Sep ३०, २०१८ १६:३० Asia/Kolkata

हुरमुज़गान प्रान्त का एक इलाक़ा , फरूर बुज़ुर्ग  नामक द्वीप है जो अबूमूसा शहर से लगभग 36 मील की दूरी पर और बंदर अब्बास से 141 मील की दूरी पर स्थित है।

द्वीप का सब से लंबे और चौड़े भाग की लंबाई पांच बटा सात और पांच बटा चार किलोमीटर है और इस द्वीप के सब से ऊंचे स्थान की ऊंचाई, समुद्र तल से 145 मीटर पर स्थित है। द्वीप छोटे छोटे टीलों से बना है। फरूर बुज़ुर्ग द्वीप विश्व में भूकंप की एक पट्टी पर स्थित है। द्वीप के निकट समुद्र के पानी का रंग काला है। द्वीप में कई मुहाने और ढलान है जिनमें से कुछ की ऊंचाई 10 मीटर से भी अधिक है। इस द्वीप का नाम पहली फारसी भाषा के " फरवर" शब्द से लिया गया है जो वास्तव में दो भागों " फर" अर्थात वैभव और " वर" अर्थात स्वामी से बना है और दोनों को मिला कर उसके नाम का अर्थ, वैभव का स्वामी या वैभव शाली है।  फरूर बुज़ुर्ग द्वीप, सासानी काल में पार्स प्रान्त का एक भाग था और इस्लाम के काल से अब तक फार्स, किरमान, सीस्तान व बलोचिस्तान का भाग रहा और इस समय हुरमुज़गान प्रान्त का भाग है। 

 

फरूर बुज़ुर्ग द्वीप

कुछ खंडहर, बंजर हो जाने वाले खेत और कुएं , यह बताते हैं कि कभी इस द्वीप पर लोग रहते थे किंतु इस समय यह इस द्वीप पर कोई नहीं रहता बस कुछ सरकारी कर्मचारी ही इस द्वीप में अपना दायित्व निभा रहे हैं। इस द्वीप के पानी में मछलियां बहुत बड़ी संख्या में पायी जाती हैं इसी लिए मछुआरे इस द्वीप के आस पास खूब शिकार करते हैं। इस द्वीप में लोह की खदान भी है जहां लगभग पांच लाख टन लोहे का अनुमान लगाया गया है। द्वीप में एक दीपघर भी है।  फरूर बुज़ुर्ग भांति भांति के जीव जन्तुओं का भी ठिकानाह ै और इस द्वीप पर चील, तोते, गौरैया, बुलबुल, हुदहुद जैसे भांति भांति के पंछी रहते हैं। इसी तरह एक प्रकार की साही, छिपकली, सांप और बिच्छु की भी कई जातियां इस द्वीप में रहती हैं। इसके अलाला फरूर बुज़ुर्ग  और फरूर कूचेक ईरान के वह एकमात्र क्षेत्र हैं जहां पहाड़ी हिरन रहते हैं। 

फरूर बुज़ुर्ग 

फरूर बुज़ुर्ग  भूविज्ञान के अनुसार नमक का एक बड़ा गुंबद है जो भूतल में बदलाव के कारण, गहराई से उभर पर आया है और धरती का सीना चीरते हुए समुद्र तल से ऊपर निकल आया है। फरूर बुज़ुर्ग द्वीप वास्तव में ज्वालामुखी और तलछट से बना है और कुल मिलाकर पूरा द्वीप ही छोटे छोटे टीलों से बना है जिनके बीच बीच में दर्रे नज़र आते हैं। इस द्वीप की मिट्टी इन्ही दर्रों और घाटियों में मिलती है इसी तरह से द्वीप के दक्षिणी भाग में जहां कुछ समतल क्षेत्र है वहां भी मिट्टी मिल जाती है। द्वीप का अधिकांश भाग कंकरियाें से पटा है और दर्रों के बीच में मौजूद मिट्टी पानी के बहाव द्वारा लायी गयी है। इस द्वीप में पेड़ पौधे भी पाए जाते हैं लेकिन केवल उसी प्रकार के पेड़ पौधे हैं जो इस द्वीप के विशेष प्रकार के मौसम से अनुकूलता रखते हैं इस प्रकार के कुछ पेड़ पौधों को हालिया वर्षों में द्वीप पर लाया है। द्वीप के अधिकांश पौधे, " आकासिया" प्रकार से संबंध रखते हैं जो पूरे द्वीप पर फैले हुए हैं लेकिन घाटियों में वह अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत अधिक हैं। इसी प्रकार इस द्वीप में बबूल के पेड़ भी हें जो हालिया कुछ वर्षों से द्वीप में नज़र आने लगे हैं। 

फरूर में पेड़ पौधे

फरूरे कूचेक भी दक्षिणी ईरान के हुरमुज़गान प्रान्त का एक अन्य दर्शनीय स्थान है । यह दवीप फरूरे बुज़ुर्ग के दक्षिण में और सीरी द्वीप के उत्तर में स्थित है लेकिन इस द्वीप में भी आबादी नहीं है वैसे इस द्वीप में फरुरगान भी कहा जाता है। इस द्वीप का क्षेत्रफल एक दशमलव पांच वर्ग किलोमीटर है और इस द्वीप का सब से ऊंचा स्थान समुद्र तल से 36 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। द्वीप के सब से बड़े क्षेत्र की लंबाई व चौड़ाई चार दशलमव एक बटा एक दशमलव एक है। फरूरे कूचेक द्वीप और उसके तट, अपनी भौगोलिक स्थिति और पलायन कर्ता पंछियों के मार्ग में स्थित होने की वजह से , भांति भांति के स्थानीय व पलायनकर्ता पंछियों का केन्द्र भी हैं। इस क्षेत्र में  कुछ पेड़ पौधे, नमक वाली मिट्टी में  उगने वाले पौधे हैं और कुछ सूखे में उगने वाले हैं। यह द्वीप, अबूमूसा नगर से 36 और बंदर अब्बास से 149 नॉटिकल मील की दूरी पर स्थित है। 

फरूर, फार्स खाड़ी में मौजूद मूंगे के द्वीपों में एक बहुत ही अच्छा द्वीप है। फरूरे कूचेक द्वीप के रेतीले तट  हरे समुद्नी कछुओं" के लिए अंडा देने का सर्वश्रेष्ठ स्थल हैं। यह विशालकाय कछुए विशेष प्रकार के होते हैं। इसी तरह यह द्वीप सर्दियों के मौसम में समुद्री बाज़, केकड़ा खाने वाली टिटहरी, बगुला और अलकाग जैसे विलु्प्त हो रहे पंछियों का ठिकाना होता है। 

 

फरूर कूचेक द्वीप हरियाली की दृष्टि से अच्छा है और रूबीना, अंजीर, बेर, और ताड़ आदि के पेड़ द्वीप में मितली हैं। इस द्वीप में रूबीना के पेड़ वास्तव में द्वीप के पहाड़ी हिरनों की देन हैं। वास्तव में इस द्वीप में रहने वाले पहाड़ी हिरन  में एेसी विशेषता होती है जिसकी वजह से  रूबीना के बीज में उगने की क्षमता बहुत अधिक हो जाती है। इस द्वीप के पहाड़ी हिरन, जब रूबीना पेड़ के पत्तों को चबाते हैं तो उसके साथा उसके बीज भी उनके पेट में चले जाते हैं और जब उनके गोबर के साथ यह बीज बाहर निकलते हैं तो मिट्टी में पहुंचने के बाद वह बड़ी तेज़ी से पौधा बनते हैं और इस तरह से पूरे द्वीप पर नये नये पेड़ उगते रहते हैं। इसी लिए जिस क्षेत्र में इस प्रकार के हिरन रहते हैं वहां रूबीना पेड़, भारी संख्या में नज़र आते हैं।

फरूरे कूचेक द्वीप

अतीत में यह समझा जाता था कि इस द्वीप के मौजूद हिरन एक प्रकार के चिंकारा हिरन हैं जो ईरान के अन्य क्षेत्रों में भी पाए जाते हैं लेकिन महमूद करमी और कॅालिन ग्रेयूज़ नामक दो वैज्ञानिकों के अध्ययनों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह वास्तव में एक प्रकार के पहाड़ी हिरन हैं जो केवल इसी द्वीप में पाए जाते हैं। इस द्वीप के हिरनों को, उनकी खोज करने में बीजन फरहंग दर्रे शूरी, के अथक प्रयासों के कारण, " दर्रे शूरी, पहाड़ी हिरन कहा जाता है। 

 

यह द्वीप हिरन के शिकार के लिए बहुत अच्छी जगह है और चूंकि इस द्वीप के हिरन का शिकार करने वाला कोई जानवर द्वीप पर नहीं रहता इस लिए द्वीप की हरियाली को बचाए रखने और हिरनों की जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए कुछ हिरनों के शिकार की अनुमति दी जाती है। यही वजह है कि हर साल पर्यावरण विभाग कुछ हिरनों के शिकार का लाइसेंस जारी करता है। इस द्वीप में पहाड़ी हिरन के अलावा, कुछ और स्तनधारी पशु नहीं रहता किंतु पंछियोंं में बहुत विविधता है। समुद्री बाज़, समुद्री मैना, बुलबुल, केकड़ा खाने वाली टिटहरी,छोटा बाज़, हुदहुद, कव्वा आदि जैसे विभिन्न प्रकार के पंछी इस द्वीप पर देखे गये हैं। इन में से कुछ पंछी पूरे साल इसी द्वीप पर रहते हैं जबकि कुछ अन्य प्रकार के पंछी केवल सर्दियां गुज़ारने इस द्वीप की यात्रा करते हैं। विभिन्न प्रकार के ज़हरीले सांप और बिच्छु भी इस द्वीप में रहते हैं। 

टैग्स

कमेंट्स