फ़्रांसीसी लेखक विक्टर ह्यूगो कहते है, “वह व्यक्ति सौभाग्यशाली है जिसके पास इन दो चीज़ों में से कोई एक हो।

 अच्छी किताब या ऐसे दोस्त जिन्हें किताब पढ़ने का शौक़ हो।”

 

 

आज की कड़ी में जवानों के बीच किताब पढ़ने की अहमियत के बारे में चर्चा करेंगे। प्रसिद्ध ब्रितानी ड्रामालेखक शेक्सपियर का मानना है कि किताब, इंसान का सबसे बड़ा आविष्कार है। उनका मानना है कि किताब से बड़ा अभी तक कोई भी आविष्कार वजूद में नहीं आया है किन्तु हमारा किताब के साथ कैसा व्यवहार है? क्या हमारे जवान, इंसान के इस सबसे बड़े आविष्कार से निकट संपर्क रखते हैं।

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि किताब ज्ञान व आत्मज्ञान की आश्चर्यजनक दुनिया की ओर झांकने की खिड़की है और अध्ययन, इंसान को ईश्वर की ओर से दी गयी क्षमताओं को निखारने के लिए बहुत सरल व वैज्ञानिक मार्ग है ताकि उसका परिपूर्णतः की ओर मार्गदर्शन हो सके।

 

 

इस संदर्भ में रूसी लेखक लियो टोल्सटॉय का मानना है कि दुनिया में कोई भी आनंद, अध्ययन से मिलने वाले आनंद की बराबरी नहीं कर सकता। अगर जवानों में अध्ययन की आदत पड़ जाए तो ज्ञान व जागरुकता से उनका संपर्क मुश्किल नहीं होगा और वे अध्ययन के ज़रिए बिना किसी रुकावट के सृष्टि के बारे में अपनी समझ व विचार को विकसित कर सकते हैं।

किताब ऐसी चीज़ है जिसका स्थान कोई चीज़ नहीं ले सकती। किताब विगत से वर्तमान और वर्तमान से भविष्य तक इंसान के वैचारिक विकास में बहुत प्रभावी रही है। अपनी ज़रूरत व रूचि की किताबों के अध्ययन से बहुत ही रोचक जगत में पहुंचा जा सकता है। इसी प्रकार अपने विचारों को दिशा देकर उद्देश्य तक पहुंचा जा सकता है।

 

 

किताब के अध्ययन के विशाल जगत पर किसी विशेष गुट का अधिकार नहीं है बल्कि हर व्यक्ति को किताब के साथ ज़िन्दगी गुज़ारनी चाहिए। किताब का अध्ययन आम लोगों के बीच दैनिक ज़रूरत के रूप में प्रचलित होना चाहिए। किताब के अध्ययन के संबंध में यह बिन्दु भी बहुत महत्वपूर्ण है कि इंसान को जवानी में किताब के अध्ययन की रूचि पैदा करनी चाहिए ताकि यह भावना हमेशा बाक़ी रहे। जवान में परिपूर्णतः की ओर बढ़ने की भावना होती है। उसे ठहराव पसंद नहीं होता। वह हमेशा एक क़दम आगे बढ़ने के बारे में सोचता है। इसलिए उसे ज़िन्दगी के क्षेत्रों में प्रगति के लिए ख़ुद को और समाज को पूरी तरह समझने की ज़रूरत होती है। इसी प्रकार उसे विगत और भविष्य के बीच संबंध स्थापित करना होता है। इसलिए हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया, “जिसे किताब से शांति मिले, उसका सुख-चैन नहीं छिन सकता।”

 

 

पूरी दुनिया के लिए आए इस्लाम का किताब से चोली-दामन का साथ है। इस्लाम का चमत्कार पवित्र क़ुरआन है जिसमें लोगों को किताब के अध्ययन के लिए प्रेरित किया गया है। इस्लाम के पवित्र सिद्धांतों में ज्ञान को मानव समाज के विकास व परिपूर्तणा का कारक बताया गया है। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम का कथन है, “जो व्यक्ति दुनिया चाहता उसे ज्ञान हासिल करना चाहिए और जो व्यक्ति परलोक चाहता है उसे ज्ञान हासिल करना चाहिए और जिसे लोक-परलोक दोनों चाहिए उसके लिए भी ज्ञान हासिल करने के सिवा कोई और रास्ता नहीं है।”

 

 

अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि अध्ययन में रूचि, बच्चे के बचपन से जुड़ी होती है। शोध से पता चलता है कि जो लोग अध्ययन करते हैं वे अपनी ज़िन्दगी में अधिक संतोष का आभास करते हैं और वे जवानी में बहुत कम संकट में घिरते हैं। चूंकि विभिन्न प्रकार की किताबों के अध्ययन से वे विभिन्न जगत की खोज करते हैं और नए माहौल में सैर करते हैं इसलिए उनमें समस्याओं से निपटने के लिए धैर्य की शक्ति ज़्यादा होती है। जिन लोगों को तनाव रहता है उन्हें किताब का ज़्यादा से ज़्यादा अध्ययन करने का सुझाव दिया जाता है क्योंकि अध्ययन के वक़्त मन को कम अहमियत के विषयों के बारे में सोचने का समय नहीं मिलता।

 

 

नौजवानी के दौर में शारीरिक व मानसिक बदलाव के मद्देनज़र, नौजवान का मन बहुत से कम महत्वपूर्ण मामलों में उलझा रहता है। इसी प्रकार वह बहुत से मानसिक तनाव में ग्रस्त रहता है। यही कारण है कि अध्ययनकर्ताओं का मानना है कि बच्चें में बचपन से किताब में रूचि पैदा करनी चाहिए ताकि अध्ययन की आदत नौजवानी और जवानी में मुश्किलों के सामने उनकी मदद कर सके। अध्ययन मन का एक प्रकार का अभ्यास है। जिनका मन स्वस्थ व शांत होता है उनका शरीर भी स्वस्थ होता है। शांत मन, जवान को समस्याओं के वक़्त तर्कपूर्ण शैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। अध्ययन की आदत से जवान में नकारात्मक विचार ख़त्म हो जाते हैं। ताज़ा शोध दर्शाते हैं कि जिन लोगों को अध्ययन की आदत होती है, उन्हें अध्ययन न करने वालों की तुलना में अच्छी नींद आती है।

 

 

इसलिए यह बात अहम है कि नौजवानों को सार्थक विषयों वाली किताब दी जाए ताकि भ्रष्ट न हों। किताब, इंसान की ज़िन्दगी का वास्तविक चित्रण करती है कि किस प्रकार लोगों ने मुसीबतों के बावजूद बहुत ऊंचा स्थान हासिल किया। अच्छी किताब जवान के मन को मज़बूत करती है। उसमें आत्म-विश्वास बढ़ाती है। किताब के अध्ययन से जवान विभिन्न हस्तियों और उनकी ज़िन्दगी के उतार चढ़ाव से अवगत होता है। वह कहानियों में निहित शिक्षाप्रद बिन्दुओं और ऐतिहासिक हस्तियों की ज़िन्दगी को आदर्श बनाकर ज़िन्दगी जीने का ढंग सीखता है। हज़रत अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं, “नौजवानों को ऐसी चीज़ें सीखनी चाहिए जो उन्हें व्यस्कता के दौर में काम आए।” इंसान को सुखी ज़िन्दगी के लिए जागरुकता व पहचान की ज़रूरत होती है और जो चीज़ें उसने बचपन व नौजवानी के दौर में सीखी होती हैं वे ही व्यक्तिगत जीवन के लिए पृष्ठिभूमि बनती हैं। जवानों को भविष्य के सुखी जीवन को आज याद करना चाहिए और इस मार्ग में किताब का अध्ययन उस चिराग़ की तरह है जो उनके रास्ते में रखा हो।

 

 

कभी कभी मां-बाप विभिन्न मामलों की सही समझ न होने के कारण नौजवान या जवान के लिए अच्छे मार्गदर्शक नहीं बन पाते। इसलिए मुमकिन है बहुत सी चीज़ों को सही समझाने में कुछ कमियां रह गयी हों या उन्हें उन बातों को बताने के लिए उचित मौक़ा न मिला हो। धार्मिक किताबों के अध्ययन से एक नौजवान उन बातों को सही तरह समझ सकता है जो उसके बालिग़ होने के वक़्त मदद कर सकती हैं। अलबत्ता उचित किताब का चयन और उसके अध्ययन की शैली एक संवेदनशील विषय है जिसके लिए जानकार लोगों के मार्गदर्शन की ज़रूरत होती है।

 

 

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई, जवानों में किताब के अध्ययन में रूचि के बारे में कहते हैं, “हमें जवानों में किताब पढ़ने की आदत डालनी चाहिए, बच्चों में किताब पढ़ने की आदत डालें क्योंकि यह आदत इंसान की उम्र भर बाक़ी रहेगी। मेरी उम्र में किताब के अध्ययन का असर अधिकतर जवानों और आप उपस्थित प्रियजन की उम्र में अध्ययन की तुलना में कम होता है। इंसान पर कम उम्र में किताब पढ़ने का असर हमेशा रहता है। आपके जवान, आपके बच्चे जितना हो सके किताब पढ़ें, विभिन्न विषयों के बारे में ज्ञान रखें। अलबत्ता इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि किताब पढ़ते वक़्त बेकार की किताबों में रूचि न लें। अलबत्ता यह ऐसा विषय है जिसके कई आयाम हैं। सबसे अहम बात यह है कि किताब पढ़ने की आदत पड़े। इस संदर्भ में विभिन्न तंत्रों को भी सावधान रहना चाहिए। लोगों को अच्छी किताब के बारे में बताना चाहिए ताकि बुरी किताबों में ज़िन्दगी बर्बाद न हो।”

 

 

एक अहम बिन्दु जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत है वह मौजूदा दौर में सोशल मीडिया का विस्तार है। मौजूदा नौजवान पीढ़ी बहुत ऊर्जावान है। इस पीढ़ी के अनुकूल उपकरण व प्रौद्योगिकी का चयन होना चाहिए। संगीत, फ़िल्म, किताब, और इंटरनेट पर लिखित बातों की सामाजिक दृष्टि से अध्ययन से पता चलता है कि जवान, कम से कम वक़्त में ज़्यादा जानकारी हासिल करना चाहता है। इसका यह अर्थ है कि जितना कम समय में ज़्यादा जानकारी किसी व्यक्ति को देंगे उसके लिए वह चीज़ उतनी ही रोचक होगी। ज़रूरत इस बात की है कि इन बिन्दुओं पर ध्यान और जवान का साइबर स्पेस से सही ढंग से फ़ायदा उठाने की ओर मार्गदर्शन करके, उसमें किताब के अध्ययन की भावना दुगूनी करनी चाहिए।

Apr ११, २०१६ १३:३१ Asia/Kolkata
कमेंट्स