Sep ०१, २०१९ १४:५९ Asia/Kolkata

यज़्द का क्षेत्रफल लगभग 740 हेक्टेयर है जिसे ईरान के राष्ट्रीय धरोहर की सूची में पंजीकृत कर लिया गया है।

इस शहर की ऐतिहासिक इमारतें और वातावरण, बाज़ार और अन्य स्थान जिनकी बनावट प्राचीन है, स्वयं ही मनोरंजन और पर्यटकों को आकृष्ट करने का बेहतरीन साधन हैं। इन ऐतिहासिक बनावटों में विभिन्न मोहल्ले शामिल हैं और इन्हीं में फ़हादान मोहल्ला है जो यज़्द के प्राचीनतम मोहल्लों में समझा जाता है।

इन ऐतिहासिक बनावटों और वास्तुकला में ईलख़ानी और क़ाजारी शासन काल के घर अब भी देखे जा सकते हैं। यह इमारतें इस क्षेत्र की जनता के पारंपरिक जीवन की याद दिलाती हैं और अपनी वास्तुकला तथा प्राचीनता के लेहाज़ से बहुत ही महत्वपूर्ण समझी जाती हैं।  यहां पर सबसे रोचक बात यह है कि इनमें से अधिकतर घर रहने के लिए हैं। यज़्द की ऐतिहासिक इमारतों और घरों की विशेषताओं में केन्द्रीय हाल, बड़ा हाल, पांच और तीन द्वार वाले कमरे, लंबी लंबी दीवारें, प्रांग में दूर दूर तक विभिन्न प्रकार की सुन्दर और मनोरम डिज़ाइनें और इसकी सुन्दर बनावट की ओर संकेत किया जा सकता है।

ख़ानए आक़ा, ख़ानए तवाना और ख़ानए अफ़शार, आठवीं हिजरी शताब्दी के बाक़ी बचे घरों के नाम हैं जबकि ख़ानए महमूदी, ख़ानए लारी, ख़ानए अरब ज़ादे, ख़ानए मुर्ताज़ और ख़ानए नवाब वकील भी क़ाजारी शासन काल के आकर्षक और मूल्यवान घरों के नमूने हैं।

ख़ानए कुलाहदूज़हा

यज़्द के प्राचीन घरों की सैर के दौरान ख़ानए कुलाहदूज़हा की सैर करते हैं। इस घर को 1379 हिजरी शम्सी में जल संग्राहलय के रूप में चुना गया और इसकी उपयोगिता को बदल दिया गया। इससे यह फ़ायदा हुआ कि हज़ारों की संख्या में पर्यटक इस ऐतिहासिक शहर की भव्य इमारत को देखने जाते हैं और वह पानी के कई हज़ार वर्षीय इतिहास और इस मरुस्थलीय क्षेत्र में उसके महत्व और मूल्य से अवगत होते हैं।

यज़्द के जलसंग्राहलय की इमारत पांच मंज़िला है और जैसे ही आप इसमें प्रविष्ट होंगे आपको अद्वितीय वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने देखने को मिलेंगे। यज़्द का जलसंग्राहलय, दुनिया के बेहतरीन जनसंग्राहलयों में से एक है।

इस इमारत के निर्माण का आदेश स्वर्गीय सैयद अली अकबर कुलाहदूज़ ने दिया था। वे 1266 से 1269 हिजरी शम्सी तक क़ाजारी शासन के प्रसिद्ध व्यापारियों में से थे।

ख़ानए कुलाहदूज़ में प्लास्टर आफ़ पेरिस से जानवरों और बेल बूटों की डिज़ाइनें की गयी हैं और यही चीज़ स्वयं इस बात का तर्क बन गयी कि यह इमारत नया रंग व रूप धारण कर ले।  इस घर के एक अन्य सुन्दर बिन्दु में दर्पण हाल है।

साश विंडो या हग साश विंडो और छोटे रंगीन शीशों से बनी सुन्दर और मनमोहक खिड़कियां, इस घर की अन्य सुन्दरता है कि जिसने एक रंगीन और सुन्दर दुनिया पैदा कर दी। जो चीज़ यज़्द जलसंग्राहलय को दूसरे संग्राहलयों से अलग करती है, वह बीच में एक कई सौ साल पुरानी छोटी नहर है।

बताया जाता है कि प्राचीन काल में इन्हीं छोटी नहरों से लोगों की जल आवश्यकताओं को पूरा किया जाता था। वास्तव में घर की निचली मंज़िल पर दो छोटी नहरें खुदी हुई पायी गयीं जिनके नाम रहीमाबाद और ज़ारिच हें। आज ज़ारिच नामक छोटी नहर दो हज़ार से अधिक साल पुरानी हो चुकी है। यह नहर 75 मीटर लंबी और अब भी जारी है।  

इमारत की दूसरी मंज़िल को विभिन्न प्रकार के आहार और खाद्य सामग्री के भंडार के रूप में प्रयोग किया जाता था जिसमें विभिन्न प्रकार के आहारों और खाद्य पदार्थों को विभिन्न शैलियों से सुरक्षित रखा गया है। इस प्रकार के भाग को रिफ़िल Riffle कहा जाता है।  वास्तव में रिफ़िल एक इमारत है जो दस मीटर गहरी है जिसके भीतरी भाग को अस्ट कोणीय बनाया गया और इसका तापमान सभी मौसमों के दौरान 14 डिग्री सेल्सियस होता है। यहां पर एक हौज़ भी देखा जा सकता है जिसका पानी छोटी नहरों से होकर गुज़रता हुआ कमरे के तापमान को संतुलित रखता है।

तीसरी मंज़िल में कुछ कमरे और दालान हैं जो गर्मी के दिनों में बैठने और लेटने के लिए प्रयोग किया जाता है। इमारत की चौथी मंज़िल, घर के सदस्यों और नौकर चाकरों के रहने के लिए विशेष थी। इसमें पांच दरवाज़े वाले कमरे, हाल, रंगीन शीशे वाली खिड़कियों वाले कमरे और रसोइ भी मौजूद है। इमारत की पांचवी मंज़िल या टेरिस जो चायख़ाने के नाम से प्रसिद्ध है, वह स्थान है जो घर के निवासियों के लिए भंडारण जल के प्रयोग का स्थान होता है।                

जलसंग्राहलय, विभिन्न कालों में जल से जुड़े अवशेषों और इमारतों के बारे में जानने का उचित स्थान है। लगभग दो हज़ार साल पहले यहां मौजूद क़नात या छोटी नहरों को बनाया गया था। इसके बारे में महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और प्रमाण भी मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि इन नहरों को कब और किस के आदेश पर खोदा गया। यह सब दस्तावेज़ इस संग्राहलय में सुरक्षित हैं। इन दस्तावेज़ों के अलावा पानी के वितरण और इसके वक़्फ़ से संबंधित दस्तावेज़ भी मौजूद हैं। पानी के वितरण के बारे में मौजूद दस्तावेज़ों से पता चलता है कि उस समय के लोग किसानों को कितनी उचित मात्रा में पानी दिया करते थे। यह सारे के सारे प्रमाण संग्राहलय में मौजूद हैं।

यज़्द की जामा मस्जिदे

 

इस संग्राहलय के अन्य भागों में प्राचीन काल के बर्तनों, उपकरणों और पानी को सुरक्षित करने के लिए और पानी लाने ले जाने के संसाधनों को रखा गया है। इस संग्राहलय की प्रसिद्ध चीज़ों में से एक मशरबा है जो कई हज़ार साल पुराना है इसको प्राचीन ऐतिहासिक किताबों में याद किया गया है।

यज़्द शहर की प्राचीन बनावट में ऊंचे ऊंचे और नीले रंग के जामा मस्जिद के मीनार देखे जा सकते हैं। जामा मस्जिद  और उसके मीनार पर्यटकों के ध्यान अपनी ओर आकृष्ट कर लेते हैं।

निसंदेह यह मस्जिद ईरानी वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इसका मुख्य प्रवेश द्वार, दो दीवार वाले गुंबद, वातावरण की विविधता, अनेक प्रकार की सुन्दर डिज़ाइनें और मनोरम वास्तुकला, ईरानी कलाकारों और वास्तुकारों के सौंदर्य बोध का मुंह बोलता प्रमाण है। ईरान की असली कला के नमूने जामा मस्जिद के प्रांगड़ा, हाल और मीनारों पर प्लास्टर आफ़ पेरिस के रूप में देखे जा सकते हैं और यह कहा जा सकता है कि यह डिज़ाइनें अपने चरम पर पहुंच गयी थीं।

ऊंचे गुंबद, गुंबद ख़ाना और इस मस्जिद के आसपास के वातावरण पर मुर्रक़कारी, इस्लीमी और विभिन्न प्रकार की डिज़ाइनों को देखा जा सकता है। इस प्रकार इस पर सुन्दर बेल बूटों को भी देखा जा सकता है। यह इमारत के सुन्दरतम भागों में गिना जाता है। इसके अलावा मस्जिद के मीनार पर अद्वितीय टाइलों का काम देखा जा सकता है। इस मस्जिद के मीनारे की ऊंचाई 52 मीटर है और यह दुनिया की सबसे ऊंची मीनार समझी जाती है।

यज़्द की जामा मस्जिदे जामेअ कबीर की वर्तमान इमारत को सैयद रूक नुद्दीन मुहम्मद क़ाज़ी के आदेश पर बनाया गया। यह मस्जिद, मस्जिदे जामा अतीक़ पर बनी हैं जिसे छठी शताब्दी हिजरी क़मरी के आरंभ में गरशास्ब बिन अली बिन फ़रामर्ज़ द्वारा बनाया गया था।

दोस्तो इस प्राचीन शहर यज़्द में बहुत से सुन्दर और लुभावने दृश्य है जिसे कोई भी क़लम बयान नहीं कर सकता। इसका आनंद लेने के लिए आपको ख़ुद ईरान आना पड़ेगा। (AK)

टैग्स

कमेंट्स