हेन्दूराबी" फार्स की खाड़ी में मौजूद एक ईरानी द्वीप है जो प्रसिद्ध " कीश " द्वीप से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

" हेन्दूराबी" वास्तव में कीश द्वीप के पश्चिम में , कीश और लावान द्वीपों के बीच में स्थित है और इस द्वीप का क्षेत्रफल लगभग 12.8 वर्ग किलोमीटर है।

 

इस  द्वीप की भूमि समतल है। इस द्वीप का सब से  ऊंचा  भाग 29 मीटर है और सब से मोटा भाग साढ़े सात किलोमीटर का है। इस द्वीप को पहले " अन्दराबी" कहा जाता था जिसका अर्थ, पानी के भीतर मौजूद सूखा क्षेत्र होता है । यह द्वीप गर्म व आर्द्रता वाले क्षेत्र में स्थित है इस लिए यहां गर्मियों का मौसम लंबा होता है और जाड़े के मौसम में हल्की सर्दी पड़ती है और यह मौसम अधिक दिनों तक नहीं रहता। इस द्वीप की यात्रा का सब से अच्छा समय, दिसंबर से मई तक है।

इस द्वीप पर  ऐतिहासिक गांव " अद्दौरात"  के अवशेष बाकी हैं जो वास्तव में पुर्तागलियों का सैनिक दुर्ग था और उसका संबंध सफवी काल से था और यह गांव हिन्दुराबी नामक गांव के निकट स्थित है। पुर्तगालियों ने 16 वीं सदी से लेकर 17वीं सदी तक इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर रखा था और  " हेन्दूराबी" भी उनका सैन्य व व्यापार केन्द्र था और उन्होंने इस द्वीप में सैन्य व आवासीय इमारते भी बना रखी थीं । पुर्तगालियों के एक गांव  और एक क़िले के अवशेष आज भी इस द्वीप में देखे जा सकते हैं। इस द्वीप पर सौ से कम परिवार रहते हैं और अधिकांश लोग मछुआरे और गोताखोर हैं। अतीत में एक द्वीप पर मौजूद एक मात्र गांव की आाबादी सौ घरों से भी कम थी लेकिन हालिया कुछ वर्षों में इस द्वीप पर रहने वालों की संख्या बढ़ी है क्योंकि स्थानीय लोगों के परिवार भी बढ़े हैंऔर बाहरी लोग भी इस द्वीप में रहने लगे इसके साथ ही पर्यटकों की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।

 

हम यह कह सकते हैं कि इस द्वीप पर जाकर आप को राबिन्सन जैसा महसूस होगा । " हेन्दूराबी" में आप को शांत तट नज़र आएंगे और एेसा महसूस होगा कि जैसा इन तटों पर कभी कोई इन्सान आया ही नहीं। द्वीप में विभिन्न प्रकार के पशु पंछी नज़र आते हैं और तटों पर पंछियों का झुंड मंडराता रहता है। इसी प्रकार समुद्री कछुए अंडे देने के लिए इस द्वीप पर जाते हैं और यह बड़ा अच्छा दृश्य होता है। इस द्वीप में जीव जन्तुओं की संख्या कम है फिर भी छोटे पंछी, पलायनकर्ता पंछी , कुछ रेंगने वाले जीव जन्तु और रेगिस्तानी चूहे देखने को मिल जाते हैं।

 

" हेन्दूराबी" के उत्तरी तट पर मूंगे की चट्टानेों ने इस क्षेत्र को समुद्री जीव जन्तुओं के लिए एक अत्याधिक उचित स्थल में बदल दिया है।। इस द्वीप में विभन्न प्रकार के मूंगे , टैंग फिश, यलो फिश , यूनिक, पीकासो जैसी विभिन्न प्रकार की मछलियां पायी जाती हैं। द्वीप के उत्तरी भाग में मूंगे अधिक पाए जाते हैं लेकिन दक्षिणी तट अधिक गहरे होने की वजह से गोताखोरी के लिए उचित समझे जाते हैं। इसी प्रकार द्वीप के दक्षिणी तट, कम गहराई के कारण  स्नॉर्कलिंग (Snorkeling)  के लिए उचित हैं  और इन तटों पर आप को मुंह में नलकी दबाए गोताखोरी का आनंद उठाते बहुत से लोग नज़र आ जाएंगे।  दक्षिणी तट, रात के समय गोताखोरी के लिए भी बहुत अच्छे हैं क्योंकि रात में रंग बिरंगी मछलियों के साथ तैरने का सुनहरा अवसर मिलता है। इसी प्रकार द्वीप के पूर्वी तट अर्थात कीश और हेन्दूराबी द्वीप के बीच का भाग, फार्स की खाड़ी में गोताखोरी के लिए अत्याधिक उचित जगह है। इस इलाके में समुट्र की गहरायी 8 मीटर से लेकर 18 मीटर तक है और अधिक गहरायी वाले हिस्सों में तारामीन या स्टार फिश को देखा जा सकता है।

 

" हेन्दूराबी" में पर्यटकों के लिए बहुत से आकर्षण हैं । यह एक शांत द्वीप है जहां की आबादी बेहद कम है लेकिन उसके तट बेहद खूबसूरत हैं जहां आराम करने के लिए चिकने पत्थर भी हैं इस लिए बहुत से लोग समुद्न में तैरने के बाद इन पत्थरों पर लेट कर धूप का आनंद लेते हैं। यह द्वीप पर्यटन व्यवस्था की दृष्टि से कीश के अंतर्गत आता है और अपनी खूबसूरती और कीश की विशेष स्थिति के कारण यह द्वीप ईरान की सैर में रूचि रखने वालों के लिए रोचक स्थान हो सकता है। कीश फ्री ज़ोन से " हेन्दूराबी" को जोड़े जाने के बाद पर्यटन की दृष्टि से इस द्वीप में विकास कार्यों में तेज़ी पैदा हुई है और हालिया वर्षों में कीश विकास प्रधिकरण ने " हेन्दूराबी" द्वीप को पर्यटन का केन्द्र बनाने के लिए बड़े बड़े क़दम उठाए हैं। निवेशकों को बुलाना, तैरती जेट्टी का निर्माण तथा कई पिकनिक स्थलों का निर्माण, कीश विकास प्रधिकरण द्वारा " हेन्दूराबी" में उठाये गये कदमों में शामिल है। द्वीप के चारों ओर 17 किलोमीटर लंबी सड़क , " हेन्दूराबी सराय तथा तट पर बंगलों का निर्माण जारी है। इस द्वीप में पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों का प्रयोग निषेध है और " हेन्दूराबी" में बिजली से चलने वाले वाहन ही प्रयोग किये जाते हैं।

 

 " हेन्दूराबी" की यात्रा करने के दो मार्ग हैं एक हवाई और समुद्री है लेकिन असली मज़ा, समुद्र के रास्ते से जाने में है। कीश से " हेन्दूराबी" जाने के लिए स्टीमर और जहाज़ चलते हैं। वैसे सन 2016 में " हेन्दूराबी" के एयरपोर्ट का उदघाटन हो चुका है।  इस हवाई अड्डे पर फोकर और 50 यात्रियों वाले  छोटे विमान उतर सकते हैं।

 

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Jul २१, २०१८ १४:१६ Asia/Kolkata
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