अल्लाह ने इंसान को जो अनुकंपाएं प्रदान की हैं उनमें से एक कान और श्रवण की शक्ति है।

जैसा कि पवित्र क़ुरआन के सूरए मुल्क की आयत संख्या 23 में ईश्वर कहता है कि हे पैग़म्बर आप कह दीजिए कि ईश्वर ने तुम्हें पैदा किया है और उसी ने तुम्हारे लिए कान, आंख और दिल क़रार दिए हैं किन्तु तुम बहुत कम आभार व्यक्त करने वाले हो।

जो व्यक्ति भी सुनने की ईश्वरीय अनुकंपा से संपन्न न हो वह अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग खो चुका है। सुनने की इंद्री हमेशा और बिना किसी बाधा के हर हाल में अपने दायित्वों का निर्वाह कर सकती है जबकि यह बात देखने की इंद्री पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। अर्थात कभी कभी हालात ऐसे पैदा हो जाते हैं कि इंसान देखने में सक्षम नहीं होता। उदाहरण स्वरूप अंधेरे में, यदि इंसान की आखें खुली भी हों तब भी वह चीज़ों को स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता किन्तु अंधेरे में हम अच्छी तरह सुन सकते हैं। इसी प्रकार सोने के समय इंसान की आंखें बंद हो जाती हैं किन्तु यदि आसपास कोई शोर शराबा होता है तो इंसान की नींद टूट जाती है क्योंकि फ़िज़ियोलाजीस्ट के नये शोधों से पता चलता है कि सोते समय सबसे अंत में जो इंद्री काम करना बंद कर देती है वह सुनने की इंद्री होती है और यह पवित्र क़ुरआन के चमत्कार होने का एक अन्य ठोस प्रमाण है क्योंकि ईश्वर असहाबे कहफ़ की कहानी और उनकी कुछ सौ वर्षीय नींद के बारे में आश्चर्य बयान करते हुए कहता है कि और फिर हमने गुफा में उनके कान पर कई साल के लिए बेहोशी का पर्दा डाल दिया।

 

ईश्वर पवित्र क़ुरआन में मनुष्य की सुनने की इंद्री पर बहुत अधिक ध्यान देता है और इसको वास्तविकता तक पहुंचने का एक मार्ग बताता है। मनुष्य के लिए कान के महत्व को बताने का सबसे बड़ा कारण यह है कि क़ुरआन ने सिर्फ़ इसका बुद्धि के साथ उल्लेख किया है ताकि यह समझाए कि बुद्धि और कान के बीच मजब़ूत संबंध हैं। ईश्वर पवित्र क़ुरआन के सूरए मुल्क की आयत संख्या 10 में कहता है, और फिर कहेंगे कि यदि हम बात सुन लेते और समझते होते तो आज नरक वालों में न होते।

मनुष्य अपनी सृष्टि के बारे में चिंतन मनन करके दुनिया की विचित्रताओं को देखता कि उसकी हर चीज़, महान व शक्तिशाली सृष्टिकर्ता की ताक़त की निशानी है। (AK)

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Sep ०४, २०१८ १६:२८ Asia/Kolkata
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