ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद विज्ञान व तकनीक में निरंतर विकास ने ईरान की प्रगति पर अत्यधिक प्रभाव डाला है।

इस संबंध में उदाहरण के तौर पर ईरान द्वारा शांतिपूर्ण लक्ष्यों के लिए परमाणु विज्ञान व तकनीक की प्राप्ति, अंतरिक्ष विज्ञान में प्रगति और इस क्षेत्र में विश्व में अहम स्थान की प्राप्ति, चिकित्सा व स्टेम सेल्ज़ के मैदान में सफलता और नैनो तकनीक व नॉलेज बेस्ड कंपनियों के विस्तार में अनेक सफलाओं की ओर इशारा किया जा सकता है जो पिछले चार दशकों में ईरानियों की अथक मेहनत का फल हैं।

क्लेरिवेट एनालिटिक्स नामक साइटेशन संस्था की ओर से जारी किए गए ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि ईरान पिछले वर्ष संसार के 25 अहम देशों में विज्ञान के उत्पादन में संख्या की दृष्टि से सबसे आगे रहा है। इस्लामी जगत के विज्ञान उद्धरण केंद्र या Islamic World Science Citation Center के प्रमुख डाक्टर मुहम्मद जवाद दहक़ानी ने इस बात का उल्लेख करते हुए कि वर्ष 2017 में विज्ञान के उत्पादन में वृद्धि की दर ईरान में वर्ष 2016 की तुलना में 8 दशमलव 9 प्रतिशत अधिक रही है, कहा कि यह दर अन्य देशों की तुलना में संसार में सबसे अधिक है।

समीक्षाओं से पता चलता है कि पिछले छः साल में संसार में विज्ञान का सबसे अधिक उत्पादन करने वाले देशों में विज्ञान के उत्पादन में वृद्धि की दर अधिकतम 13 प्रतिशत रही है। इस संबंध में रूस की दर 13 प्रतिशत, भारत की 10 दशमलव 5 प्रतिशत और ईरान की 9 दशमलव 1 प्रतिशत रही है और ये देश इस मामले में क्रमशः पहले से तीसरे नंबर पर रहे हैं। वेब आफ़ साइंस साइटेशन केंद्र में दर्ज आंकड़ों के अनुसार ईरान में विज्ञान के उत्पादन की संख्या वर्ष 2012 में तीस हज़ार 947 थी और 2017 में यह संख्या बढ़ कर 52 हज़ार 183 तक पहुंच गई।

 

आज मानव विज्ञान की प्रगति के साथ ही मनुष्य के जीवन में विज्ञान का इस्तेमाल सभी आर्थिक, राजनैतिक व सामाजिक क्षेत्रों में बढ़ गया है और विज्ञान पर आधारित अर्थव्यवस्था और आर्थिक क्षेत्रों में नॉलेज बेस्ड कंपनियों के विकास की आवश्यकता को अधिक महत्व प्राप्त हो गया है। इस मैदान में नॉलेज बेस्ड कंपनियां अहम परिवर्तनों का कारण बन सकती हैं और नए आर्थिक परिणाम सामने ला सकती हैं। ये परिणाम, प्रतिरोधक अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के क्रियान्वयन में लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं। नॉलेज बेस्ड कंपनियों का दायित्व, प्रतिबंधों की स्थिति में देश की आवश्यकताओं को पूरा करना है। इस संबंध में विश्वविद्यालयों के अंदर नए नए विचार पेश करने वाले केंद्रों का गठन भी ज़रूरी है।

इस बारे में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई के बयान, आर्थिक परिवर्तनों के लिए नॉलेज बेस्ड कंपनियों की अहम भूमिका पर उनके विशेष ध्यान के सूचक हैं। उन्होंने कुछ समय पहले मज़दूरों से मुलाक़ात में ईरानी वस्तुओं के समर्थन को श्रमबल और आंतरिक उत्पादन के समर्थन के समान बताया था। इस संबंध में उन्होंने एक अहम बिंदु की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि ईरान में श्रमबल की सबसे अहम विशेषता यह है कि उसकी कला, सोच, प्रेरणा और रचनात्मकता विश्व के औसत स्तर से ऊंची है।

विज्ञान को आर्थिक व सामाजिक परिवर्तनों में एक अत्यंत प्रभावी शक्ति माना जाता है और इसे एक मूल्यवान वस्तु के रूप में अन्य देशों को निर्यात किए जाने योग्य और राष्ट्रीय संपत्ति में वृद्धि करने वाले कारक के रूप में देखा जाता है क्योंकि विज्ञान को बिना कुछ कमी व ख़र्च के दूसरों से साझा किया जा सकता है। बहुत से अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आज पूंजी की मात्रा और मंडी के क्षेत्रफल की राष्ट्रों के आर्थिक विकास में मूल भूमिका नहीं है बल्कि यह भूमिका अब विज्ञान व तकनीक के हाथ में है।

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वास्तव में विज्ञान एक स्थायी स्रोत के रूप में आर्थिक उद्यमियों के हाथ में रहता है और उत्पादन और सर्विस की विभिन्न प्रक्रियाओं में अपनी उपयोगिता के चलते प्रतिस्पर्धा और वर्धित मूल्य के अस्तित्व में आने का कारण बनता है। इसके परिणाम स्वरूप यह प्रक्रिया सामाजिक कल्याण में विस्तार, दरिद्रता व अन्याय में कमी और टिकाऊ विकास के स्तर को बेहतर बनाने का कारण बनती है। वर्तमान काल में नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था का शब्द, जिस पर आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) ने राष्ट्रों के विकास की रणनीति में विशेष बल दिया है, इस बात का सूचक है कि आर्थिक विकास में विज्ञान व तकनीक की भूमिका बहुत अहम है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था में ज्ञान-विज्ञान को गुणवत्ता व संख्या की दृष्टि से पहले से अधिक महत्व दिया जाता है। इस संगठन की परिभाषा के अनुसार नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था वह अर्थव्यवस्था है जो सीधे सीधे विज्ञान व सूचना के उत्पादन, वितरण और उपभोग के आधार पर हो।

नॉलेज बेस्ड कंपनियों के समर्थन के क़ानून की धारा एक के अनुसार नॉलेज बेस्ड कंपनियां या संस्थाएं ऐसी निजी या कोआपरेटिव कंपनियां व संस्थाएं हैं जो बेहतर तकनीकों के क्षेत्र में और अपार वर्धित मूल्य के साथ विज्ञान व धन को मिल कर बढ़ाने, विज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के विकास, वैज्ञानिक व आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति और अनुसंधान के परिणामों के व्यापारीकरण के उद्देश्य से गठित होती हैं। नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था तक पहुंच के लिए एक अहम बिंदु आर्थिक स्रोतों का निरंतर इस्तेमाल है। दूसरे शब्दों में विज्ञान के व्यवहारिकरण और उसके अधिक प्रभावी इस्तेमाल के लिए क्षमताओं को बढ़ाना ज़रूरी है ताकि नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था तक पहुंचा जा सके।

नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था में ज्ञान को वस्तु में बदल दिया जाता है और फिर उसे बिक्री के लिए पेश किया जाता है। नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था एक प्रकार से बिना भार की अर्थव्यवस्था है। नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था में, बेहतर तकनीक वाले उद्योगों जैसे विज्ञान आधारित गतिविधियों वाले क्षेत्रों में सकल घरेलू उत्पाद का एक ध्यान योग्य भाग पैदा किया जाता है। वास्तव में नॉलेज बेस्ड अर्थव्यवस्था, उत्पादन के तत्वों के बेहतर इस्तेमाल और काम के स्रोतों को निर्धारित करने की दृष्टि से संतुलित आर्थिक व्यवहार के अंतर्गत काम करती है और इसके नतीजे में इसकी प्रगति की दर अधिक होती है।

नॉलेज बेस्ड कंपनियों का विकास, तकनीकी विकास पर निर्भर है। दूसरे शब्दों में नॉलेज बेस्ड कंपनियों की भूमिका तकनीक में नई नई पहल करने और नए नए विचार पेश करने की है। नॉलेज बेस्ड कंपनियां, रचनात्मकता और नई नई वैज्ञानिक तकनीकों से लाभ उठा कर नए उत्पाद पेश कर रही हैं और इस माध्यम से नई मंडियों पर क़ब्ज़ा करती जा रही हैं। तकनीक ने हमेशा ही देशों के लिए धन उत्पन्न करने में मूल भूमिका निभाई है और लोगों के जीवन स्तर को अत्यधिक प्रभावित किया है।

तकनीक का प्रभाव इतना अधिक है कि सभ्यता के विकास को अधिकतर हर काल में पाई जाने वाली बेहतर तकनीकों को दृष्टि में रख कर निर्धारित किया जाता है। तकनीक की शक्ति, आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक शक्ति का कारण बनती है। वास्तव में रणनैतिक वस्तुओं में टिकाऊ आत्मनिर्भरता का एक बुनियादी मार्ग, तकनीक का विकास, उत्पाद के तत्वों से बेहतर ढंग से लाभ उठाना और नॉलेज बेस्ड कंपनियों के विकास के माध्यम से अर्थव्यवस्था को नॉलेज बेस्ड बनाना है। विभिन्न देश सही कार्यक्रम तैयार करके इन वस्तुओं के निर्यातक भी बन सकते हैं। (HN)

 

Sep ०९, २०१८ १५:५६ Asia/Kolkata
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