फ़ार्स की खाड़ी में तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग नामक दो द्वीप हैं।

इन द्वीपों की सैन्य प्रवृत्ति के कारण इन द्वीपों में न तो पर्यटक जा सकते हैं और न ही यहां फ़ोटो ली जा सकती है किन्तु तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग दोनों ही द्वीप बहुत सुन्दर हैं जिसके केन्द्र को सूर्यास्त और सूर्योदय के समय देखा जा सकता है।

तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग द्वीप अतीत में तुंब द्वीप, नबीयो तुंब के नाम से प्रसिद्ध है किन्तु चौदहवीं शताब्दी के दूसरे अर्ध से तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग नाम से पुकारा जाने लगा।  समस्त बदलाव के बावजूद बहुत ही साधारण ढंग से अरबी भाषा के शब्दाकोष देखने से पता चलता है कि तुंब शब्द का अस्तित्व अरब शब्दकोष में नहीं है और यह शब्द सौ प्रतिशत फ़ारसी और ईरानी है। हख़ामनेशी काल में भी इस क्षेत्र में प्रचलित रहा है, तुंब शब्द का अर्थ होता है टीला।

ईरानी मानचित्र के आधार पर तुंब द्वीप, हुर्मुज़गान प्रांत में अबू मूसा शहर के उत्तरी भाग में स्थित है। तुंबे बुज़ुर्ग, क़िश्म द्वीप के दक्षिण में 31 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है और लंगे बंदरगाह से पचास और अबू मूसा से लगभग 53 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

यह द्वीप लंबाई और चौड़ाई के हिसाब से लगभग 4 किलोमीटर है। द्वीप की मिट्टी रेतीली और सूखी है और इस द्वीप में दिखने वाले टीलों और चट्टानों की ऊंचाई 53 मीटर है। तुंबे बुज़ुर्ग द्वीप का दक्षिणी भाग हमेशा नौकाओं के लंगर डालने का उचित स्थान रहा है।  इस भाग में मरुस्थलीय वनस्पतियां उगाई जाती हैं जो स्थानीय जानवरों के चारों के लिए प्रयोग होती है।

 

अतीत में तुंबे बुज़ुर्ग के पीने का पानी, दो कुओं से पूरा होता था जो अधनमकीन होता था। यह कुएं द्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित थे जबकि आज यह कुएं सूख चुके हैं और तुंबे बुज़ुर्ग के रहने वालों के लिए पेयजल क़िश्म द्वीप से पूरा होता है। तुंबे बुज़ुर्ग द्वीप के स्थानीय लोग मछली का शिकार न मोतियां एकत्रित करके अपनी जीवन बिताते हैं। इस द्वीप में Red soil mine  रेड सोइल माइन पाया जाता है।

 

तुंबे बुज़ुर्ग द्वीप, नामक का स्रोत है अर्थात नमकीन चट्टानों व टीलों के उभरने से अस्तित्व में आया है। समुद्र का पानी रासायनिक और तकनीकी गतिविधियों द्वारा तथा तलछट से बचने वाली चीज़ों से बहुत ही सुन्दर और अद्भुत दृश्य पेश करते हैं जो द्वीप के नमकीन होने तथा उसके घुलने की विशेषता के कारण अस्तिव में आते हैं और बहुत सुन्दर दृश्य पेश करते हैं। वनस्पतियों की दृश्टि से यह द्वीप बहुत ही वंचित है। तुंबे बुज़ुर्ग द्वीप में मौजूद वनस्पतियां, नमक से फलने और बढ़ने वाली है जैसे गूलर, खजूर, बबूल और झाऊ इत्यादि के वृक्ष बहुत अधिक पाए जाते हैं।

द्वीप के आसपास के पानियों में खाने की विभिन्न प्रकार की मछलिया पायी जाती हैं जिनमें संगसर, शीर, हलवा, क़ुबाद, ख़ावर, नई, सूर्खू और शूरीदे की ओर संकेत किया जा सकता है। इसी प्रकार इन मछलियों में न खाई जाने वाली मछलियां भी शामिल हैं जैसे अर्रे माही, लुक़मए माही, असबे माही, मारे माही और दूसरी प्रकार की मछलियां शामिल हैं। इसी प्रकार शार्क, डोल्फ़िन, स्क्यूड, समुद्री कछुआ, विभिन्न प्रकार के केकड़ों और नर्म शरीर वाले जीव जन्तुओं की ओर संकेत किया जा सकता है। इस द्वीप के उत्तर में वर्ष 1953 में बनने वाला समुद्री वॉच टॉवर देखा जा सकता है।

 

इस द्वीप में विभिन्न प्रकार के लारूस, सीगन, बुलबुल, गौरिया, कबूतर, हंस और बग़ुलों जैसे पक्षियों का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार घरेलू चहे, काले चूहे, जंगली चूहे और जंगली ख़रगोश जैसे स्तनधारियों की ओर संकेत किया जा सकता है। इसी प्रकार इस द्वीप में रहने वाले रेंगने वाले जीव जन्तुओं की ओर संकेत किया जा सकता है, इनमें कोबरा और नागिन की ओर संकेत किया जा सकता है। इसी प्रकार गिरगिट, छिपकली, गोह और रंगीन गिरगिट की ओर संकेत किया जा सकता है। इस द्वीप में बिच्छु बहुत ज़्यादा हैं विशेषकर दो प्रकार के बिच्छुओं की ओर संकेत किया जा सकता है।

तुंबे बुज़ुर्ग दीप में एक हवाई पट्टी है और एक छोटी नौकाओं और कश्तियों के रुकने के लिए जेटी हैं। इस द्वीप में एक कोल्ड स्टोर भी है। इस द्वीप की आबादी कम है जिसके अधिकतर निवासी दुबई के बनी यास क़बीले के अरब और बंदरलंगे के रहने वाले हैं। द्वीप में रहने वाले मछली का शिकार, सीप का शिकार और मोती तलाश करके तथा खेती और पशुपालन से अपनी आजीविका चलाते हैं। द्वीप के पश्चिम में खजूर के पेड़े और फलों के बाग़ की ओर संकेत किया जा सकता है।

क़िश्म द्वीप उत्तर से बंदर अब्बास शहर से, पूर्वोत्तर से हुर्मुज़ द्वीप से, पूरब से लार्क द्वीप से दक्षिणी से हंगाम और दक्षिण पश्चिम से तुंबे कूचिक, बुज़ुर्ग और अबू मूसा से मिलता है। क़िश्म द्वीप से बंदर अब्बास तक की 20 किलोमीटर है। रणनैतिक दृष्टि के अलावा व्यापारिक दृष्टि से भी इस द्वीप का बहुत महत्व रहा है। बताया जाता है कि दियालमा और आले बूए शासन काल में इस द्वीप से चीन, भारत और अफ़्रीक़ा के तटों पर व्यापारिक नौकाएं आती जाती रही हैं।

 

तुंबे कूचिक, तुंबे बुज़ुर्ग के पश्चिम में लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और बंदर लंगे के 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तुंबे कूचिक लगभग त्रिकोणीय रूप में है। उसका सबसे विस्तृत दक्षिणी क्षेत्र में एक किलोमीटर है। द्वीप के पश्चिमोत्तरी भाग में सबसे ऊंचा टीला 32 मीटर है। इस द्वीप में लोग जीवन व्यतीत नहीं करते और इसका पानी पीने योग्य नहीं है। सूखेपन और नमकीन पन से बचने के लिए वहां पर कुछ वनस्पतियां उगाई गयी हैं। तुंबे कूचिक द्वीप का क्षेत्रफल लगभग दो से ढाई वर्ग किलोमीटर है और इस द्वीप का सबसे निकटवर्ती ईरानी बंदरगाह, ख़मीर बंदरगाह और लंगे बंदरगाह है जो 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस द्वीप की मिट्टी रेतीली और कुछ स्थान पर पथरीली ज़मीन है। इस द्वीप में ईरान के सैन्य उपकरण तैनात हैं और इसमें छोटी जेटी व सैन्य उपयोग के लिए छोटा हवाई अड्डा भी बनाया गया है।

 

तुंबे कूचिक द्वीप, तुंबे बुज़ुर्ग और अबू मूसा द्वीप, फ़ार्स खाड़ी के सबसे गहरे भाग में तथा अंतर्राष्ट्रीय नौकाओं की आवाजाही वाले दो कैरीडोर में स्थित है। इस विषय के कारण यह द्वीप जियोपोलीटिकल और स्ट्राटैजिक द्ष्टि से महत्वपूर्ण है। दुनिया के लिए आवश्यकता के कच्चे तेल का महत्वपूर्ण भाग यहां से गुज़रता है और कुछ मिनट पर एक तेल वाहक नौका, इस द्वीप के किनारे से गुज़रती है।

तुंबे बुज़ुर्ग द्वीप रणनैतिक दृष्टि से ईरान की महत्वपूर्ण छावनी है। तुंबे बुज़ुर्ग, हुर्मुज़ जलडमरू मध्य में ईरान के दक्षिण में रक्षा चेन के कारण बहुत महत्वपूर्ण है। यह चेन, हल्की सी मुड़ी लाइन है जिसमें हुर्मुज़, लार्क, क़िश्म, हंगाम, तुंबे बुज़ुर्ग और अबू मूसा जैसे छह द्वीपों को आपस में जोड़ती है और हुर्मुज़ जलडमरू मध्य में ईरान की मज़बूत रक्षा लाइन और फ़ार्स की खाड़ी में प्रविष्ट मुहाना पैदा करता है।

मसऊदी, तबरी, इब्ने हौक़ल, याक़ूबी और मुक़द्दसी जैसे बहुत से मुस्लिम भूगोलवेत्ताओं और इतिहासकारों ने इन समस्त द्वीपों को ईरान का बताया है। नुज़हतुल क़ूलूब नामक पुस्तक में हमदल्लाह मुस्तौफ़ी ने लिखा है कि तुंबे बुज़ुर्ग और तुंबे कूचिक सहित पार्स सागर और ओमान सागर में स्थित द्वीप ईरान के हैं। ब्रिटिश कूटनयिक और अपनी यात्रा लिखने के शौक़ीन जेम्स जस्टिनन मोरियर जब बीस फ़रवरी वर्ष 1811 में तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग के निकट से गुज़रे तो उन्होंने ब्योरा दिया कि इनके नाम ईरानी हैं और फ़ार्स की खाड़ी में ईरानी भाग में स्थित हैं।

 

समस्त ऐतिहासिक दस्तावेज़ों के बावजूद यह द्वीप वर्ष 1282 से 1350 हिजरी शम्सी तक ब्रिटेन के अतिग्रहण में रहा और शारजहां व रासुलख़ैमा के नियंत्रण में था जो आधिकारिक रूप से ब्रिटेन के उपनिवेश थे। यह ऐसी स्थिति में है कि यह द्वीप हमेशा से ईरान के नियंत्रण में रहा है और कभी भी बिना मालिक के नहीं रहा है। इन द्वीपों पर ईरान के अधिकार का इतिहास,  वर्ष 1971 में होने वाले समझौते और ब्रिटेन के साथ ईरान की तीन वर्षीय वार्ताओं की ओर पलटता है और ईरानी सैनिक शारजहां के गवर्नर के कहने पर इस द्वीप में प्रविष्ट हुए और पहले से निर्धारित क्षेत्रों में तैनात हुए।

इस प्रकार से यह बिन्दु बढ़ाया जा सकता है कि ऐतिहासिक पुष्ट प्रमाण के आधार पर अबू मूसा, तुंबे कूचिक और तुंबे बुज़ुर्ग ईरान का अटूट भाग हैं और इसमें कोई संदेह पैदा ही नहीं किया जा सकता। संयुक्त अरब इमारात के निरंतर दावों और क्षेत्रीय व क्षेत्र की बाहर की शक्ति द्वारा उसके इस दावे में भरपूर समर्थन, ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप हे और यह विषय ईरान की विदेश नीति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण समझा जाता है। (AK)

 

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Aug १८, २०१८ १४:३७ Asia/Kolkata
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