अबू मूसा एक बड़ा ही सुंदर द्वीप है और अगर आप यहां के रहने वालों से इस द्वीप की जनसंख्या के बारे में पूछेंगे तो वे कहेंगे आठ करोड़!!

आपको आश्चर्य होगा लेकिन उनका मतलब यह है कि अबू मूसा न केवल ईरान का अटूट अंग है बल्कि फ़ार्स की खाड़ी में इस्लामी गणतंत्र ईरान की फ़्रंट लाइन भी है।

अबू मूसा या बूमूसो, फ़ार्स की खाड़ी के दक्षिण में ईरान के द्वीपों में से एक है और यह हुरमुज़गान प्रांत का भाग है। इसका क्षेत्रफल लगभग 12 वर्ग किलो मीटर है। इस द्वीप और तुम्बे कूचिक व तुम्बे बुज़ुर्ग नामक द्वीपों के बीच पानी की गहराई काफ़ी है इस लिए इनके बीच तेल टैंकर चलते हैं। ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और मानचित्रों में इसका नाम बूमऊ, गप सब्ज़ो, बूम सूज़ या बूमसू मिलता है। बूम का अर्थ होता है स्थान और ऊ का मतलब है पानी अर्थात पानी का स्थान और गप सब्ज़ो का मतलब है भरा स्थान। अबू मूसा इस द्वीप का नया नाम है जिसे लगभग सौ साल पहले यहां के रहने वाले अबू मूसा नामक व्यक्ति ने बूमसू की जगह प्रचलित किया।

 

अबू मूसा का नाम मानचित्रों और विभिन्न देशों के इतिहास व भुगोल की नई व पुरानी किताबों में देखा जा सकता है लेकिन अंग्रेज़ों ने फ़ार्स की खाड़ी में अपना प्रभाव जमाने के बाद इस द्वीप से ईरान का नाम मिटाने के लिए इस द्वीप के लिए एक जाली नाम का प्रयोग शुरू कर दिया। अबू मूसा हुर्मुज़ स्ट्रेट से एक सौ साठ किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। अबू मूसा शहर इस द्वीप के केंद्र में स्थित है जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 46 मीटर है। वर्ष 2016 की मतगणना के अनुसार इस द्वीप की जनसंख्या 4200 है। अबू मूसा के लोग मूलतः ईरानी और आरियाई वंश के हैं। इनके बीच कुछ अरब भाषी परिवार भी मौजूद हैं।

अबू मूसा द्वीप का मौसम आर्द्र और गर्म रहता है और यहां खेती के लिए उचित ज़मीन और पानी नहीं है लेकिन फिर भी यहां थोड़ी बहुत खेती होती है। यहां के अधिकतर लोगों का पेशा मछली का शिकार है। इस द्वीप में हरियाली बहुत कम है लेकिन सूखे क्षेत्रों में उगने वाले कुछ प्रकार के पौधे यहां भी देखे जा सकते हैं जो स्थानीय पशुओं को चराने के काम में आते हैं। जिस साल इस क्षेत्र में अधिक बारिश होती है उस साल यहां अधिक पौधे उगते हैं और पूरे द्वीप में हरियाली दिखने लगती है।

अबू मूसा द्वीप के आस-पास के पानी में बेहतरीन प्रकार के मोती पाए जाते हैं। पिछली शताब्दी के आरंभिक दशकों में इस द्वीप के तटों पर मोती निकालने की लगभग पचास नौकाएं काम करती थीं। अबू मूसा के तट का पानी अत्यंत साफ़ और पारदर्शी है और यहां जल पशुओं की विविधता भी काफ़ी अधिक है जैसे हरा समुद्री कछुआ, सर्पमछली, शार्क और विभिन्न प्रकार की रंग बिरंगी मछलियां बड़ी संख्या में पाई जाती हैं। अबू मूसा के तट पर फ़ार्स की खाड़ी के पानी की पारदर्शिता इतनी है कि एक्वेरियम वाली मछलियां और मूंगे भी तट और जेटी पर से स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। इस द्वीप में छोटी पहाड़ियां और रेत के टीले भी हैं जबकि हलवा नाम का एक पर्वत भी बड़ा सुंदर दिखाई देता है।

अबू मूसा द्वीप ईरान में प्रति व्यक्ति की दृष्टि से कुछ मामलों में पहले स्थान पर है जैसे जनसंख्या के मद्दे नज़र औद्योगिक दृष्टि से, अस्पताल और हर पचास व्यक्ति के लिए अस्पताल में एक बेड की दृष्टि से, विशेषज्ञ चिकित्सकों की दृष्टि से, यहां रहने वाले और पलायन करके आने वालों की साक्षरता की दृष्टि से और शहर में हरियाली की दृष्टि से।

 

अबू मूसा द्वीप भौगोलिक दृष्टि से फ़ार्स की खाड़ी के सबसे अहम व रणनैतिक क्षेत्रों में से एक है और हुर्मुज़ स्ट्रेट में ईरान की प्रतिरक्षा फ़्रंट लाइन में शामिल है। इसी तरह यह द्वीप ईरान का कच्चा तेल निर्यात करने के अहम केंद्रों में से एक है जहां तेल संबंधी गतिविधियां ध्यान योग्य हैं। अबू मूसा और तुम्बे कूचिक व तुम्बे बुज़ुर्ग द्वीपों की बड़ी अहमियत है और दक्षिणी फ़ार्स की खाड़ी के ध्यान योग्य भाग पर ईरान का स्वामित्व, हुर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण को सुनिश्चित बनाता है।

 

हख़ामनिशियों के काल में अबू मूसा समेत फ़ार्स की खाड़ी के द्वीप पार्स प्रांत का भाग थे। अश्कानी शासन काल में विशेषकर दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मेहरदाद प्रथम के काल में पार्स सागर के द्वीप और बंदरगाहें इस शासन के अधीन थीं। सासानी शासनकाल में फ़ार्स की खाड़ी के द्वीप व बंदरगाहें ईरान की भौगोलिक सीमाओं में शामिल थीं। तीसरी शताब्दी हिजरी क़मरी के मध्य में याक़ूब लैस सफ़्फ़ारी ने सीस्तान में पहली स्वाधीन ईरानी सरकार की स्थापना की। उसकी मौत के बाद उसका भाई अम्र लैस, बग़दाद के शासक की ओर से फ़ार्स, बूशहर और फ़ार्स की खाड़ी के द्वीपों, बंदरगाहों और उत्तरी व दक्षिणी तटों का शासक नियुक्त किया गया। आले बूये शासन में फ़ार्स की खाड़ी के सभी तट, बंदरगाहें और द्वीप इसी शासन के अधीन थे और वर्ष 873 हिजरी शमसी तक ये क्षेत्र फ़ार्स या पार्स प्रांत का भाग समझे जाते थे। शाह अब्बास सफ़वी के काल में पुर्तगालियों ने अबू मूसा द्वीप पर क़ब्ज़ा कर लिया लेकिन लम्बे संघर्ष के बाद ईरानियों ने इस द्वीप को आज़ाद करा लिया।

19वीं शताब्दी के अंतिम बरसों में समुद्री लुटेरों को खदेड़ने, दासों की बिक्री को रोकने और भारत की सुरक्षा के बहाने ब्रिटेन की नौसेना और राजनितिज्ञों के फ़ार्स की खाड़ी में आने के बाद ब्रिटिश नौसेना ने अबू मूसा द्वीप में फ़ार्स सरकार के सैनिकों की कार्यवाहियों को रोक दिया। उन दिनों ब्रिटेन ने जितने भी नक़शे बनाए थे उनमें ईरान से संबंधित सभी सीमाओं को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया था लेकिन कुछ समय बाद शारजा के शासक ने अंग्रेज़ सरकार के समन्वय से अबू मूसा द्वीप के स्वामित्व का दावा किया और कुछ जेटियां और छोटे-मोटे बंदरगाही अनुष्ठान बना कर इस द्वीप की लाल मिट्टी को अपने यहां स्थानांतरित करना शुरू किया और यहां लाइट हाउस बनाया और बिजली पैदा करने का काम आरंभ किया।

 

वर्ष 1971 में शीत ऋतु आरंभ होते ही अबू मूसा द्वीप ईरानी नौसेना के नियंत्रण में आ गया और उसके बाद ईरान की सरकार और शारजा के शासक के बीच एक समझौता हुआ। ईरान और ब्रिटेन के बीच होने वाली सहमति के बाद और इस क्षेत्र से ब्रिटिश सेना के निकलने तथा संयुक्त अरब इमारात देश के गठन से पहले तुम्बे बुज़ुर्ग व तुम्बे कूचिक के साथ ही अबू मूसा द्वीप अंततः ईरान को लौटा दिया गया। यह काम ईरान की ओर से निरंतर सत्तर बरसों तक अबू मूसा पर ब्रिटेन के क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ विभिन्न संगठन में की जाने वाली शिकायत के बाद हुआ।

 

इस द्वीप में आने वाले सभी ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव के बावजूद अहम बिंदु यह है कि तुम्बे बुज़ुर्ग व तुम्बे कूचिक और अबू मूसा द्वीप का स्वामित्व ईरान के ही हाथ में रहा है अलबत्ता कभी कभी अमरीका व ब्रिटेन के उकसावे पर संयुक्त अरब इमारात की सरकार की ओर से निराधार दावे भी किए जाते रहे हैं। ये दावे इस द्वीप पर क़ाजारी शासनकाल में अंग्रेज़ों के 68 साल तक क़ब्ज़े के आधार पर किए जाते हैं लेकिन 1971 में हुए समझौते के अनुसार इस द्वीप का स्वामित्व ईरान को लौटाया जा चुका है और अब इस संबंध में किसी भी प्रकार के संदेह और वार्ता की गुंजाइश नहीं रही है। (HN)

 

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Aug ११, २०१८ १२:४९ Asia/Kolkata
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