वर्तमान समय में ईरान की अर्थव्यवस्था बहुत ही संवेदनशील स्थिति से गुज़र रही है।

एक हिसाब से यह कठिन परीक्षा की घड़ी में है लेकिन विशेष बात यह है कि ईरान के पास ऐसी संभावनाएं और योग्यताए हैं जिनके आधार पर वह इस कठिन परीक्षा में सफल सिद्ध होगा।  वर्तमान समय में ईरान, कृषि के क्षेत्र में अपनी आंतरिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही वह निर्यात के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा कर सकता है।  ईरान के भीतर उसकी अपनी आवश्यकता के 95 प्रतिशत खाद्धय पदार्थों का उत्पादन इस अर्थ में है कि वह इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो चुका है।  यही विषय, प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण उद्देश्य को पूरा करता है।  वर्तमान समय में ईरान के खाद्धय पदार्थों से संबन्धित उद्योग ने विदेशी मंडियों के लिए रास्ता प्रशस्त कर लिया है।

ईरान की जेनेटिक संस्था के प्रमुख "महमूद तवल्लाई" कहते हैं कि देश में खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य से कृषि एवं खाद्य पदार्थों के उत्पादन की क्षमता बहुत है।  वे कहते हैं कि खाद्य सुरक्षा की तकनीक को उन्नत करते हुए इसकी गुणवत्ता को अधिक बढ़ाया जाए।  उन्होंने राष्ट्रीय जैव प्रोद्योगिकी सम्मेलन में इस बात पर बल दिया था कि बड़ी खुशी की बात है कि ईरान वैज्ञानिक दृष्टि से उस स्थान पर पहुंच चुका हैं जहां से वह आधुनिक तकनीक का सुदपयोग करते हुए सुरक्षित उत्पादों की पैदावार बढ़ा सकता है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि ईरान के भीतर खाद्य पदार्थों, औषधि निर्माण, कृषि उत्पाद और अन्य प्रकार के उद्योगों के लिए उचित क्षमताएं पाई जाती हैं।  महमूद तवल्लाई के अनुसार इसी उद्देश्य से आवश्यक आधारभूत ढांचे का निर्माण करके हम इस अवसर से लाभ उठा सकते हैं।

ईरान के पास योग्यताओं के साथ ही प्रकृति की ओर से दिये गए जेनेटिक रिज़र्व या अनुवांशिक भण्डार बहुत बड़ी मात्रा में हैं।  इस हिसाब से वह इन चीज़ों से लाभ उठाते हुए बायोटेकनालोजी के क्षेत्र में विकास कर सकता है।  इन सभी बातों के बावजूद इस वास्तविकता को स्वीकार किया जाना चाहिए कि वैश्विक मंडियों में अपनी उपस्थिति के लिए न्यू मार्केटिंग की शैली का प्रयोग बहुत ही ज़रूरी है।  आज के इस प्रतिस्पर्धी युग में इसके बिना विश्व स्तर पर व्यापार में सफलता संभव नहीं है।  1990 में पेश किये जाने वाले माइकल पोर्टर के कम्पटेटिव एडवांटेज दृष्टिकोण के अनुसार व्यापार के क्षेत्र में किसी देश की विशेषता को इससे पहचाना जाता है कि वहां पर कम्पटेटिव एडवांटेज का दमन किया जाता है या फिर उसे परवान चढ़ाया जा रहा है।

वर्तमान समय में खाद्य उद्योग को पूरे विश्व में विशेष स्थान प्राप्त है।  इस उद्योग में कड़ी प्रतिस्पर्धा चलती है।  ईरान की भौगोलिक स्थिति, यहां की जलवायु और पर्यावरण के दृष्टिगत यहां पर खाद्य उद्योग से संबन्धित मूल पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।  इस प्रकार उपलब्ध संभावनाओं और वस्तुओं का प्रयोग करके निर्यात के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया जा सकता है।  इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है कि किसी एक उत्पाद के लिए वैश्विक मांग में वृद्धि, दूसरे किसी देश की ओर से उसके निर्यात का कारण नहीं बनती।  इस प्रकार इस क्षेत्र में विकास के लिए कृषि तथा खाद्य उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों के सरकारी समर्थन की आवश्यकता है।  वर्तमान समय में यूरोपीय देशों में कृषि उत्पाद और खाद्य पदार्थ उद्योग का पूरी शक्ति के साथ समर्थन किया जाता है।  यह शक्तिशाली समर्थन उनके महत्व के कारण है।

यूरोपीय संघ की ओर से कृषि क्षेत्र के समर्थन के इतिहास की समीक्षा, पिछले छह दशकों से कृषि के महत्व को बताती है।  "कैप योजना" को लागू करने के लिए यूरोपीय देशों ने पिछले साठ वर्षों में दो महत्वपूर्ण लक्ष्यों का से पीछा किया है खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और किसानों का कल्याण।  यूरोपीय संघ ने अपने सदस्य देशों की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति और यूरोप के प्राकृतिक स्रोतों से लाभ उठाने के लिए कृषि क्षेत्र के विभिन्न प्रकार के समर्थन को अपनी कार्यसूचि में बहुत पहले से शामिल कर रखा है।

इस समय यूरोपीय संघ के पास 11 मिलयन से अधिक खेती के फार्म हैं।  यूरोप की जनसंख्या में लगभग 22 मिलियन लोग परोक्ष या अपरोक्ष रूप से कृषि से जुड़े हुआ है।  जबकि खाद्य क्षेत्रों में 18 मिलयन लोग जुड़े हुए हैं।  इस प्रकार से यूरोपीय संघ अपनी और बाहर की दुनिया की खाद्य पदार्थों की आवश्यकता को पूरा कर रहा है।  संसार में बढ़ती जनसंख्या और सीमित संसाधनों के दृष्टिगत खाद्य पदार्थों के उत्पादन के लिए यूरोपीय संघ ने एक स्पष्ट योजना तैयार की है।  इस काम को वह पिछले कई वर्षों से कैप योजना के अन्तर्गत कर रहा है।  दूसरे शब्दों में यह किसानों को दी जाने वाली सबसिडी है जिसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाना है।

यूरोपीय संघ के अधिकारी, खाद्य पदार्थों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने एवं किसानों के भीतर अधिक से अधिक फसल पैदा करने की भावना जागृत कराने के उद्देश्य से किसानों के उत्पादों के मूल्यों में अधिक से अधिक वृद्धि करते रहे हैं।  यह विषय किसानों की ओर से आलोचनाओं का कारण बना है।  यूरोपीय संघ ने सन 1970 में खेतों के आधुनिकीकरण और किसानों को अधिक से अधिक जागरूक बनाने के लिए कृषि के क्षेत्र में कुछ आधुनिक परिवर्तन किये।  इसी नीति के परिप्रेक्ष्य में यूरोपीय संघ ने 1980 के दशक में किसानों को सीधे तरीक़े से सबसिडी देने का काम शुरू किया।  पिछले कुछ वर्षों के दौरान खाद्य पदार्थों तथा कृषि से संबन्धित यूरोपीय संघ की समर्थन नीति की कई बार समीक्षा की गई जिनमें से 3 अवसर उल्लेखनीय है।  यूरोपीय संघ ने सन 1962 में कैप नीति आरंभ की थी।  बाद में सन 1992, 2013 में इस नीति की पुनर्समीक्षा की गई।  इसके अन्तर्गत दुग्ध उत्पादों और गाय तथा बछड़े के गोश्त के लिए घरेलू व्यापार की गहन समीक्षा हुई।

निःस्नदेह, ईरान की अर्थव्यवस्था में विविधता के साथ ही उसका मूलभूत ढांचा बहुत ही विस्तृत है जिसे वैश्विक मंडियों के समर्थन की आवश्यकता है।  इसमें हलाल फूड के उत्पादों के व्यापार का नाम लिया जा सकता है।  यह व्यापार इतना विसतृत है कि तले उद्योग से प्राप्त आय का स्थान ले सकता है।  संयुक्त राष्ट्रसंघ की एक रिपोर्ट के अनुसार हलाल फूड उत्पादों के व्यापार में धन का सर्क्यूलेशन अरबों डालर का है।  एक अनुमान के अनुसार इसकी भागीदारी लगभग 2500 अरब डालर प्रतिवर्ष है।  इसमें से लगभग 700 अरब डालर, ब्रैंडेड हलाल मार्क से संबन्धित हैं।

हलाल फूड उत्पाद की एक विशेषता यह है कि ख़रीदार इस ओर से निश्चिंत रहता है कि वह जो ख़रीद रहा है वह हलाल है।  इसमें कोई हराम चीज़ मिली नहीं है।  हलाल फूड के ख़रीदार को यह विश्वास रहता है कि जो वस्तु उसने ख़रीदी है उसमें किसी भी हराम जानवर का गोश्त नहीं है इसी प्रकार उसे वह गोश्त भी नहीं दिया जाएगा जिसे हराम तरीक़ से ज़िब्ह किया गया होगा।  हलाल फूड की मांग यूरोप और अमरीका में बहुत तेज़ी से बढ़ रही है।

हलाल फूड संगठन के महासचिव "अब्दुल हुसैन फ़ख़ारी" कहते हैं कि हलाल फूड की मांग इतनी अधिक बढ़ती जा रही है कि इसके लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर नए खिलाड़ियों की आवश्यकता है।  वे कहते हैं कि इस्लामी देशों में हलाल फूड के उत्पादन की अधिक संभावनाएं और क्षमताएं पाई जाती हैं।  उनका कहना है कि अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार को इस्लामी संस्कृति से अवगत करवाने के साथ ही हम इस्लामी देशों के लिए रोज़गार के उल्लेखनीय अवसर भी उपलब्ध करवा सकते हैं।

ईरान के राष्ट्रीय मानक संगठन के उप प्रमुख वहीद मरंदी कहते हैं कि ईरान, हलाल फूड के अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार के दस प्रतिशत भाग तक पहुंच बनाकर इस उद्योग से देश के तेल निर्यात के स्थान पर रख सकते हैं।  जानकारों का कहना है कि हलाल फूड के अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार के दस प्रतिशत भाग पर अधिकार से 50 से 70 अरब डालर, देश में विदेशी मुद्रा के रूप में आएगा।

ईरान के खाद्य विज्ञान और प्रोद्योगिकी संघ के प्रमुख प्रोफेसर "मुहम्मद हुसैन अज़ीज़ी" का कहना है कि हलाल फूड की अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच में कुछ बाधाएं भी पाई जाती हैं।  उनमें से एक यह है कि वह हलाल फूड जो ईरान में तैयार होता है उसपर लागत बहुत अधिक आती है।  यह लागत क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में बनने वाले हलाल फूड के हिसाब से ईरान में बने उत्पाद पर बहुत अधिक होती है।  यही कारण है कि ईरान, हलाल फूड के अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहा है।  ईरान में जो हलाल फूड बनाया जाता है वह सामान्यतः इराक़, आर्मिनिया और तुर्कमनिस्तान जैसे पड़ोसी देशों को निर्यात किया जाता है।

निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि निर्यात के उद्देश्य से हलाल फूड का उत्पादन वास्तव में एक महत्वपूर्ण क़दम है जो ईरानी उत्पादों के समर्थन के अन्तर्गत, ईरान की अर्थव्यवस्था को उसके मुख्य लक्ष्य के निकट ले जा सकता है।  इससे जहां एक ओर अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी वहीं देश के भीतर रोज़गार सृजन में भी यह बहुत ही सहायक सिद्ध होगा।

      

 

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Aug १५, २०१८ १२:५१ Asia/Kolkata
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