ईरान की भौगोलिक स्थिति ने उसके लिए प्राचीन काल से अब तक भूराजनीति की नज़र से बहुत अहम रोल निभाया है।

ऐतिहासिक सिल्क रोड पूरब-पश्चिम की सभ्यताओं के बीच ईरान से होकर गुज़रता था। विगत में ईरान अपनी स्थिति व क्षेत्रफल की वजह से पूरब-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण के बीच व्यापारिक गतिविधियों के मार्ग में महत्वपूर्ण पड़ाव था। अब नई सिल्क रोड योजना में ईरान उन देशों में होगा जिनका एशियाई और योरोपीय देशों के बीच संबंध व संपर्क के विकास में प्रभावी रोल होगा। ईरान की भौगोलिक स्थिति वस्तुओं के योरोप ट्रान्ज़िट का सबसे छोटा मार्ग मुहैया कराती है। फ़ार्स की खाड़ी से आज़ाद जलमार्ग तक पहुंच, ईरान के लिए एक अन्य बोनस है कि वह मध्य एशिया और कॉकेशिया के ख़ुश्की घिरे देशों की स्वतंत्र जलक्षेत्र तक पहुंच का मार्ग समतल कर इन देशों के लिए दुनिया की अर्थव्यवस्था के अहम भाग से संपर्क का माध्यम बन सके ईरान की भूराजनीति की दृष्टि से अहमियत और दुनिया की भविष्य की अर्थव्यवस्था में उसके रोल, इसी तरह ईरान की आर्थिक क्षमता व स्रोत के बारे में मैकेन्ज़ी संस्था ने एक रिपोर्ट पेश की है। इस संस्था का अपनी रिपोर्ट में ईरान की भविष्य की अर्थव्यवस्था के बारे में कहना हैः "ईरान वर्ष 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद में 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने और 90 लाख नए रोज़गार के अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है।"

ईरान की अर्थव्यवस्था का मुख्य भाग उसके ऊर्जा के स्रोत हैं। ईरान दुनिया में गैस के पुष्ट स्रोतों की नज़र से पहले और तेल के पुष्ट स्रोतों की दृष्टि से चौथे स्थान पर है। ईरान में तेल और गैस के उत्पादन का ख़र्च, बहुत से उत्पादक देशों की तुलना में कम है। इस बात के मद्देनज़र कि ईरान तेल और गैस के कुल योग की दृष्टि से पहला देश है, ईरान में पेट्रोकेमिकल उद्योग में विकास स्वाभाविक सी बात होगी। ईरान में डाइवर्सफ़ाइड फ़ीड्स, स्वतंत्र जलक्षेत्र तक पहुंच और माहिर मानव संसाधन पेट्रोकेमिकल उद्योग के बोनस प्वाइंट हैं। पेट्रोकेमिकल उद्योग को ईरान की अर्थव्यवस्था के मुख्य अंग के रूप में देखा जाता है। ईरान में 50 पेट्रोकेमिकल कॉम्पलेक्स हैं। इनकी सालाना उत्पादन क्षमता 6 करोड़ 20 लाख टन है। यहां देश के निर्यात होने वाले ग़ैर पेट्रोलियम पदार्थों के 40 फ़ीसद भाग का उत्पादन होता है।   

     

कार्यक्रम श्रंख्ला ईरानी बाज़ार में जिन बिन्दुओं पर चर्चा हुयी उनमें ईरान में बिजली उद्योग सहित ऊर्जा के अन्य स्रोतों में पूंजिनिवेश का विषय था। ईरान दुनिया में इन्सटॉल्ड पॉवर कपैसिटी की दृष्टि से दुनिया के बीस देशों में और पश्चिम एशिया में पहले स्थान पर है। तेल उत्पादक कुछ देशों की तुलना में ईरान की अर्थव्यवस्था की विशेषता उसकी विविधता है। ईरान का क्षेत्रफल 16 लाख 48 हज़ार वर्ग किलोमीटर है और उसकी एक तिहाई ज़मीन कृषि योग्य है। ईरान में सामान्य तरीक़े से कृषि योग्य भूमि लगभग 3 करोड़ 80 लाख हेक्टर है लेकिन सिर्फ़ 1 करोड़ 50 लाख हेक्टर पर खेती होती है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अधीन संस्था फ़ाओ के अनुसार, ईरान दुनिया में कृषि के 66 उत्पादों में एक तिहाई उत्पादों में दुनिया में एक से दस स्थान के बीच में है। ईरान फल में विविधता की दृष्टि से भी दुनिया में बहुत अहम है। ईरान फल उत्पाद में विविधता की दृष्टि से दुनिया में तीसरे स्थान पर है। ईरान में 15 तरह के अहम फल उत्पादित होते हैं। ईरान 10 तरह के फल निर्यात करता है और इन फलों के निर्यात में उसका स्थान एक से दस तक है। दुनिया में 25 तरह के अहम फल और मेवों में 15 तरह के फल और मेवे ईरान में उत्पादित होते हैं। ईरान में उत्पादित पिस्ते, खजूर, सेब, ज़ैतून, अंगूर, अनार और चेरी क्वालिटी की नज़र से विश्वस्तरीय होते हैं। आपको यह भी बतातें चलें कि कुछ उत्पादों जिनकी दवाओं में बहुत अहमियत है जैसे जाफ़रान या केसर, ज़ीरा और दारूहल्दी को मुख्य कृषि उत्पाद में शामिल नहीं किया जाता हालांकि ईरान इन उत्पादों के दुनिया में सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है।

आज दुनिया में बहुत सी सेवाएं भी निर्यात होती हैं। आज विज्ञान व प्रौद्योगिकी भी विगत की तुलना में अधिक मूल्यवान व विनिमय योग्य उत्पाद बन चुकी है। ईरान में इंजीनियरिंग की कंपनियां दुनिया के विभिन्न देशों में लगभग 700 परियोजनाओं में शामिल रह चुकी हैं। ईरान की इंजीनियरिंग की कंपनियों ने औद्योगिक, तेल, गैस, पेट्रोकेमिकल, बिजली, सड़क व आवास निर्माण की परियोजनाओं में काम किया है। ईरान के दो पड़ोसी देश तुर्कमनिस्तान और आज़रबाइजान गणराज्य के साथ क्रमशः दो संयुक्त बांध ‘दोस्ती’ और ‘ख़ुदा आफ़्रीन’ के बांध का निर्माण ईरानी इंजीनियरों ने किया है।

 

खनिज स्रोतों की दृष्टि से ईरान दुनिया के मुख्य दस देशों में से एक और पश्चिम एशिया का पहला देश है। ईरान दुनिया के कुल खनिज स्रोतों के 7 फ़ीसद भाग का स्वामी है। मूल्यवान खनिज स्रोतों के स्वामी होने के नाते उद्योग की ज़रूरत के मूल पदार्थ की आपूर्ति की दृष्टि से दुनिया के सबसे समृद्ध क्षेत्रों में है। ईरान में 70 प्रकार के खनिज पदार्थों की अब तक 6000 खदानों का पता लग चुका है। कुछ पर्यवेक्षक खदान की दृष्टि से ईरान को दुनिया में खदानों का स्वर्ग मानते हैं। दुनिया में बारह अहम खानें जैसे तांबे की सरचश्मे किरमान खान, कच्चे लोहे की चादर मलू खान, तांबे की सोन्गून वर्ज़क़ान खान, पत्थर के कोयले की पाब्दाना खान, सोने की ज़रशूरान खान और फ़ीरोज़े की निशापूर खान ईरान में है। ईरान में अब तक 3 करोड़ टन तांबे के भंडार का पता लग चुका है। दुनिया में जस्ते के भंडार का 8 फ़ीसद और सीसे के भंडार का 3 फ़ीसद ईरान में पाया जाता है। ईरान दुनिया में सजावट में इस्तेमाल होने वाले पत्थर के उत्पादक देशों में चौथे स्थान पर है। ईरान का युरेनियम, पत्थर के कोयले और कच्चे लोहे के भंडार की नज़र से दुनिया में बहुत अहम स्थान है। अध्ययन के अनुसार, ईरान लोहे, जस्ते, सीसे, तांबे, सोने और संगेमरमर की बेल्ट पर स्थित है और अगले लगभग 100 साल तक ईरान में खानों से खनिज पदार्थ निकाले जा सकते हैं।

ईरान की अर्थव्यवस्था की एक विशेषता नालेज बेस्ड कंपनियों का वजूद है। ईरान शिक्षित व दक्ष मानव संसाधनों का स्वामी है और दुनिया में उच्च स्तरीय शिक्षा में उसकी भागीदारी का स्तर बहुत ऊपर है। ईरान में प्रोफ़ेशनल शिक्षा में सबसे ज़्यादा संख्या इंजीनियरों की है। ईरान में कुल प्रोफ़ेश्नल शिक्षित मानव संसाधन का एक तिहाई भाग इंजीनियरों से विशेष है। ईरान हर साल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में स्नातक छात्रों की संख्या की दृष्टि से दुनिया के 5 देशों में है। ईरान में एरोस्पेस, सूचना व संपर्क, इलेक्ट्रॉनिक, चिकित्सा, तेल, गैस, ऊर्जा, स्टेम सेल, प्रकाशन और पैकिंग के क्षेत्र में नालेज बेस्ड कंपनियां सक्रिय हैं और इन कंपनियों के बहुत से आविष्कार व सुझाव पंजीकृत हुए हैं और कुछ कंपनियां अपने उत्पाद देश के भीतर और बाहर के बाज़ार में भेज रही हैं।            

ईरान में नैनो टेक्नॉलोजी पर आधारित 300 नालेज बेस्ड वस्तुओं का उत्पादन होता है जो दुनिया के 17 देशों को निर्यात होती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष के आंकड़े के अनुसार, वर्ष 2017 में ईरान का दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 18वां स्थान था। इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के अनुसार, ईरान में 2017 में क्रय शक्ति के मानकों के आधार पर सकल घरेलू उत्पाद 1630 अरब डॉलर का है। 2017 में दुनिया के 193 देशों में ईरान सकल घरेलू उत्पाद की मात्रा की दृष्टि से 18वें स्थान पर था। इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में वर्ष 2018 में यह मात्रा 94 अरब डॉलर की वृद्धि के साथ 1724 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। यह विकास आर्थिक पाबंदियों के बावजूद हासिल हुआ है। यह पाबंदियां ईरान में इस्लामी क्रान्ति की सफलता के बाद अमरीका और उसके घटकों की ओर से ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ लगायी गयी हैं।

 

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Jul ३१, २०१८ १२:१८ Asia/Kolkata
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