हममें से अधिकतर लोगों के लिए समुद्र में टहलना, एक सुन्दर सपना होता है जो बड़ी मुश्किल से पूरा होता है किन्तु यह स्वीकार करना कठिन है कि दिल की यह कामना फ़ार्स की खाड़ी में ईरानी द्वीप नाज़ में पूरी तरह पूरी हो जाती है लोगों का यह सपना यहां पूरा होता नज़र आ जाता है। 

ईरानी द्वीप नाज़ दो छोटे द्वीपों से मिलकर बना है जो पूर्वी क़िश्म के तट के निकट स्थित है और तट से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नाज़ द्वीप का क्षेत्रफल लगभग तीन हेक्टर है। इस द्वीप में रेत के तट नहीं हैं और इसके आस पास पांच से दस मीटर तक पथरीली दीवारें हैं।

नाज़ द्वीप की सतह बराबर है और ज्वार भांटा या पानी की लंबी लंबी लहरें उठाने के समय थोड़ी देर के लिए एक सूखी पट्टी इस द्वीप को क़िश्म तट से जोड़ देती है। इस समय यह पट्टी एकमात्र रास्ता है जिस पर पैदल या गाड़ी से एक किलोमीटर की दूरी तक फ़ार्स की खाड़ी के पानी पर चला जा सकता है और नाज़ द्वीप में दाख़िल हुआ जा सकता है। यद्यपि इसका समय बहुत कम ही रहता है किन्तु इसी समयावधि में इस द्वीप, हुर्मुज़ जलडमरू मध्य और लार्क द्वीप की ऊंचाई तथा फ़ार्स की खाड़ी की सुन्दरताओं को देखा सकता है।

नाज़ द्वीप के स्थानीय निवासी इसको दो अलग हुए द्वीप कहते हैं अर्थात  वह स्थान जो आधे दिन पानी में रहता है और आधे दिन शुष्क क्षेत्र से जुड़ जाता है। लगभग 50 साल पहले इस द्वीप में लोग रहते थे और वहां पर मछुआरों का भंडारण था किन्तु बाद में इसको केवल शिकार के लिए ही प्रयोग किया जाने लगा और वहां पर अब कोई रहता नहीं है। अलबत्ता स्थानीय मछुआरों ने वहां पर कुछ छप्पर और अस्थाई ख़ैमे लगा रखे हैं।

क़िश्म के नाज़ द्वीप के तट रेतीले हैं जो स्थानीय मछुआरों, समुद्री पक्षियों के खाने पीने के लिए उचित स्थान है। साल की अलग अलग  फ़सलों में बहुत से पर्यटक सूर्यास्त के समय इसको देखने आते हैं। इस प्रकार वे यहां के सूर्यास्त के एक सुन्दर दृश्य देखने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

रंग बिरंगी सीपें, जेलीफ़िश और केकड़ों के बच्चे जिनकी त्वचा अभी कड़ी नहीं हुई हैं और समुद्र की लहरें उनको तट पर ले आती हैं, नाज़ तट पर उन लोगों की प्रतीक्षा में होते हैं जिन्होंने कभी एक स्थान पर इतने सुन्दर दृश्य न हुए। इस छोटे द्वीप के नाम की हर ओर चर्चा है। इसके तट रेतीले और मोरंग के हैं इसलिए इसमें गीली मिट्टी और पैर में चिपकने की कोई समस्या नहीं होती ।

नाज़ द्वीप की सुन्दरता और शांति तो एक ओर है दूसरी ओर यहां पर रंग बिरंगी सीपियों और मूंगों को देखा जा सकता है। इस चीज़ ने इस द्वीप की सुन्दरता और पर्यटकों की हैरानियों में चार चांद लगा दिया है। द्वीप के लगभग दो किलोमीटर का क्षेत्र, समुद्री मंगों विशेषकर फ़र्श के मूंगों के लिए बेहतरीन स्थान समझा जाता है।  

क़िश्म शांत व सुन्दर द्वीप है जिसके सुन्दर तट तथा उसकी नर्म और साफ़ रेत पर घंटों नंगे पैर चला जा सकता है और इससे वास्तविक शांति प्राप्त होती है। यही प्राकृतिक सुन्दरता और अंछूते माहौल ने क़िश्म को यात्रा करने, घूमने फिरने और जीवन व्यतीत करने के सबसे अच्छे क्षेत्र में बदल दिया है। आइये मिलकर क़िश्म की एक सैर करते हैं।

नाज़ द्वीप के आसपास पाए जाने वाले मरजान या मूंगों को, जो लोग ग़ोताख़ोरी कर सकते हैं वह इस द्वीप के अनछुए क्षेत्रों में ग़ोताख़ोरी करके हासिल कर सकते हैं। भौगोलिक दृष्टि के कारण नाज़ द्वीप विभिन्न प्रकार के जलचरों के लिए समृद्ध स्थल तथा ग्रीष्मऋतु के पक्षियों के पलायन के गंतव्य के लिए बेहतरीन स्थान है। फ़ार्स खाड़ी की डोल्फ़िन और अद्वितीय मोतियों के सीप यहां पर सरलता से देखे जा सकते हैं। मछलियां, समुद्री सेही, केकड़े, और विभिन्न प्रकार की सीपों को भी यहां देखा जा सकता है।

 

जैसा कि हमने बताया था कि नाज़ द्वीप देखने के बाद हम सेरी द्वीप का दौरा करेंगे जिसका असली और पारसी नाम राज़ है, अलबत्ता कुछ लोगों का कहना है कि इस द्वीप का शुरुआती नाम सूरी था जिसका अर्थ होता है लाल मिट्टी या लाल गीली मिट्टी जो इस द्वीप के चारों ओर फैली हुई है। धीरे धीरे इसका नाम सैरी से सिरी पड़ा। यह द्वीप सैरी द्वीप के पूरब में स्थित है। अबू मूसा शहर के केन्द्र तक इसकी दूरी जो सीरी द्वीप के पूर्वी भाग में स्थित है, लगभग 27 किलोमीटर है। इसी प्रकार प्रांत के केन्द्र से इसकी समुद्री दूरी लगभग 152 समुद्री मील है। सीरी द्वीप का क्षेत्रफल 17.3 वर्गकिलोमीटर है।

सीरी चतुर्भुज है इसमें गहराई और ऊंचाई नहीं है। इसका सबसे ऊंचा भाग समुद्र तल से 24 मीटर है जबकि द्वीप की सबसे अधिक लंबाई और चौड़ाई 6.1 और 4.6 किलोमीटर है। इस द्वीप में बड़ी संख्या में खजूर के पेड़ पाए जाते हैं जिसका प्रयोग केवल स्थानीय लोग ही करते हैं। इस क्षेत्र में वनस्पतियां बहुत कम पायी जाती है और इस द्वीप में Red Soil Mine भी मौजूद है।

सीरी द्वीप के किनारों और उत्तरी भागों में रहने के लिए स्थान बने हुए हैं जबकि दूसरी संस्थाएं और प्रतिष्ठान भी वहां पर बने हुए हैं। यह द्वीप पूर्ण रूप से सैनिक है। कोई भी व्यक्ति वहां जीवन व्यतीत नहीं कर सकता और द्वीप के केवल कुछ ही लोग तेल प्रतिष्ठान में काम करते हैं। अतीत में स्थानीय लोग सीरी द्वीप में जीवन व्यतीत करते थे जो समय बीतने के साथ वहां से कूच कर गये। सीरी द्वीप में पहली बार तेल निकालने के लिए सूफ़ीरान कंपनी ने काम शुरु किया । वर्तमान समय में इस तेल संपन्न क्षेत्र से प्रतिदिन एक लाख पांच हज़ार बैरल तेल निकाला जाता है।

 

सीरी द्वीप के जानवरों में हिरन, बिल्ली और जलमुर्ग़ी की ओर संकेत किया जा सकता है। इस क्षेत्र में वह वनस्तपतियां और झाड़ियां उग सकती हैं जिसमें पानी भंडार की काफ़ी क्षमता पायी जाती हो। खजूर के पेड़ के अतिरिक्त अतीत में मदार और नागफनी भी देखे जा सकते हैं। सीरी द्वीप के पानी में विभिन्न प्रकार के जलचर पाए जाते हैं जिनमें से कुछ स्थानीय हैं जबकि कुछ दूसरे क्षेत्रों से कूच करके आए हैं।  इसी प्रकार इस क्षेत्र के गिरगिटों को भी यहां देखा जा सकता है। ठंडक के मौसम में यह क्षेत्र पूरी तरह गर्म होता है, यहां गर्मी बहुत होती है किन्तु संतुलित नमी भी पायी जाती है। वर्ष के अन्य दिनों में तटवर्ती क्षेत्रों में 50 प्रतिशत से अधिक आर्द्रता पायी जाती है। सीरी द्वीप के निवासियों की भाषा, स्थानीय है जो लहजे के लेहाज़ से बंदरअब्बास के लोगों से बहुत निकट होती है।

इस इलाक़े में छोटे बड़े दसियों द्वीप स्थित हैं, जिनकी अपनी सुन्दरता है। जैसे कि लार्क, हुरमुज़, क़िश्म, कीश, लावान, हेंगाम, ख़ारक, ख़रकू, अबू मूसा, तुंबे बुज़ुर्ग और तुंबे कूचक। इनमें से कुछ द्वीपों पर आबादी है और कुछ ग़ैर आबाद हैं। शीदूर द्वीप इन्हीं में से एक द्वीप है। फ़ार्स खाड़ी के तट से इसकी दूरी 9 किलोमीटर है। वर्तमान समय में यह ग़ैर आबाद द्वीप है लेकिन यहां मौजूद खंडहरों से पता चलता है कि प्राचीन काल में यहां लोग बसते थे। मूंगों वाले भाग और शीदूर के तटों को 1378 में रामसर कन्वेंशन के तहत अंतरराष्ट्रीय झील के रूप में औपचारिकता प्रदान कर दी गई।

क़िश्म द्वीप 1500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पर फैला हुआ है जो फ़ार्स की खाड़ी के दूसरे सबसे बड़े द्वीप बहरैन से लगभग ढाई गुना बड़ा है। क़िश्म द्वीप हुर्मुज़ जलडमरु मध्य की लंबाई में स्थित है। आपके लिए यह जानना रोचक होगा कि हुर्मुज़ जलडमरु मध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में है इसकी चौड़ाई 55 किलोमीटर है। यह जलडमरु मध्य फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती इलाक़ों में दक्षिणी ईरान के 900 किलोमीटर मार्ग को ओमान सागर के माध्यम से विश्व के स्वतंत्र जलक्षेत्र से जोड़ता है। क़िश्म द्वीप लगभग 120 किलोमीटर लंबा है और इसकी चौड़ाई 10 से 35 किलोमीटर तक है अर्थात इसकी सबसे कम चौड़ाई 10 किलोमीटर और अधिकतम चौड़ाई 35 किलोमीटर है। इस द्वीप में कम ऊंचाई वाली पहाड़ियां और घिसे-पिटे टीले हैं। क़िश्म में सबसे ऊंची पहाड़ी 350 मीटर  है। इस द्वीप का मौसम आर्द्र रहता है और कुछ महीनों में आर्द्रता बढ़कर 95 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। (AK)   

 

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Sep ०८, २०१८ १२:१४ Asia/Kolkata
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