ईरान की इस्लामी क्रांति और दुनिया की बड़ी क्रांतियों में जो सबसे महत्वपूर्ण अंतर है वह क्रांति के लक्ष्यों और उद्देश्यों में निहित है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के न केवल यह कि आंतरिक लक्ष्य थे बल्कि उसके क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय लक्ष्य भी थे और यह उद्देश्य और लक्ष्य भी दूसरी क्रान्तियों से बहुत ही अलग थे। ईरान की इस्लामी क्रांति का संदेश, आंतरिक स्तर पर स्वतंत्रताप्रेम और अत्याचार को नकारना, स्वाधीनता प्रेम, ईरान पर विदेशी वर्चस्व नकारना, न्याय, स्वाधीनता और स्वतंत्रता को पूरी करने वाले राजनैतिक ढांचे का आधार रखने के लिए इस्लाम धर्म से लाभ उठाना था। यह संदेश दुनिया के बहुत से राष्ट्रों विशेषकर कमज़ोर राष्ट्रों ने सुना और ट्यूनीशिया, अलजीरिया, मोरक्को, नाइजीरिया, लेबनान, मिस्र और बहरैन सहित दुनिया के बहुत देशों और क्षेत्रों में विभिन्न क्रांतियां सामने आईं और क्रांतियों ने कई देशों के तख्ते उलट दिए। इस्लामी देशों की जनता ने ईरानी जनता की क्रांति से आदर्श लेकर इतिहास रच दिया और इससे देश की तत्कालीन सरकारों और विश्व शक्तियों की चिंताओं में वृद्धि हो गयी क्योंकि नयी इस्लामी क्रांतियों ने पश्चिमी एशिया में मौजूद व्यवस्था के ढांचे के लिए चुनौतियां खड़ी कर दीं।

इस्लामी जगत के समकालीन इतिहास में ईरान की इस्लामी क्रांति ने वास्तव में मुसलमानों को उनकी इस्लामी पहचान दिलाने और उनकी पहचान को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस्लामी पहचान यद्यपि ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता का मुख्य कारक थी किन्तु दूसरे आयाम से ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता, इसकी वैश्विक विशेषताओं के दृष्टिगत, इस्लामी जगत में विभिन्न क्रांतियों के पैदा होने और इस्लामी पहचान के उजागर होने का कारण भी बनी है क्योंकि ईरान की इस्लामी क्रांति एक वैश्विक लहर पर निर्भर है जिसका उद्देश्य इस्लामी समाज की वास्तविक परिपूर्णता तक इस्लामी आत्मा को जगाना, मुसलमानों और उनकी पहचान को जागरूक बनाना है। इस प्रकार के उदाहरण इस्लामी क्रांतियों के विस्तार और उसके विकास और ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता में देखे जा सकते हैं। ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता से प्रेरणा लेकर पीड़ित व स्वतंत्रता के इच्छुकराष्ट्र अत्याचारी व शैतानी शक्तियों से टकरा गए और यही कारण है कि यह क्रांति मुस्लिम देशों और दूसरे स्थानों पर दुनिया के स्वतंत्रताप्रेमियों के लिए मार्गदर्शक बन गयी।

 

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद दुनियाभर में इस्लामी जागरूकता आंदोलन नये चरण में प्रविष्ट हो गया और इसी के साथ मुसलमानों के आंतरिक शक्ति बढ़ी। फ़िलिस्तीन, लेबनान, तुर्की, मिस्र, बहरैन, लीबिया, यमन, सूडान, पाकिस्तान, दक्षिणपूर्वी एशिया और दुनिया के दूसरे मुस्लिम क्षेत्रों में इस्लामी चेतना बढ़ी और इस्लाम धर्म की ओर रूझान रखने वाले शक्तिशाली हुए और उन्होंने ईरान की इस्लामी क्रांति से प्रभावित होकर इस्लामी जगत में अपनी इस्लामी पहचान हासिल की। इस बीच फ़िलिस्तीन के मुद्दे को इस्लामी रंग देना, इस्लामी पहचान को मज़बूत करने की दिशा में इस्लामी जगत के परिवर्तनों और संबंधों में ईरान की इस्लामी क्रांति का एक अन्य महत्वपूर्ण प्रभाव है। इस बारे में इस्लाम क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी कहते हैं कि जब तक हम इस्लामी की ओर पलट नहीं पलटते, पैग़म्बरे इस्लाम के इस्लाम की ओर नहीं पलटते, हमारी समस्या हल नहीं होगी, न हम फ़िलिस्तीनी मुद्दे को हल कर पाएंगे, न अफ़ग़ान और न ही दुनिया के दूसरे देशों के मामलों को, इस्लामी शिक्षाएं हासिल की जानी चहिए और जैसा कि इस्लाम ने आदेश दिया है, मोमिन दुनिया में जहां कहीं भी हों, भाई हैं और आदेश दिया गया है कि अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़े हो और आपस में झगड़ा लड़ाई न करो।

इस्लामी क्रांति ने दुनिया विशेषकर इस्लामी जगत में इस्लामी भूमिका को जीवित, शुद्ध इस्लामी शिक्षाओं के आधार पर एक सरकार का गठन तथा इस्लामी मूल्यों का पालन करके वर्तमान समय में इस्लामी आवश्यकताओं का भरपूर जवाब दिया और दुनिया के सामने समाज के संचालन और सरकार चालने में सक्षम एक वैश्विक और व्यापाक विचारधारा के रूप में इस्लाम को पेश किया। यह ऐसी स्थिति में था कि पश्चिम वर्तमान समय में इस्लामी सरकार के गठन को लाभहीन समझता था, वह इसलिए कि उनका मानना था कि इस्लाम अपनी बेहतरीन स्थिति में अर्थात चौदह शताब्दी पहले भी अच्छी शैली वाली सरकार था किन्तु आज उसमें सरकार करने की क्षमता नहीं पायी जाती और आज के समय की सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक व सामरिक आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकता। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने सभी पर यह सिद्ध कर दिया कि शुद्ध इस्लाम की ओर पलटना केवल एक काल्पनिक बात नहीं है बल्कि इस वास्तविकता तक पहुंचा जा सकता है। ईरान की इस्लामी क्रांति ने इस्लामी उमंगों को विस्तृत करके यह बता दिया कि धर्म विशेषकर इस्लाम धर्म, समय बीतने और आधुनिकतावाद के बावजूद भी न केवल बंद गली में नहीं पहुंचा है बलकि वह अब भी आत्याचार से मानवता को मुक्ति दिलाने का एक बेहतरीन साधन है।

 

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता से दुनिया में धर्म की ओर रुझान बढ़ा, धर्म का पुनर्जीवन हुआ और इस दुनिया में जो धर्म विरोधी रुझान रखने लगी थी और ईश्वर का इनकार किया जा रहा था, अध्यात्म की शिक्षा आम हो गयी। इस्लामी क्रांति ने इसी प्रकार दुनिया के स्तर पर ऐसी स्थिति पैदा कर दी जिससे यह सिद्ध हो गया कि दुनिया अतीत से भिन्न अब दूसरे ही दौर में प्रविष्ट हो गयी है जिसकी धार्मिक व अध्यात्मिक विशेषता है। वास्तव में इस्लामी क्रांति ने भौतिक विचारधारा से भरी दुनिया में दूसरे धर्म के अनुयाइयों पर अध्यात्मिक व धार्मिक शक्ति के क्षितिज खोलने के साथ ही मुसलमानों को इस्लाम की गोद में दोबारा पहुंचा दिया।  ईरान में इस्लाम धर्म पर आधारित राजनैतिक व्यवस्था की स्थापना से दुनिया में मुसलमानों ने नई पहचान प्राप्त की और इस्लामी हस्तियों ने पुनः प्रतिष्ठा हासिल की और आख़िरकार मुसलमानों के अपमान के लिए साम्राज्यवादी शक्तियों की ओर से दश्कों पुरानी कोशिशों पर पानी फिर गया और पुरी दुनिया में इस्लाम की ओर रुझान बढ़ गया और इसमें दिन प्रतिदिन विकास होता गया और यह विषय इतना अधिक बढ़ गया कि कुछ इस्लामवादियों ने अपने अपने देशों में इस्लामी सरकार के गठन का प्रयास किया।

ईरान की इस्लामी क्रांति के प्रभावों में से एक इसका वैश्विक प्रभाव है और यह कि इस क्रांति ने देश की सीमाओं के बाहर अपनी सीमाएं रेखांकित की। यह क्रांति, न्यायप्रेम, ईश्वर और अध्यात्म पर आधारित राजनैतिक व्यवस्था को तत्कालीन मनुष्य के लिए उपहार स्वरूप पेश किया और फ़्रांस व रूस की क्रांतियों के विपरीत जो हाथों लिखी आस्थाओं को मानवता के लिए सौभाग्य का संदेश देती है, इस्लामी क्रांति ने ईश्वरीय आस्था व धर्म को मानवीय प्रवृत्ति के अनुसार एक आदर्श के रूप पेश किया जिसने क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रभाव छोड़े।

ईश्वरीय आंदोलन के रूप में इस्लामी क्रांति ने व्यापक और मनुष्य की पवित्र प्रवृत्ति पर आधारित शक्ति के महत्व को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पेश किया। ईरान की इस्लामी क्रांति ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक नवीन संस्कृति की बेल रखी। संस्कृति की यह नवीन बेल, धार्मिक लोकतंत्र, इस्लामी विचारधारा के पुनर्जीवन, इस्लामी सभ्यता की ओर दुनिया के रूझान, सांस्कृतिक गतिविधियों पर केन्द्रित, नवीन सामाजिक व सांस्कृतिक आंदोलनों को मज़बूत करना, साम्राज्यवाद विरोधी और स्वतंत्रता प्रेम पर आधारित है।

ईरान की इस्लामी क्रांति ने आंतरिक स्तर पर संस्कृति के विस्तार और बाहर से सांस्कृतिक लेनदेन पर भरोसा करते हुए क्षेत्रीय व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर राजनैतिक ढांचे में सुधार के आधार पर  दुनिया के साथ वार्ता का माहौल पैदा किया ताकि इस प्रकार से राजनैतिक व्यवस्था में मौजूद ख़राबियों को दूर करे और नयी संस्कृति का आधार रखे और इस तहर से अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में नया व्यवहार अस्तित्व में आए। उदाहरण स्वरूप विदेश नीति के क्षेत्र में ईरान की इस्लामी क्रांति की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक, स्वाधीनता प्रेम को फैलाना और विश्व शक्तियों पर निर्भरता को नकारना है।

वास्तव में यह दावा किया जा सकता है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ईरान की इस्लामी क्रांति के महत्वपूर्ण प्रभावों में दुनिया में छायी दो ध्रुवीय व्यवस्था को समाप्त करना था। इस्लामी क्रांति की शिक्षाओं और आदर्शों की समीक्षा से यह बात समझ में आती है कि ईरान की क्रांति ने अंतर्राष्ट्रीय हिसाब से दुनिया में छायी दो ध्रुवीय व्यवस्था पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए देशों के बीच शक्ति के वितरण की बात पेश की। चूंकि इस्लामी व्यवस्था साम्राज्यवा की विरोधी थी उसने आरंभ से ही ईरान के आंतरिक मामलों में विदेशी शक्तियों के हस्तक्षेप का विरोध किया और पिट्ठु सरकार के रूप में शाही व्यवस्था को अवैध क़रार दिया। इसका परिणाम यह निकला कि ईरान की शाही सरकार जनसैलाब के सामने न टिक सकी और ईरान में अमरीका का वर्चस्व और उसका हस्तक्षेप समाप्त हो गया।

इसके साथ ही ईरान की इस्लामी क्रांति ने न पूरब न पश्चिम का नारा देकर एक ऐसी व्यवस्था का आधार रखा जिसमें सभी समान हों और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी देशों की अखंडता का सम्मान हो तथा मानवीय व ईश्वरीय अधिकारों की रक्षा की जाए। (AK)

 

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Sep ०२, २०१८ १३:४९ Asia/Kolkata
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