Aug १४, २०१९ १६:२० Asia/Kolkata

पिछले कार्यक्रमों  में हम ने कुछ ऐसी इमारतों पर चर्चा की थी कि जहां शासक और राजा रहा करते थे।

इन इमारतों को नगर के भीतर, अर्ग, कहा जाता था जबकि शहर से बाहर इस प्रकार की इमारतों को क़िला कहा जाता था। वैसे कभी कभी क़िलों में आम लोग भी रहते थे। क़िलों में प्रायः सरकारी विभाग आदि होते थे। ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार के क़िलों के अवशेष, बहुत अधिक मिलते हैं।  पिछले कार्यक्रम में हमने आप को ईरान के प्रसिद्ध क़िले अलमूत के बारे में बताया था जो तेहरान के निकट क़ज़वीन नगर के पास स्थित है। 

 

ईरान की राजधानी तेहरान से  एक हज़ार किलोमीटर की दूरी पर ईरान का एक ऐसा शहर है जिसे खजूर के पेड़ों और कच्ची ईंट से बने एक क़िले की वजह से बहुत मशहूर है। बम नामक इस शहर के एक टीले में बम दुर्ग बना है। बम क़िला, दुनिया में कच्ची ईंटों से बनी सब से बड़ी इमारत है जिसे एक टीले पर बनाया गया है। बम नगर, ईरान के प्रसिद्ध नगर, किरमान के निकट स्थित है, अर्गे बम, प्राचीन एतिहासिक इमारतों के समूह के बीचो बीच में स्थित है। इन इमारतों का इतिहास तीन हज़ार साल पुराना है। यह इमारतें, बम नगर के उत्तर में स्थित हैं।  आरंभिक इस्लामी काल से संबंधित भी कई इतिहासिक अवशेष, इस नगर में जगह जगह नज़र आते हैं। इतिहास के अनुसार, बम क़िला,  इस्फंदयार के पुत्र बहमन से संबंधित बताया जाता है जो हखामनी काल के शासक थे। पुरातत्व विदों के अनुसार इस क़िले की प्राचीनता की, अध्ययनों द्वारा पुष्टि हो चुकी है। इस क़िले के निर्माण की तारीख, पांचवी सदी ईसापूर्व है और उन्नीसवीं सदी के आरंभिक पचास वर्षों तक इस क़िले में लोग रहते थे।

 

बम क़िले का क्षेत्रफल, दो लाख वर्गमीटर है और इसके दो भाग हैं। एक भाग, शासकों के लिए था और दूसरे भाग में प्रजा रहती थी। क़िले के उत्तरी भाग में एक गुंबदवाली इमारत, ध्यान अपनी ओर खींचती है। यह इमारत वास्तव में गर्मियों में पानी के भंडारण के लिए इस्तेमाल की जाती थी। चार मौसमी, राजा का आवास, कुंआ, हम्माम, सैनिक घर और सासानी दरवाज़ा, बम क़िले के महत्वपूर्ण भाग हैं। शासकों का आवास पत्थर के खंभों पर थोड़ा ऊंचाई पर बनाया गया है जिसपर गारे का लेप लगाया गया है। शासकों के आवास के चारों ओर 38 बुर्जियों के साथ दीवार खींची गयी है और इस में केवल एक द्वार है जो प्रजा के घरों के पास दक्षिणी ओर स्थित है। इस भाग में , द्वार, बाज़ार, मस्जिद, अखाड़ा, क़ब्रिस्तान, हम्माम, स्कूल और अस्तबल भी है। बम क़िले के आवासीय भाग में लगभग 400 घर हैं जिन्हें टेढ़ी मेढ़ी गलियां एक दूसरे से जोड़ती हैं। आम जनता के रहने के स्थान को भी एक दीवार से घेरा गया है और दोनों भागों के बीच एक दरवाज़ा है।  आवासीय भाग में घरों को समतल भूमि पर बनाया गया है और नगर निर्माण की दृष्टि से एक नगर के लिए ज़रूरी हर चीज़ वहां मौजूद है। कुछ घर, बेहद लंबे चौड़े हैं जहां कई आंगन, हवा खाने का विशेष स्थल, अतिथि ग्रह, सर्दी और गर्मी के अलग अलग कमरे और कुआ आदि हैं। लगभग हर घर दूसरे घर से जुड़ा है और कुछ घरों में विशेष रूप से हम्माम भी बना है। रोटी की दुकान, तेल निकालने का कमरा और कपड़े की दुकानों के अवशेष भी नज़र आते हैं।

 

 बम क़िला चूंकि पूरब से पश्चिम जाने वाले मार्ग पर स्थित है इस लिए यह हमेशा से अत्याधिक महत्वपूर्ण रहा है। इस क़िले में होने वाली सब से ताज़ा एतिहासिक घटना, क़िले के शासक, मुहम्मद अली खान ज़ाबुली द्वारा, लुत्फअली खान ज़ंद की गिरफ्तारी थी। बम के क़िले को बहुत पहले ही यूनिस्को ने अंतरराष्ट्रीय धरोहर के रूप में पंजीकृत किया है और हर साल हज़ारों देशी व विदेशी पर्यकट इस क़िले को देखने जाते हैं। 26 दिसंबर सन 2004 में इस इलाक़े में भीषण भूकंप आया जिसकी वजह से इस शानदार इतिहासिक इमारत को काफी नुक़सान पहुंचा। इस समय इस इमारत की मरम्मत का काम हो रहा है ताकि उसे यथासंभव पहले जैसा बनाया जा सके।

 

पिछली शताब्दियों में ईरान के सभी नगरों में क़िले हुआ करते थे। शीराज़ नगर तो लंबे समय तक ईरानी शासकों की राजधानी रहा है इसी लिए इस नगर के मध्य में भी करीमखान का क़िला स्थित है जो शाही महल और सैनिकों के रहने की जगह थी। करीम खान फार्स क्षेत्र के शासक थे और सन 1766 ईसवी में उन्होंने इस किले के निर्माण का आदेश दिया था। उन्होंने ईरान में जंद शासन श्रंखला की नींव रखी थी। करीम खान ने क़िला बनाने के लिए उस समय के अत्याधिक दक्ष शिल्पकारों और पत्थर तराशने वालों को शीराज़ बुलाया और उन्हें दक्ष मज़दूर और मसाले दिये ताकि इस क़िले का निर्माण अच्छी तरह से हो सके।

 

करीमखान का क़िला , शीराज़ नगर की सब से अधिक महत्वपूर्ण इमारत है। इस क़िले के तीन भाग हैं। राजनीतिक, आर्थिक और सैनिक। करीमखान क़िले का निर्माण कुछ इस प्रकार से किया गया है कि जिससे उसे रहने और सैन्य उद्देश्यों के लिए भी प्रयोग किया जा सके। क़िले को बेहद सुरक्षित बनाया गया है। इस क़िले को बाहर से देख कर भय और कठोरता का आभास होता है किंतु अंदर जाने के बाद यह नज़र आता है कि इसे अत्याधिक सूक्ष्मता और कलात्मक तरीक़े से बनाया है।

 

करीमखान क़िले के निर्माण में मुख्य रूप से पत्थर और ईंटों का प्रयोग किया गया है। क़िले के चारों ओर ऊंची दीवार है जिसकी वजह से वह एक सैनिक क़िला लगता है। यह क़िला आयाताकार है और 15-15 मीटर के चार बुर्ज, उसके चारों कोनों पर बनाए गये हैं। क़िले के अंदर बड़ी बड़ी दालानें, कमरों और कक्षों के सामने बनी हुई हैं जिसके सामने मज़बूती से खड़े पत्थर के खंभे नज़र आते हैं। हर दालान  के सामने चौकोर, हौज़ भी है जो जंदिया काल की शिल्पकला का प्रतीक है। क़िले का प्रवेश द्वार, पूर्वी भाग में स्थित है और मुख्य द्वार के ऊपर, सतरंगी, टाइलों की मदद से रुस्तम और सफेद दानव के युद्ध का चित्रण किया गया है। क़िले की दीवारों और उसकी नींव को, पक्की ईंटों से बनाया गया है। खिड़कियों के फ्रेम यज़्द के मरमर के पत्थर से बनाये गये हैं जबकि शीशे से की जाने वाली तथा अन्य प्रकार की सजावट के साधनों को रूस और तुर्की से लाया गया है। क़िले के कमरों और उनकी छतों को अत्याधिक सुदंर चित्रों और डिज़ाइनों से सजाया गया है। इन चित्रों को सोने के पानी और विभिन्न रंगों से सजाया गया है। डिज़ाइनों में अधिकतर फूल पत्ती नज़र आती है तथा सजावट की शैली, अरबस्क है जो इस्लामी शैली होती है जिसकी वजह से कमरे के भीतर बाग जैसा वातावरण पैदा हो जाता है। कमरों की दीवारों और खिड़कियों को जालीदार बनाया गया है जिसमें रंग बिरंगे शीशे लगे हुए हैं। क़िले में बने हुए हालों पर दो दो छतें हैं एक मुख्य छत है जो ऊंची है और उसे चूने के काम से अच्छी तरह से सजाया गया है।

 

दूसरी कृत्रिम छत है जो संभावित रूप से बाद में कमरों की छत नीचे करने के लिए बनाया गया है। उसको सजाने के लिए सोने, पारे और सेनाबर का प्रयोग किया गया है और उसकी सजावट की शैली, सफवी काल की चित्रकला से मिलती जुलती है। करीम खान क़िले की निर्माणशैली, तीन दालानों वाली शैली है। करीम खान के बाद , कुछ क़ाजारी शासकों ने इन डिज़ाइनों पर चूने का प्लास्टर लगवा कर अपनी पंसद का डिज़ाइन बनवा दिया  किंतु हालिया वर्षों में इस क़िले की मरम्मत के दौरान बड़ी सावधानी से यह कोशिश की जा रही है कि कमरों की दीवारों का पहले वाला रूप सामने आ जाए।

 

क़िले के प्रांगण के एक कोने में, एक सीढ़ी है । यह सीढ़ी दूसरी मंज़िल तक जाती है और वहां से घर के पिछले हिस्से में स्थित प्रागंण में जाने का रास्ता है। यह प्रांगण, करीम खान के विशेष स्नान गृह में प्रवेश का मार्ग है जो वास्तव में इस क़िले की सुन्दरता में चार चांद लगाता है। इस हम्माम को दो भागों में बनाया गया है। स्नानगृह के अगले भाग में कपड़ा बदलने का विशेष कक्ष है जिसमें एक पत्थर का हौज़ बना है जो अष्टकोणीय है और उसकी दीवारों और छते को बेहद खूबसूरत तरीक़े से सजाया गया है जिसकी वजह से यह जगह दर्शनीय बन गयी है। करीम खान किले के हम्माम को इस्लामी और ईरानी डिज़ाइनों से सजाया गया है तथा इसके साथ ही पशु पंछियों की आकृति भी उकेरी गयी है जिससे हम्मास की सुन्दरता बढ़ जाती है।

 

कुछ आगे बढ़ने पर एक अपेक्षाकृत लंबी दालान मिलती है जिसके बाद हम्माम का गर्म भाग मिल जाता है जहां गर्म पानी के अलावा दसियों सुविधाएं मौजूद हैं जिन्हें राजा और उसके विशेष दरबारी, वर्षों तक प्रयोग करते रहे हैं। इस भाग में भी खूबसूरत डिज़ाइन नज़र आते हैं जो पत्थर के खंभों के साथ वैभवशाली सुन्दरता लिए हुए हैं। इन सभी खंभों को दक्ष शिल्पकारों  ने सुन्दरता के साथ तराशा है और उसके खूबसूरत इस्लामी डिज़ाइनों से अदभुत सुन्दरता प्रदान कर दी है। हम्माम के गर्म पानी वाले भाग में तीन जल भंडार हैं जिन्हें नहाने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है । हम्माम के नीचे पानी गर्म करने की व्यवस्था है इस  लिए हम्मास की फर्श हमेशा गर्म रहता था। करीम खान क़िले के इस भाग को कई वर्षों से, ईरान के विभिन्न क्षेत्रों की परपंरागत पोशकों की प्रदर्शनों के लिए प्रयोग किया जाता है। (Q.A.)

 

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