस का तीसरा उत्पादक देश था। उल्लेखनीय है कि दुनिया में प्राकृतिक गैस के सबसे ज़्यादा स्रोत से संपन्न होने की दृष्टि से ईरान पहले स्थान पर है। दुनिया में गैस का स्रोत 188 ट्रिलियन घन मीटर है। ईरान में गैस का प्रमाणित स्रोत 34 ट्रिलियन घन मीटर है जो पूरी दुनिया में प्राकृतिक गैस के कुल स्रोत का 18 फ़ीसद, पश्चिम एशिया का 41 फ़ीसद और तेल निर्यातक देश ओपेक के गैस के कुल स्रोत का 40 फ़ीसद है।                      

ईरान की राष्ट्रीय गैस कंपनी की 1966 में स्थापना हुयी। यह कंपनी दुनिया में गैस उद्योग के क्षेत्र में प्रतिष्ठित कंपनियों शामिल हैं। ईरान की राष्ट्रीय गैस कंपनी ने देश की ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक नीति के मद्देनज़र, विकास में ध्रुव की हैसियत रखने वाले तत्व के रूप में प्राकृतिक गैस के ईष्टतम इस्तेमाल, गैस उद्योग में विकास, पर्यावरण की रक्षा, राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में प्राकृतिक गैस की रक्षा और देश की एनर्जी बास्केट में प्राकृतिक गैस के भाग में वृद्धि को अपना लक्ष्य निर्धारित किया है। ईरान की राष्ट्रीय गैस कंपनी के काम में उद्योगों, बिजली घरों, व्यापारिक और घरेलू स्तर पर ईंधन की आपूर्ति शामिल है। इस समय ईरान में 73000 से अधिक औद्योगिक इकाइयां अपनी ऊर्जा ज़रूरत प्राकृतिक गैस से पूरी करती हैं और गांवों में 70 फ़ीसद से ज़्यादा और शहरों में 95 फ़ीसद से ज़्यादा परिवारों की गैस तक पहुंच है।  ईरान में हर दिन 80 करोड़ घन मीटर से ज़्यादा गैस का उत्पादन होता है। ये गैस पेट्रोकेमिकल इकाइयों, बिजली घरों, स्वदेशी उद्योगों, घरेलू इस्तेमाल में आने के साथ साथ पड़ोसी देशों और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में निर्यात होती हैं।

 

2011 के आंकड़ों के अनुसार, ईरान में गैस की 42 से ज़्यादा फ़ील्ड और 92 से ज़्यादा गैस के भंडारों का पंजीकरण हुआ है। ईरान की गैस फ़ील्ड में आग़ा जारी, पार्से शुमाली, ताबनाक, ख़य्याम, ख़ानगीरान, दालान, रहाम, सर्ख़ून, सफ़ीद बाग़ून, शानूल, फ़ारू, कमान्कूह, कंगान, कीश, मुबारक, नार, हाल्गान, हेन्गाम और हामून उल्लेखनीय हैं। ईरान में तेल और गैस की फ़ील्ड फ़ार्स की खाड़ी के कम गहराई वाले जल क्षेत्रों से कैस्पियन सी के गहरे पानी में और इसी तरह सूखे क्षेत्रों में स्थित हैं।

        

इस समय ईरान ऊर्जा के प्रचलित स्रोतों के मद्देनज़र, दुनिया में तेल और गैस के सबसे बड़े भंडार से संपन्न है। बताया जाता है कि ईरान में गैस हाइड्रेट के भंडार अपारंपरिक गैस भंडार से अधिक हैं।

ईरान उन देशों में है जिनके तेल और गैस के अनेक मैदान पड़ोसी देशों के साथ संयुक्त रूप से हैं। ईरान के पड़ोसी देशों के साथ तेल और गैस की 28 संयुक्त फ़ील्ड हैं। इनमें से 18 तेल की, 4 गैस की और तेल और गैस की एक साथ 6 फ़ील्ड हैं। ईरान की कुवैत, क़तर, आज़रबाइजान, यूएई, सऊदी अरब, इराक़ और तुर्कमनिस्तान के साथ तेल और गैस की संयुक्त फ़ील्ड हैं। ईरान की तेल और गैस की जो फ़ील्ड संयुक्त हैं उनके नाम इस तरह हैं।

 

सलमान और बी फ़ार्स गैस फ़ील्ड सऊदी अरब के साथ, मुबारक गैस फ़ील्ड यूएई के साथ, हेन्गाम गैस फ़ील्ड ओमान के साथ, गुंबदली तुर्कमनिस्तान के साथ और पार्से जुनूबी क़तर के साथ संयुक्त गैस फ़ील्ड है। बताया जाता है कि तेल और गैस के इन मैदानों से पूरी धरती की 10  फ़ीसद आबादी की ऊर्जा की ज़रूरत पूरी हो सकती है। विशाल पार्स जुनूबी गैस फ़ील्ड जिसका क़तर में पड़ने वाला भाग गुंबद शुमाली के नाम से मशहूर है, 9700 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर फैली हुयी है। अकेले इस फ़ील्ड में दुनिया के गैस के भंडार का 8 फ़ीसद भंडार मौजूद है। इस गैस फ़ील्ड का 3700 वर्ग किलोमीटर भाग ईरान के जलक्षेत्र में पड़ता है और अकेले इस भाग में ईरान के कुल गैस के भंडार का आधा भाग मौजूद है। पार्स जुनूबी गैस फ़ील्ड के इस भाग में गैस का भंडार 14 ट्रिलियन घन मीटर गैस और 18 अरब बैरल कॉन्डनसेट गैस है। ईरान हर दिन संयुक्त पार्स जुनूबी गैस फ़ील्ड से 50 करोड़ घन मीटर गैस निकालता है जिससे वह प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल की बढ़ती मांग की आपूर्ति, एलएनजी का उत्पादन व निर्यात करता और पेट्रोकेमिकल इकाइयों के लिए ज़रूरी गैस कॉन्डनसेट बनाता है।

 

ईरान ने गैस निर्यात की नीति में पड़ोसी देशों को प्राथमिकता दी है। इस प्राथमिकता का कारण गैस निर्यात व स्थानांतरित करने की शैली और आर्थिक फ़ायदा है। इस समय तुर्कमनिस्तान, तुर्की और आर्मीनिया को ईरान गैस निर्यात करता है और इसी तरह भारत, कुवैत, यूएई, जॉर्जिया और अफ़ग़ानिस्तान भी ईरान की गैस के ग्राहकों में शामिल हैं।

 

Jul ०१, २०१८ १६:११ Asia/Kolkata
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