Jan ०७, २०१९ १७:२८ Asia/Kolkata

आज के कार्यक्रम में हम आपको एसी ईरानी महिला से परिचित करायेंगे जो निशापुर की रहने वाली थीं और ख़ारज़्मी एवं सलजूकी दरबार की श्रेष्ठतम खगोलशास्त्री थीं।

उनके बारे में किताबों में आया है कि वह एसी महिला थीं जिन्हें ख़ारज़्मी शासकों के काल में गणित और खगोलशास्त्र के क्षेत्र में उच्चतम स्थान प्राप्त था और उनका नाम विश्व इतिहास में ईरानी गणितज्ञ और खगोलशास्त्री के रूप में दर्ज है।

 

बीबी मुनज्जेमा या नीशापुर की मुनज्जेमा के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। इस गणितज्ञ और खगोलशास्त्री ईरानी महिला का जन्म 600 हिजरी कमरी में खुरासान के नीशापुर नगर में एक सभ्य व शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम कमालुद्दीन सेमनानी था वह नीशापुर में शाफेई समुदाय के प्रमुख और सुल्तान मोहम्मद खारज़्मशाह के खगोलशास्त्री थे और बीबी मुनज्जेमा की माता खुरासान के प्रख्यात धर्मशास्त्री मोहम्मद बिन यहिया की पोती थीं। बीबी मुनज्जेमा के पिता खगोलशास्त्री थे और उन्होंने भी अपने पिता का रास्ता अपनाया और इस क्षेत्र में उन्हें इतनी ख्याति मिली कि सुल्तान जलालुद्दीन ख़ारज़्मशाह और उसके बाद अलाउद्दीन कैक़ोबाद जैसे शासकों के दरबार में उन्हें स्थान मिला। चूंकि उनके अंदर तारों की पहचान और घटनाओं की भविष्यवाणी करने की क्षमता मौजूद थी इसलिए वह सुल्तान ख़ारज्म के दरबार के निकटवर्ती लोगों में शामिल हो गयीं और बीबी मुनज्जेमा के नाम से मशहूर हो गयीं। बीबी मुनज्जेमा को खगोलशास्त्र में विशेष दक्षता प्राप्त थी और वह जन्मकुंडली में दक्ष थीं और तारों से संबंधित मामलों में कार्य करती थीं। उन्होंने खगोलशास्त्र की शिक्षा अपने पिता से हासिल की थी। इस संबंध में उन्होंने अपनी क्षमता का एसा प्रदर्शन किया कि उनकी गणना अपने समय के विद्वानों की पंक्ति में होने लगी। बीबी मुनज्जेमा न केवल खगोलशास्त्र में मशहूर थीं बल्कि उससे संबंधित दूसरे ज्ञानों में भी अपने चरम पर पहुंच गयी थीं। बीबी मुनज्जेमा के पति का नाम मजदुद्दीन मोहम्मद तरजुमान था। वह गुरगान क्षेत्र के जाने माने व्यक्ति थे। वह सुल्तान जलालुद्दीन ख़ारज्मशाह के दरबार के निकटवर्ती लोगों में थे। आरंभ में वह मुंशी के पद पर थे। बाद में जब वह सलजूकी दरबार में सेवा करने लगे तो उन्हें सलाहकार के रूप में चुन लिया गया। उसके पश्चात उन्हें अनुवादक के पद पर नियुक्त कर दिया गया और अनुवादक के रूप में ही वह विभिन्न शासकों के पास जाते थे।

जलालुद्दीन ख़ारज़्मशाह के निकट बीबी मुनज्जेमा को विशेष स्थान प्राप्त था। ख़ारज़्मी शासक खगोलशास्त्र को विशेष महत्व देते थे और अपने उन कार्यों में बीबी मुनज्जेमा से सलाह मशवेरा किया करते थे जिनका संबंध खगोलशास्त्र से होता था। कुछ एतिहासिक किताबों में यहां तक आया है कि जब मंगोलों से युद्ध हो रहा था तो कुछ समय तक बीबी मुनज्जेमा जलालुद्दीन शाह ख़ारज़्मशाह के साथ रणक्षेत्र में थीं और जब सलजूकी शासन श्रृंखला का कमालुद्दीन कामयार नामक शासक ख़ारज़्मशाह के पास गया तो वहां उसने बीबी मुनज्जेमा की प्रशंसा सुनी और सुल्तान सल्जूकी के पास लौटने पर उसने बीबी मुनज्जेमा के बारे में विस्तार से उसे बताया।

जलालुद्दीन ख़ारज़्मशाह को मंगोलों से युद्ध में पराजित होने के बाद उनका शासन भी समाप्त हो गया। कहा जाता है कि बीबी मुनज्जेमा ने अपनी एक भविष्यवाणी में सुल्ताल जलालुद्दीन को उसके भाई ग़यासुद्दीन के विश्वासघात से अवगत करा दिया था परंतु सुल्तान ने इस संबंध में बीबी मुनज्जेमा की बातों को कोई महत्व नहीं दिया और वह मंगोलों के साथ युद्ध में मारा गया। जलालुद्दीन ख़ारज़्मशाह के मारे जाने के बाद बीबी मुनज्जेमा अपने पति के साथ दमिश्क चली गयीं। उसकी वजह यह थी कि उस समय उनका कोई समर्थक नहीं था और दरबारी भी उनसे ईर्ष्या करते थे। चूंकि बीबी मुनज्जेमा एक मशहूर महिला थीं इस बात के दृष्टिगत उन्हें मलिक अशरफ मुज़फ्फरुद्दीन मूसा अय्यूबी के दरबार में स्थान दिया गया। सुल्तान अय्यूबी ने बीबी मुनज्जेमा और उनके परिवार को बड़ी गर्मजोशी व सम्मान के साथ स्वीकार किया। यह बात जब अलाउद्दीन कैकोबाद सुल्तान सल्जूकी को मालूम हुई तो उसने उनके पास एक दूत भेजा और सुल्तान अय्यूबी का आह्वान किया कि वह बीबी मुनज्जेमा और उनके परिवार को क़ूनिया भेज दे और अपने दरबार में उनके लिए विशेष स्थान को नज़र में रख लिया। जब सल्जूकियों और शामियों के मध्य लड़ाई हुई तो बीबी मुनज्जेमा ने खगोलशास्त्र के आधार पर इस युद्ध में सुल्तान अलाउद्दीन कैक़ोबाद की विजय की भविष्यवाणी कर दी और इस भविष्यवाणी के अनुसार सुल्तान अलाउद्दीन कैक़ोबाद की जीत के साथ युद्ध समाप्त हो गया। इसके बाद सुल्तान अलाउद्दीन कैक़ोबाद की नज़र में बीबी मुनज्जेमा का महत्व कई बराबर हो गया और उन्हें सुल्तानी का विशेष मूल्यवान वस्त्र दिया गया।  बीबी मुनज्जेमा के कहने पर सुल्तान अलाउद्दीन कैक़ोबाद ने उनके पति मजदुद्दीन मोहम्मद को राजदरबार का विशेष पद और तरजुमान की उपाधि से सम्मानित किया और जीवन के अंत तक उन्होंने इसी पद पर रहकर सल्जूकी शासक की सेवा की और यात्रा एवं ग़ैर यात्रा में सुल्तान के साथ रहते थे। 679 हिजरी कमरी में बीबी मुनज्जेमा का निधन हो गया और दमिश्क में उन्हें दफ्न कर दिया।

 

बीबी मुनज्जेमा के बेटे का नाम नासिरुद्दीन हुसैन था। चूंकि बीबी बहुत मशहूर महिला थीं इसलिए उनके बेटे को इब्ने बीबी कहा जाने लगा और वह लघु एशिया में सल्जूकियों के अंतिम शासक के समय में था। इब्ने बीबी की गणना सल्जूकी दरबार में महत्वपूर्ण लोगों में होती थी और अपने पिता के निधन के बाद उसे गवर्नर बना दिया गया। इसी प्रकार इब्ने बीबी को दीवाने तफ़रा का पद दिया गया। सल्जूकी तफ़रा उस पद कहते हैं जिस पर रहने वाला व्यक्ति वही लिखता था जिस चीज़ को लिखने के लिए उससे कहा जाता था और सल्जूकी शासन की मोहर भी उसके पास रहती थी। इसी प्रकार इब्ने बीबी अमीर नासिरुद्दीन हुसैन को एक इतिहासकार और सातवीं हिजरी क़मरी का एक महत्वपूर्ण लेखक समझा जाता है। उसने फार्सी भाषा में एक किताब लिखी है जो “तारीख़े इब्ने बीबी” के नाम से मशहूर है और यह किताब सल्जूकी शासकों का इतिहास समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।  इब्ने बीबी ने अलाउद्दीन अतामुल्क जुवैनी के कहने पर यह किताब लिखी है और उसका नाम "अलाउद्दीन कैक़ोबाद अव्वल" रखा और वह चाहते थे कि जुवैनी की सीमा विस्तार के बारे में जो किताब है उनकी किताब उसका पूरक हो। यह किताब 680 हिजरी कमरी के आरंभ में पूरी हो गयी और उसमें 588 से 679 हिजरी कमरी के मध्य की घटनाओं का वर्णन है। इब्ने बीबी के काल में ही एक व्यक्ति ने उनकी किताब का सारांश लिखा। समकालीन शोधकर्ता अब्बास इक़बाल आश्तियानी इब्ने बीबी की किताब की गणना जुवैनी की "जहान गुशाई" जैसी महत्वपूर्ण इतिहासिक पुस्तकों में करते और कहते हैं" इब्ने बीबी की मूल किताब नहीं है और चूंकि यह किताब काफी विस्तृत व मुश्किल थी इसलिए बाद में एक व्यक्ति ने इस किताब को संक्षेप और सादी भाषा में लिखा और इसे "सल्जूक नामे" का नाम दिया और इस किताब को सल्जूकियों का इतिहास जानने का महत्वपूर्ण स्रोत समझा जाता है। इस किताब के महत्वपूर्ण भागों का संबंध कैक़ोबाद प्रथम और उसके उत्तराधिकारियों के काल से है और इस किताब को लिखने वाला उस काल में था। चूंकि उस किताब के लेखक का संबंध दरबार से था इसलिए वह निष्पक्ष नहीं रह सका। बीबी मुनज्जेमा के जीवन के बारे में जो अधिकांश जानकारियां हैं वह इसी किताब से ली गयी है।

 

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