आज इंटरनेट, आधुनिकतम डिज़िटल सिस्टम और संपर्क के दूसरे उपकरण सूचनाओं एवं संस्कृति के आदान- प्रदान के महत्वपूर्ण साधन हैं और जवानों के व्यक्तित्व के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

कहा जा सकता है कि आधुनिकतम संचार माध्यम जीवन के अभिन्न व अटूट अंग में परिवर्तित हो गये हैं इस प्रकार से कि कभी उनके बिना कार्य को अंजाम देना संभव ही नहीं है।

इन संचार माध्यमों में से एक मोबाइल फोन है जो हमारे व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक जीवन की एक आवश्यकता बन गया है और यह लोगों की दिनचर्या में बहुत से विभिन्न परिवर्तनों का कारण बना है। इस मध्य सबसे अधिक जवान हैं जो अपने जीवन में तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं।

 

 

इंटरनेट का आकर्षण भी इस बात का कारण बना है कि बहुत से जवान एवं नौजवान अपनी उम्र के दूसरे जवानों और माता-पिता से बात –चीत करने के बजाये कम्प्यूटर से व्यस्त रहने को प्राथमिकता देते हैं। कम्प्यूटर के साथ समय गुज़ारना इस बात का कारण बनता है धीरे- 2 वह माता-पिता और दूसरों के साथ रहने की मिठास को इंसान से ले लेता है और उसे अलग-थलग कर देता है। इंटरनेट एक ऐसी चीज़ है जिसके बहुत से लाभ हैं यद्यपि उसके नुकसान भी हैं परंतु कुल मिलाकर यह नहीं कहा जा सकता है उसके केवल नुकसान ही हैं बल्कि इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि किस तरह से उससे सही लाभ उठाया जाये। दूसरे शब्दों में अगर हर चीज़ से सही तरह लाभ उठाया जाये तो अच्छा व लाभदायक परिणाम प्राप्त होगा।

समाजशास्त्री जाफर बाई कहते हैं जो लोग नशेड़ी लोगों की भांति इंटरनेट का प्रयोग करते हैं वे सामाजिक कार्यों और पढ़ाई- लिखाई में अधिक अकेलेपन का शिकार होते हैं और दिन –प्रतिदिन उनके और लोगों के मध्य संपर्क का दायरा कम होता जाता है।“ वह आंखों की रोशनी के कम होने और कमर झुक जाने जैसे प्रभावों को कंप्यूटर गेमों का नकारात्मक परिणाम मानते हैं जो वैचारिक एवं मानसिक नुकसान के साथ जवानों को पहुंचता है।

 

 

वास्तविकता यह है कि हालिया वर्षों में इंटरनेट और मोबाइल फोन जैसे सूचना व संपर्क के उपकरणों के जवानों के जीवन में आ जाने से उनकी सोच, पहचान और उनकी जीवन शैली पर बहुत प्रभाव पड़ा है। यद्यपि इन उपकरणों के कारणों अतीत की अपेक्षा इस समय लोगों के मध्य संपर्क बहुत आसान हो गये हैं और जवानों को यह संभावना देते हैं कि वे नये और भिन्न संबंधों का अनुभव करें परंतु इन आधुनिक उपकरणों के जो परिणाम हैं उनका इंकार नहीं किया जा सकता और इन उपकरणों के माध्यम से जो संबंध स्थापित होते हैं वे दूसरों विशेषकर लड़की-लड़कों के संबंधों में विशेष भूमिका निभाते हैं।

 

चेट और मैसेज इंटरनेटर तथा मोबाइल की सेवाओं में से दो ऐसी सेवाएं हैं जो जवानों के मध्य अधिक लोकप्रिय हैं। यह दो ऐसी चीज़ें हैं जिनसे बहुत तेज़ और सरल ढंग से संबंध स्थापित हो जाते हैं परंतु इन चीज़ों के ग़लत व अनुचित प्रयोग से जवानों को अपूर्णीय क्षति पहुंच रही है।

 

रामीन एक जवान है जो चेट से मानसिक आघात पहुंचने के बाद आत्म हत्या करता है। वह कहता है इंटरनेट का प्रयोग और चेट करके एक लड़की से प्रेम करने लगता है। कुछ महीने नहीं गुज़रा था कि मैं समझ गया कि वह मुझसे प्रेम नहीं करती है और यह चीज़ मेरे मानसिक दबाव का कारण बनी इस प्रकार से कि मैंने आत्म हत्या करने का फैसला किया परंतु अपने घर वालों की सहायता से मेरी हालत बेहतर हो गयी परंतु मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि इंटरनेट की उपयोगिता बहुत अधिक होने के साथ­- साथ वह बहुत खतरनाक हो सकता है।

सेटेलाइट भी आज की एक तकनीक है। आरंभ में प्रतीत यह होता है कि सेटेलाइट किसी प्रकार की शर्त के बिना वांछित व अच्छी चीज़ है और पूरी दुनिया को एक गांव में परिवर्तित होने के लिए वह आवश्यक है परंतु कुछ वर्षों के अनुभव से ज्ञात हो गया कि सांस्कृतिक दृष्टि से इसके कुछ दुष्परिणाम समस्याजनक हैं। लेखक और सामाजिक टिप्पणीकर्ता एल्विन टाफलर लिखते हैं” सेटेलाइट की तकनीक और दूसरे नये संचार माध्यम राष्ट्रीय संस्कृतियों को नष्ट कर रहे हैं और यह अस्थाई संबंध राष्ट्रीय पहचान के लिए चुनौती है और सरकारें अपने व्यक्तिगत हितों के लिए उन्हें सुरक्षित और प्रकाशित करने के प्रयास में हैं। सेटेलाइट के कार्यक्रम नैतिक एवं सामाजिक बुराइयों की भूमि प्रशस्त करते हैं और आज की पीढ़ी के लिए लाभदायक होने से कहीं अधिक लोगों के लिए खतरनाक एवं हानिकारक हैं।

 

 

एक समाजशास्त्री कहता है सेटेलाइट के वैज्ञानिक एवं शिक्षाप्रद कार्यक्रम भी होते हैं परंतु आज अधिकांश जवान वैज्ञानिक कार्यक्रमों के लिए सेटेलाइट का चयन नहीं करते हैं और वे अधिकतर मनोरंजन और सामाजिक कार्यक्रमों के प्रति रुचि रखते हैं जो मुख्य रूप से धोखा देने और गुमराह करने वाले होते हैं। वास्तव में वे अश्लील कार्यक्रमों के कारण सेटेलाइट का प्रयोग करते हैं कि इन कार्यक्रमों में जवान वर्ग के लिए गुमराह होने और नैतिक पतन की संभावना बहुत अधिक है।

 

इस बात को ध्यान में रखना चाहिये कि जवानी और नवजौवानी नई चीज़ जानने और परिवर्तन का दौर है। यह ऐसा दौर होता है जिसमें जवान व नवजवान को नई- नई आवश्यकताओं का सामना होता है। इन आवश्यकताओं में से एक महत्वपूर्ण आवश्यकता पहचान एवं व्यक्तित्व की है और यह वह आवश्यकता है जिसकी बचपने में आवश्यकता नहीं होती है। व्यक्तित्व के गठन की आवश्यकता नवजवानी के सालों से विशेष है और इन वर्षों में जवान व नवजवान मूल्यों व आस्थाओं के मध्य गहरा व टिकाऊ संबंध स्थापित करने के प्रयास में होता है। वे मूल्य जवानी एवं नवजवानी में अपनी उपयोगिता खो बैठते हैं जो बचपने में बच्चे के व्यक्तित्व में स्थाइत्व एवं संतुलन का कारण बनते हैं। युवाकाल में जवान ऐसे मूल्यों की खोज मे रहते हैं जिसके आधार पर वे अपने व्यक्तित्व को परिपूर्ण बना सकें और अपनी नयी आवश्यकताओं का उत्तर दे सकें। अगर जवान इस दौर को सफलता के साथ न गुज़ार सकें तो उन्हें अपनी पहचान सहित विभिन्न संकटों का सामना होगा। इस प्रकार नयी-2 तकनीक के काल में सबसे जल्दी किसी चीज़ को स्वीकार करने वाले जहां जवान हैं वहीं वे जानकारी एवं ज्ञान के अवसर का लाभ उठाकर वैज्ञानिक मैदानों में अग्रणी की भूमिका भी निभा सकते हैं या फिर वे पश्चिम की संस्कृति से प्रभावित होकर अपनी पहचान के संकट का सामना करें।

 

 

वास्तव में संचार माध्यम भी दूसरे आविष्कारों की भांति इंसानों के लाभ उठाने के लिए बनाये गये हैं। इस बीच इंसान की भिन्नाभिन्न और दिन- प्रतिदिन बढ़ती आवश्यकता इस बात का कारण बनी है कि इंसान संचार माध्यमों की गुणवत्ता में वृद्धि करे। संचार माध्यमों से किताब, पत्रिका, रेडियो, टेलीविज़न,सेटेलाइट और इंटरनेट की भांति दो प्रकार से लाभ उठाया जा सकता है। संचार माध्यमों का एक लाभ यह है कि उनसे उस तरह से लाभ उठाया जा सकता है जैसे हितैषी चिकित्सक के हाथ में चाकू होता है जबकि संचार माध्यमों का दूसरा प्रयोग यह है कि उनसे हत्यारे इंसान के हाथ में चाकू की भांति लाभ उठाया जा सकता है। जानकारी में वृद्धि के लिए संचार माध्यमों की उपयोगिता से हटकर इस समय संचार माध्यम अनैतिक चीज़ों के प्रचार के साधन में परिवर्तित हो गये हैं यहां तक कि आज उन्हें विश्व संकट के रूप में याद किया जा रहा है। यह ख़तरनाक स्थिति इस बात का कारण बनी है कि बहुत से समाजशास्त्री और सांस्कृतिक मामलों के विशेषज्ञ मानव समाज विशेषकर परिवार को संचार माध्यमों के विनाशकारी व अनैतिक कार्यक्रमों से बचाने के बारे में सोच-विचार करें।

 

 

धर्म और धार्मिक विश्वास इस्लामी समाज के जवानों की पहचान के एक स्रोत हैं जो जवानों में धार्मिक पहचान उत्पन्न करते हैं और आज उन्हें संचार माध्यमों और जानकारी के साधनों द्वारा पश्चिम के सांस्कृतिक हमले के गम्भीर ख़तरे का सामना है। इसी प्रकार धर्म और धार्मिक विश्वासों को जवानों की उपेक्षा के ख़तरे का भी सामना है। नये संचार माध्यमों की जो विशेषता है वह समय और स्थान की सीमितता को कम होने का कारण बनी है और उनके संदेश का कार्य क्षेत्र विस्तृत हो गया है और वे आभास, जानकारी व पहचान और धार्मिक व्यवहार में जवानों को प्रभावित कर रहे हैं। आज के जवान आधुनिक तकनीक के प्रकाश में समस्याओं के संबंध में नया दृष्टिकोण रखना और अधिक जानकारी के साथ अपनी धार्मिक पहचान को स्वरुप देना चाहते हैं। वे विभिन्न दृष्टिकोणों को जानना चाहते हैं और उनके मध्य अपनी पहचान को ढूंढ़ना चाहते हैं परंतु गुमराह करने वाले विचारों के हमलों के कारण उनका व्यक्तित्व और उनकी असली पहचान समाप्त हो रही है और वे खोखलेपन का शिकार हो रहे हैं।

अतीत में परिवार पहचान के महत्वपूर्ण केन्द्र होते थे और लोग आसानी से अपनी पहचान को अपने परिवार में ढूंढ़ते थे और समाज में अपने स्थान को स्वीकार करते थे परंतु आज सेटेलाइट के आ जाने और उसमें जो कार्यक्रम दिखाये जाते हैं उसके दृष्टिगत परिवार भी धार्मिक मूल्यों को आदर्श के रूप में दिखाने में अपनी क्षमता खो बैठे हैं। कुछ विशेषज्ञ संतान के प्रति परिवारों की उपेक्षा और उनके साथ किस प्रकार का संबंध होना चाहिये इस पर ध्यान न दिये जाने को इस कमज़ोरी का कारण मानते हैं।

 

 

इस समय आवश्यकता इस बात की है कि परिवार एक बार फिर अपनी संतान के साथ अपने संबंधों को मज़बूत करें और अपनी संतान व जवानों को सही व ग़लत जानकारियों के मध्य उन्हें उनकी हाल पर न छोड़ें। 

Apr ११, २०१६ १३:३८ Asia/Kolkata
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