अधिकांश लोगों के जीवन में बहुत से मूल और संयुक्त सवाल होते हैं।

साधारण लोगों से लेकर विशेष लोग और बुद्धिजीवी तक अपने जीवन के किसी न किसी चरण में सवालों का सामना करते हैं और कई बार उन सवालों की अनदेखी के बाद भी कभी न कभी उन सवालों के जवाब के बारे में उन्हें सोचना पड़ता है। इस सृष्टि की रचना, उसके रचयिता, और यह कि क्या इस रचना में रचयिता के चिन्ह हैं जैसे सवालों के बारे में ज़रूर सोचते हैं। इन सवालों को मनुष्य के मन में पैदा होने वाले मूल प्रश्नों में शामिल समझा जाता है। दुनिया के विभिन्न मतों और धर्मों में इन्सानों के इन बुनियादी सवालों के जवाब दिये गये हैं । यहां पर यह बात भी विचार योग्य है कि इ्स्लाम धर्म ने सभी को सृष्टि में विचार व चिंतन करने का निमत्रंण दिया है और स्वंय भी सृष्टि के बारे में  विचारधारा पेश की है जिस पर चिंतन किया जा सकता है। इस्लामी बुद्धिजीवियों ने , इस्लामी शिक्षाओं, कुरआने मजीद की आयतों और हदीसों के आधार पर इस सृष्टि पर चिंतन किया और इन सवालों का उत्तर खोजने का प्रयास किया कि हमारे आस पास की चीज़ें किस हद तक रचयिता के अस्तित्व का पता देते हैं।

ईश्वरीय रचनाओं के बारे में चिंतन , ईश्वर की पहचान का एक मार्ग है । इन्सान इस दुनिया की विभिन्न चीज़ों को देख कर और उन पर विचार करके निश्चित रूप से ईश्वर तक पहुंच सकता है। इन्ही रचनाओं में से कीड़े मकोड़े हैं जो देखने में तो अन्य रचनाओं की तुलना में बहुत छोटे होते हैं लेकिन उनके भीतर बहुत बड़ी सच्चाई छिपी होती है। क़ुरआने मजीद की आयतों तथा  पैगम्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के कथनों में निश्चित रूप से इस सच्चाई के कुछ भागों का वर्णन किया गया है जिनसे अवगत होकर हर इन्सान सोचने पर विवश हो जाता है। यही वजह है कि सभी ईश्वरीय दूतों ने कुरआने मजीद की आयतों की तरह ही , मनुष्य को चिंतन का निमंत्रण दिया है ताकि चिंतन करके , हम ईश्वर की महानता के छोटे से अंश से अवगत हो सकें । इस संदर्भ में कीड़े मकोड़े बेहद अहम हैं।

एक अत्यन्त बुद्धिमान जन्तु, शहद की मक्खी है। यदि मधुमक्खी की जीवन शैली पर ध्यान दिया जाए और उसका अध्ययन किया जाए तो एेसी सच्चाइयां नज़र आएंगे कि मनुष्य हैरत में पड़ जाएगा। कुरआने मजीद में इसी नाम का एक पूरा सूरा है जिसे सूरए नेह्ल कहा जाता है। नेहल का अरबी में अर्थ , मधुमक्खी है। सूरए नेह्ल की आयत नंबर 68 और 69 में  मधुमक्खी के बारे में कहा गया है कि तुम्हारे पालनहार ने  मधुमक्खी को यह संदेश दिया कि पहाड़ों, पेड़ों और बनाए गये भवनों पर घर बनाए फिर सभी फलों से लाभ उठा और ईश्वर ने जो रास्ते तेरे लिए निर्धारित किये हैं उन पर आसानी से चल । उनके पेट के भीतर से विशेष प्रकार का और विभिन्न रंगों का पेय पदार्थ प्राप्त होता है कि जिसमें लोगों के लिए स्वास्थ्य लाभ है । इस में स्पष्ट चिन्ह है उन लोगों के लिए जो चिंतन व मनन करने वाले हैं।

 

कुरआने मजीद की इन आयतों में मधुमक्खी के घर के बारे में बात की गयी है। आप सब ने मधुमक्खी के छत्ते को ज़रूर देखा होगा जो प्रायः छे कोणीय होता है। इसे अत्याधिक सूक्ष्मता के साथ बनाया जाता है और इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट नमूना होता है जिसका नक्शा बहुत बारीकी से  से बनाया जाता है। यह घर काफी मज़बूत होता है और इसे मोम से बनाया जाता है।

 

 

कुरआने मजीद की आयतों में आगे चल कर मधुमक्खी के आहार को  की बात की गयी है और शहद का उल्लेख करते हुए उसे लाभ दायक बताया गया है। मधुमक्खी कभी कभी फूलों से भरे इलाक़े तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करती है और वापसी में भटक न जाए इसके लिए वह रास्ते में जगह जगत निशान लगाती जाती है यही वजह है कि मधुमक्खी अपने छत्ते का रास्ता कभी नहीं भूलती। मधुमक्खी फूलों का रस चूसती है और फिर उससे अपने शरीर में शहद बना देती है और यह शहद लाकर छत्ते मेंदे देती है। शहद का रंग , उस फूल के रंग व रूप पर निर्भर करता है जिस पर बैठ कर मधुमक्खी ने रसपान किया हो।

 

मधुमक्खी के रहस्यमय जीवन का  यह एक भाग है लेकिन सवाल यह है कि इस प्रकार की व्यवस्था और इतने योजनाबद्ध रूप से काम करना उसे किस ने सिखाया है? यदि हम मधुमक्खी की शैली पर ध्यान दें तो निश्चित रूप से हमें इस सृष्टि और उसकी रचना के रहस्यों के बारे में कुछ अंदाज़ा होगा और उसे बनाने वाले की शक्ति का पता चलेगा।

 

 

 

मधुमक्खी मानव जीवन के लिए बेहद लाभदायक है। इसके साथ ही हम टिड्डी के जीवन पर  यदि ध्यान दें तो भी हमें बहुत से आश्चर्यजनक तथ्य नज़र आएंगे। टिड्डी एक छोटा सा कमज़ोर प्राणी है लेकिन जब टिडर्डियां अपने दल के साथ आगे बढ़ता है तो आंधी तूफान की तरह धरती, पहाड़, और खेत व खलिहान पर छा जाते हैं। यहां तक कि अंधेरा छा जाता है यदि कोई इन्सान उन्हें व्यवस्थित करना चाहता तो कितना समय लगता? तो क्या ईश्वर के अलावा कोई और यह काम कर सकता है?

 

चींटी भी एक अत्याधिक कमज़ोर जीव है लेकिन इसी छोटे और कमज़ोर जीव के जीवन और उसके शरीर के बारे में अध्ययन से शक्तिशाली ईश्वर की पहचान प्राप्त की जा सकती है। चींटी इतना छोटा जीव है कि यदि ध्यान न दिया जाए तो उसे देखना भी संभव नहीं मगर उसकी अपनी एक दुनिया होती है यदि आप ध्यान दें तो देखेंगे कि वह किस प्रकार से गर्मियों में, सर्दियों के लिए आहार इकट्ठा करती है और दाने का भंडारण करती है सवाल यह है कि उसे किसने सिखाया कि कौन सी चीज़ उसके लिए लाभदायक है और कौन सा दाना व उठा सकती है और कौन सा दाना उसक बिल में जा सकता है और यह कि उन दानों को कहा रखा जाए कि वह सर्दियों तक सुरक्षित रहें। इस कमज़ोर से जीव को यह सब कुछ किसने समझाया?

 

रोचक तथ्य तो यह है कि चींटी इतने छोटे शरीर के बावजूद अपने लिए ज़रूरी सभी अंग रखती है यही वजह है कि चींटी की रचना को हाथी और गेंडे जैसे बड़े जानवरों की रचना से अधिक सूक्ष्म और महत्वपूर्ण कहा जाता है। चींटी के बहुत ही छोटे से सिर में आंख, कान और दो बाल होते है जो एंटीना का काम करते हैं जिन्हें चींटी संपर्क स्थापित करने के लिए इस्तेमाल करती है। उसके पेट में अमाशय और अंतड़ी जैसी चीज़ भी होती है और बहुत सी सूक्ष्म पसिलयां भी होती हैं जो पेट को चारों ओर से घेरे रहती हैं। चींटे का स्नायू तंत्र और मांसपेशियां उसके शरीर के हिसाब से होती है और उसके जीवन की समस्याओं के निवारण के लिए छोटा सा दिमाग भी उनके सिर में होता है। उसके छोटे छोटे पैरों में कई जोड़ होते हैं जो बड़े बड़े जानवरों के पैरों की ही भांति विशेष कामों के लिए बने होते हैं।

 

 सर्व सक्षम ईश्वर ने चींटी के कमज़ोर शरीर को छोटे और कमज़ोर पैरों पर इस प्रकार से रखा है कि कभी कभी वह अपने शरीर के भार से कई गुना अधिक भार भी उठा लेती है। यही नहीं बल्कि वह इस बोझ के साथ सीधी दीवार पर भी चढ़ जाती है और कभी कभी तो छत पर भी चलती है। यदि इन्सान विचार करे और चींटी के ही जीवन पर ध्यान दे तो भी उसे पता चल जाएगा कि इस दुनिया का रचयिता है और उसने बड़ी सूझ बूझ के साथ एक एक चीज़ को बनाया है। यदि हम सही तौर से देखें तो हमें हर पशु पंछी में ईश्वरीय उपाय का चिन्ह मिलेगा और बुद्धिमान लोग , इन चिन्हों के सहारे ईश्वर तक पहुंच जाते हैं।

 

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Sep ०८, २०१८ ११:४८ Asia/Kolkata
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