अबू सअद अब्दुल करीम बिन मुहम्मद समआनी छठीं हिजरी सदी में ईरान के प्रसिद्ध साहित्यकार, इतिहासकार, कुरआने मजीद का स्मरण करने वाले और धर्म ज्ञानी थे।

अब्दुलकरीम समआनी का जन्म 21 शाबान सन 506 हिजरी क़मरी बराबर 9 फरवरी सन 1113 ईसवी में ईरान के खुरासान प्रान्त के मर्व नगर के निकट स्थित समआन में हुआ । उनके परिवार के सभी सदस्य पढ़े लिखे थे। समआन वास्तव में एक मोहल्ले का नाम था और समआनी वरिष्ठ धर्म गुरु सब के सब इसी मोहल्ले से संबंध रखते थे। उनके पिता तीन वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञन प्राप्त करने के लिए नीशापुर ले गये और जैसा कि स्वंय उन्होंने अपनी किताब " अलअनसाब" में बताया है कि उसके एक साल बाद उनके पिता का निधन हो गया और उनकी शिक्षा दीक्षा की ज़िम्मेदारी उनके चाचाओं के कांधों पर आ गयी। समआनी लोग, सब के सब ज्ञानी थे। उनके बड़े चाचा अबू मुहम्मद हसन बिन अबी अलमुज़फ्फ़र समआनी, बड़े पवित्र ज्ञानी थे और अबू सअद ने मुअम्मर बिन राशिद की अलजामेअ, अहमद बिन सैयार की तारीख, अबी ज़करिया मुज़क्की की अमाली जैसी किताबें , अपने बड़े चाचा से ही पढ़ीं। इसी तरह उन्होंने अपने छोटे चाचा अबुलक़ासिम अहम बिन मंसूर समआनी से हदीस और इस्लामी नियमों का ज्ञान प्राप्त किया। बताया जाता है कि समआनी की बहन भी काफी पढ़ी लिखी थीं और अबू गालिब मुहम्मद बिन हसन बाक़लानी बगदादी ने उन्हें पैगम्बरे इस्लाम के कथनों का वर्णन करने की उन्हें अनुमति भी दी थी। समआानी ने अपनी किताब अलअनसाब में लिखा है कि उन्होंने अपन इस बहन से हदीस व बहुत कुछ सीखा है। उनके अन्य गुरु कि जिनका स्वंय उन्होंने  नाम लिया है अबु शुजाअ उमर बिन अबुलहसन बस्तामी हैं। यह वही हैं जिन्होंने समआनी को " अलअनसाब" किताब लिखने पर प्रोत्साहित किया था।

 

 

समआनी ने इन बुद्धिजीवियों के अलावा भी बहुत से धर्मगुरुओं से शिक्षा प्राप्त की है और पैगम्बरे इस्लाम के कथनों के अध्ययन के लिए बहुत से क्षेत्रों की यात्रा की और बहुत सी कठिनाइयां उठायी हैं। उन्होंने ज्ञान प्राप्ति और अध्ययन के लिए इस्फहान, खुरासान, हमदान,  मध्य एशिया, इराक़ , हिजाज़ सीरिया , तबरिस्तान और बैतुलमुकद्दस की बार बार यात्रा की। इब्ने नज्जार ने लिखा है कि उन्होंने सात हज़ार बुद्धिजीवियों से हदीस सुनी है। समआनी को हदीस लिखने में बहुत आनंद आता था । हदीस , पैगम्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के कथन को कहा जाता है। साहिब बिन एबाद ने उनका यह कथन लिखा है कि जिसने हदीस नहीं लिखा उसे इस्लाम की मिठास का पता ही नहीं चला। समआनी की जीवनी के बारे में बस इतना ही पता है और उनकी मूल्यवान किताबों के अतिरिक्त कुछ और अब हमारे पास नहीं है। समआनी रबीउल अव्वल सन 562 हिजरी कमरी , बराबर दिसम्बर सन 1166 ईसवी में इस दुनिया से चल बसे।

 

 

समआनी ने ज्ञान प्राप्ति के लिए अपने जीवन का अधिकांश भाग यात्रा में गुज़ारा। समआनी ने बहुत सी किताबे लिखी हैं लेकिन उनकी सब से मशहूर किताब, " अलअन्साब " है जिसे " समआनी की अलअन्साब " के नाम से भी ख्याति प्राप्त है। " तारीखे मर्व " उनकी अन्य रचना है जो ईरान के मर्व नामक क्षेत्र के बारे में अध्ययन के लिए एक अत्याधिक विश्वस्त स्रोत है। समआनी ने  खतीबे बगदादी की किताब " तारीखे बगदाद" पर पूरक नोट्स लिखे हैं। अलअन्साब  छठी हिजरी क़मरी में लिखी जाने वाली अत्याधिक महत्वपूर्ण किताब है। समआनी ने अपनी किताब में खुद लिखा है कि यह किताब उन्होंने अपने गुरु के कहने पर लिखी और 505 हिजरी क़मरी में इसे समरकंद में लिखना आरंभ किया।

 

 

यह किताब  आठ हिस्सों में लिखी गयी है और इसका विषय अरबों के वंश के बारे में है। हालांकि इसका विषय अरबों की नस्ल और वंश के बारे में है मगर इस किताब में अन्य विषयों के बारे में भी मूल्यवान जानकारियां हैं। हर भाग में प्रसिद्ध लोगों के वंश व पूर्वजों का वर्णन करने के बाद उनके नगरों का भी वर्णन किया गया। इस तरह से भुगोल और इतिहास के बारे में मूल्यवान जानकारियां प्रदान की गयी हैं। समआनी ने यह मालूमात, अपनी यात्राओं के दौरान एकत्रित की थीं। यह जानकारियां इस किताब को मूल्यवान बनाती हैं और इस तरह की यह एकमात्र किताब है।

 

 

अलअन्साब नाम की इस किताब की एक विशेषता यह भी है कि इस किताब में ऐसे लेखकों और किताबों का नाम लिया गया है जिनका कहीं और उल्लेख नहीं मिलता। इन लेखकों और किताबों के लिए समआनी ने दूर दराज़ के क्षेत्रों की कठिन यात्राएं कीं। उन्होंने विभिन्न नगरों और गांवों में जाकर विभिन्न किताबों की जानकारी प्राप्त की और लेखकों से मुलाकात की और फिर उनके बारे में अपनी किताब में लिखा। समआनी ने अपनी किताब अलअन्साब में जिन किताबों का उल्लेख किया है उनमें क़ुरआन की व्याख्या, कुरआन संबंधी ज्ञान, साहित्य, आध्यात्म, इतिहास, यात्रा वृतांत और काव्य संकलन जैसे विषयों पर लिखी गयी किताबें शामिल हैं। इन में अधिकांश किताबें आज मौजूद नहीं हैं बल्कि बहुत सी किताबों के नाम भी , किताबों में नहीं मिलते। अलअन्साब किताब इतनी महत्वपूर्ण है कि उसे लिखे जाने के बाद बहुत से बुद्धिजीवियों और लेखकों ने उस पर  ध्यान दिया और उसकी व्याख्या की या उस पर व्याख्यान लिखा या फिर उसे संक्षिप्त किया। इन लोगों में इज़्ज़ुद्दीन अबुलहसन अली बिन मुहम्मद बिन असीर जौज़ी हैं जिन्होंने अलअन्साब की संक्षिप्त करके और उसमें कुछ नये अध्याय जोड़ कर अल्लुबाब नाम की नयी किताब लिख दी। जलालुद्दीन अब्दुर्रहमान सेयूती ने भी समआनी के अलअनसाब किताब को संक्षिप्त किया है और फिर याकूत हमवी की  मुअजमुल बुलदान जैसी किताबों  से निकाली गयी कुछ मालूमात के साथ सन 873 हिजरी क़मरी में लुब्बुल लुबाब नाम की नयी किताब लिख दी । क़ाजी कुतुबुद्दीन मुहम्मद बिन खुजैरी उफई ने भी समआनी की किताब अलअन्साब को संक्षिप्त किया है और इब्ने असीर, रशाती जैसे लेखकों के नोट्स भी उसमें बढ़ाए और उसका नाम अलएक्तेसाब रखा।

 

 

समआनी ने अपनी किताब अलअन्साब की भूमिका में इस किताब को लिखने की अपनी शैली के बारे में इस प्रकार लिखा हैः मेरी यह किताब, नगरों , क़बीलों या गांवों के नामों के हिसाब और वर्णमाला के शब्दों के अनुसार लिखी गयी है उसके बाद हर शहर या गांव या क़बीले के नाम के लिए यह कोशिश की है कि उसके प्रसिद्ध लोगों बुद्धिजीवियों की जीवनी के बारे में भी संक्षेप में कुछ जानकारी उपलब्ध करायी जाए। समआनी ने अपनी किताब की भूमिका में लिखा है कि रावियों से सुनी गयी बहुत सी बातों को मैंने संक्षिप्त रूप में लिखा है और उनके हवालों का उल्लेख नहीं किया। शहरों के नाम के वर्णमाला में नाम के दूसरे भाग का भी ख्याल रखा गया है।

 

 

समआनी ने पहली जिल्द  के आरंभ में वंश के ज्ञान के बारे में  पैगम्बरे इस्लाम के कई कथनों का उल्लेख किया है और इसके साथ ही उन्होंने पैगम्बरे इस्लाम के इस कथन का उल्लेख किया है कि अपने वंश का ज्ञान प्राप्त करो और उसके ज़रिए अपनी रिश्तेदारी निभाओ। समआनी ने पैगम्बरे इस्लाम के इस कथन के विभिन्न हवालों और स्रोतों का उल्लेख किया है। समआनी ने अपनी किताब में पैगम्बरे इस्लाम के वंशजों का भी उल्लेख किया है। उसके बाद हाशिल क़बीले का और फिर अरबों का और उसके बाद अरब क़बीलों को पूर्वजों और वंशजों का उल्लेख किया है। समआनी ने अपनी यात्रा में प्राप्त अनुभव व सूचनाओं के अतिरिक्त तारीखे नीशपुर, तारीखे बगदाद, तारीखे बुखारा, और अन्य सैकड़ों किताबों से लाभ उठाया

 

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Jul २८, २०१८ १३:०५ Asia/Kolkata
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