ईरान ऐसा देश है जिसके पास 150 अरब बैरेल से अधिक तेल भण्डार है। 

इस प्रकार से ईरान के पास संसार के पुष्ट तेल भण्डार का दस प्रतिशत भाग मौजूद है।  विश्व में तेल के स्वामी बड़े देशों में ईरान चौथे नंबर का देश है। 

वर्तमान समय में पूरे विश्व की आर्थिक गतिविधियों में ऊर्जा को विशेष महत्व प्राप्त है।  विश्व स्तर पर आर्थिक और औरद्योगि विकास की प्रक्रिया में काफ़ी हद तक ऊर्जा की भूमिका है।  ऊर्जा के क्षेत्र में कई विकल्पों पर विचार और उनके प्रयोग के बावजूद ऊर्जा की आपूर्ति में तेल और गैस को विशेष स्थान प्राप्त है।  Exxon Mobil co. ने 2017 की अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताय है कि सन 2040 तक संसार में ऊर्जा के प्रयोग में तेल की भूमिका 32 प्रतिशत तक तो अवश्य ही रहेगी।  इस प्रकार तेल को वैश्विक अर्थव्यवस्था में उच्च स्थान प्राप्त रहेगा।  तेल एक ऐसी स्ट्रटेजिक वस्तु है जिसकी वैश्विक स्तर पर विकास में केन्द्रीय भूमिका हासिल है।

ब्रिटिश तेल कंपनी बीपी की रिपोर्ट के अनुसार सन 2016 के अंत तक संसार में तेल भण्डार दस खरब और सात सौ अरब बैरेल था।  संसार में जितना भी तेल पाया जाता है उसका आधा पश्चिम एशिया में मौजूद है।  बीपी की इस रिपोर्ट के अनुसार ईरान के पास 150 अरब से अधिक बैरेल तेल है।  इस प्रकार से उसके पास विश्व के तेल भण्डार का लगभग 10 फ़ीसद भाग मौजूद है।  ईरान के पास 170 तेल और गैस  की फ़ील्ड हैं जिनमें से 120 तेल की जबकि 50 गैस की हैं।  इसी प्रकार ईरान में 170 से अधिक विकसित और अविकसित तले तथा गैस के भण्डार पाए जाते हैं।  यह ऐसी स्थिति में है कि जब इस देश में 200 से अधिक तेल एवं गैस भण्डारों को हाथ तक नहीं लगाया गया है।  ईरान के कच्चे तेल के 70 प्रतिशत भण्डार, तटवर्ती हैं जबकि दूसरे फ़ार्स खाड़ी और कैस्पियन सी में है।

संसार में प्राचीनकाल से ही तेल का प्रयोग होता आया है।  शोध तथा अध्ययनों से पता चलता है कि प्राचीनकाल में सभ्य समाजों विशेषकर मेसोपोटामिया में तेल का प्रयोग किया जाता था।  चार हज़ार साल से भी अधिक समय पहले से लोगों को तारकोल या डामर सहित तेल पदार्थों के बारे मे जानकारी थी।  उस काल के लोग तारकोल को एक ऐसे पदार्थ के रूप में प्रयोग करते थे जिसपर किसी दूसरी वस्तु का प्रभाव नहीं होता।  रोमी और यूनानी भी तारकोल को प्रकाश तथा गर्मी के लिए एवं नाव और पानी के जहाज़ों पर प्रयोग करते थे ताकि उनके भीतर पानी न पहुंच सके।

ईरान में हख़ामनशी काल के दौरान तेल को चिकित्सा के क्षेत्र में भी प्रयोग किया जाता था।  एक यूनानी इतिहासकार "हेरोडोटस" का मानना है कि तेल और तारकोल की खोज ईरानियों ने की थी।  फ्रांस में सन 1745 ईसवी में पहली बार तेल के कुंए की खोज की गई थी।  संसार में पहली बार तेल निकालने का काम सन 1859 ईसवी में अमरीका के पेंसिलवेनिया राज्य में किया गया था।  मध्यपूर्व में तेल की खुदाई का काम बीसवीं शताब्दी के आरंभ से शुरू हुआ।  इस क्षेत्र में पहली बार तेल निकालने का काम दक्षिणी ईरान के नगर मस्जिदे सुलैमान से हुआ।

सन 1290 हिजरी शमसी में मस्जिदे सुलैमान नगर के पहले कुंए से तले निकालने का काम आरंभ हुआ था जिसे ईरान में तेल उद्योग का आरंभिक बिंदु माना जा सकता है।  मस्जिदे सुलैमान नगर में पहली बार तेल की खोज के बाद दक्षिणी ईरान के अन्य क्षेत्रों में तेल की खोज का काम आरंभ हुआ।  बाद में सन 1306 हिजरी शमसी में हफ़्तक, 1315 में आग़ाजारी, 1337 में अहवाज़, बीनक में 1328, बीबी हकीमे में 1340, मारून व करंज में 1342 तथा पारसी और रगेसफ़ीद में 1343 में तेल की खोज के बाद उसके निकालने का काम शुरू किया गया।

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था में दिन-प्रतिदिन बढ़ती अपनी प्रमुख भूमिका के साथ ही सन 1960 ईसवी में तेल पैदा करने वाले देशों की उपस्थिति में इराक़ की राजधानी बग़दाद में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था।  सम्मेलन के बाद ओपेक अर्थात आर्गनाइज़ेशन आफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कन्टरीज़ नामक संगठन का गठन किया गया।  इसका उद्देश्य ओपेक के सदस्य देशों के बीच अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तेल की नीतियों को समन्वित करते हुए तेल के मूल्यों को नियंत्रित करना था।  ओपेक के आरंभिक सदस्य देश थे ईरान, इराक़, सऊदी अरब, कुवैत और वेनेज़ोएला।  कुछ समय के बाद पेट्रोलियम निर्यातक संगठन ओपेक में क़तर, लीबिया, इन्डोनेशिया, अल्जीरिया, नाइजीरिया, एक्वाडोर, अंगोला तथा संयुक्त अरब इमारात आदि भी शामिल हो गए।  सर्वेक्षणों से पता चलता है कि ओपेक संगठन विश्व में लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन करता है।  संसार के पुष्ट तेल भण्डार का लगभग दो तिहाई भाग ओपेक के नियंत्रण में है।  सन 2017 के आरंभ में आपेक संगठन का दैनिक उत्पादन 31 मिलयन बैरेल से अधिक था।  ओपेक के तेल भण्डार का 13 प्रतिशत भाग ईरान के पास है।  इस प्रकार से वह ओपेक का तीसरा बड़ा देश सदस्य है।

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता से पहले तक इस देश का तेल उद्योग विदेशियों के हाथों में था।  उस समय ईरान में तेल उद्योग के क्षेत्र में 18000 विदेशी सलाहकार और कर्मचारी सक्रिय थे।  ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता के साथ ही तेल के क्षेत्र में विदेशियों को निकाल बाहर करने के बाद तेल उद्योग से संबन्धित सारे ही काम ईरानियों ने अपने हाथों में ले लिए।  इस्लामी क्रांति की सफलता के एक वर्ष के बाद सन 1980 में ईरान में पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल, गैस, पैट्रोकैमिकल, शोधन तथा तेल उत्पादों से संबन्धित चार कंपनियों के साथ अपनी गतिविधियां आरंभ कीं।

ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी संसार की उन बड़ी कंपनियों में से एक है जो तेल के उत्पाद के लिए योजनाबंदी, तेल निकालने, तेल शोधन और तेल निर्यात जैसे काम करती है।  इस प्रकार ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी, तेल ओर गैस के क्षेत्र में हर प्रकार के काम करती है।  इस कंपनी के अन्तर्गत कई कंपनियों के माध्यम से कच्चे तेल का उत्पादन और प्राकृतिक गैस ढूंढने और निकालने का काम किया जाता है।  जो कंपनियां ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनियों के अन्तर्गत काम करती हैं उनमें सबसे बड़ी कंपनी, दक्षिण की राष्ट्रीय तेल कंपनी है जिसकी ईरान की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है।  यह कंपनी कच्चा तेल निकालने और ऊर्जा की आपूर्ति के क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है।  इस कंपनी के नियंत्रण में 50 से अधिक छोटे-बड़े हाइड्रोकार्बनिक तेल के मैदान हैं।  यह लगभग चार लाख वर्ग किलोमीटर में सक्रिय है और ईरान के लगभग 70 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन करती है।  तेल से संबन्धित इस विस्तृत भू-भाग में अहवाज़, गचसारान, मारून, करंज और पारसी जैसे तेल के विशाल मैदान हैं।

तेल के मूल्यों की दृष्टि से ईरान के तेल उद्योग को कुछ विशेषताएं प्राप्त हैं जैसे यहां पर पैदा किये गए तेल की क़ीमत कम होती है।  उल्लेखनीय बात यह है कि तेल के उत्पादन के ख़र्च के दो मुख्य कारक हैं, एक पूंजीनिवेश और दूसरे इसके उत्पादन पर आने वाला ख़र्च।  ज़मीन से तेल निकालने में जो ख़र्च होता है वह मज़दूरी का ख़र्च और कुछ अन्य बातें।  तेल के मूल्यों को निर्धारित करने में कच्चा तेल निकालने पर किये जाने वाले ख़र्च की बहुत अहम भूमिका होती है।  हालिया वर्षो में जब तेल की क़ीमत 30 डालर प्रति बैरेल के नीचे तक चली गई तो तेल का उत्पादन करने वाले कुछ देशों ने तेल निकालने का काम बंद कर दिया क्योंकि उनको इसपर बहुत अधिक धन ख़र्च करना पड़ रहा था।  ईरान उन देशों में से है जिनके तेल के मूल्य कम हैं।  एक अनुमान के अनुसार ईरान में निकाले जाने वाले एक बैरेल तेल पर बारह डालर साठ सेंट का ख़र्च आता है।  इस प्रकार से ईरान, संसार में सस्ता तेल पैदा करने वाला पांचवा देश है।

ईरान ने सन 2017 में 770 मिलयन अर्थात 77 करोड़ बैरेल से अधिक कच्चे तेल का निर्यात किया।  सन 2017 में ईरान में जो तेल पैदा किया गया उसका 60 प्रतिशत भाग एशियन देशों को और 40 प्रतिशत यूरोपीय देशों को निर्यात किया गया।  एशिया में ईरान से सबसे अधिक तेल चीन और भारत आयात करते हैं उसके बाद दक्षिणी कोरिया और जापान का नंबर आता है।  यूरोप में ईरान के तेल के ख़रीदारों में इटली, ब्रिटेन, पोलैण्ड और हालैण्ड का नाम लिया जा सकता है।  ईरान ने 2017 में कच्चे तेल के अतिरिक्त सत्रह मिलयन टन Furnace oil या फर्नेस तेल और लगभग दो मिलयन टन गैसोलीन अपने पड़ोसी देशों को निर्यात किया।  ईरान में तेल के उत्पादन के संबन्ध में किये गए सर्वे से यह पता चलता है कि वर्तमान समय में ईरान में तेल की उत्पादन की क्षमता 35 लाख बैरेल प्रतिदिन से अधिक है।  

 

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Jul २२, २०१८ १३:५० Asia/Kolkata
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