मनुष्य के मुंह में पाई जाने वाली ज़बान, देखने में तो मांस का एक टुकड़ा है किंतु यह उसके लिए बहुत उपयोगी है।

स्वाद का अनुभव भी ज़बान से होता है।  मानव सभ्यता के  विकास में इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।  खाने को निगलने  तथा मनुष्य द्वारा अन्य लोगों से संपर्क स्थापित करने और जानकारियों को एक-दूसरे तक पहुंचाने में ज़बान का बहुत बड़ा हाथ है।  खाने को निगलने और उसे चबाने में ज़बान सहायता करती है।

बहुत से डाक्टरों का कहना है कि ज़बान की स्थिति को देखकर शरीर की बहुत सी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।  ज़बान के रंग के आधार पर यह जाना जा सकता है कि मनुष्य का स्वास्थ्य कैसा है।  ईश्वर ने पवित्र क़ुरआन में जहां पर मनुष्य को दी गई विभूतियों का उल्लेख किया है वहां पर कहा है कि क्या हमने मनुष्य को एक ज़बान और दो होठ नहीं दिये।  इस प्रकार से वह मनुष्य को सोचने पर विवश करना चाहता है।  बात करने में भी ज़बान की भूमिका है।

दूसरी ओर मनुष्य, ज़बान के ही माध्यम से संसार में अपने मित्र और शत्रु बना लेता है।  वह अच्छे बोल बोलकर लोगों को अपना मित्र बना सकता है जबकि बुरी बातें और बुराई करके अपने शत्रुओं की संख्या बढ़ा सकता है।  हज़रत अली अलैहिस्सलाम कहते हैं कि मनुष्य, अपनी ज़बान के नीचे छिपा हुआ है।  मनुष्य अपने विचारों को जब़ान के माध्यम से ही पेश करता है।  इससे वह उपदेश देकर लोगों को अच्छाई की ओर मोड़ सकता है।  बड़े बूढ़ों का कहना है कि मनुष्य को सदैव अपनी ज़बान पर नियंत्रण रखना चाहिए।  यह छोटी सी ज़बान कभी बड़े-बड़े झगड़ों का कारण बन जाती है।  ऐसे में हमें ईश्वर की दी हुई इस अनुकंपा की रक्षा करते हुए इसका उचित ढंग से उपयोग करना चाहिए।

 

 

 

 

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Aug २९, २०१८ १६:२५ Asia/Kolkata
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