Sep ०१, २०१९ १६:१० Asia/Kolkata

हमने बताया कि हर व्यक्ति अपने लिए, अपने परिवार के लिए और दूसरे लोगों के लिए कुछ क़दम उठाता है ताकि उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।

इसी तरह वह एक बेहतर व स्वस्थ जीवन हासिल करने के लिए बीमारियों व दुर्घटनाओं से बचने की कोशिश करता है और ख़तरनाक कामों से दूर रहता है। इसके बाद हमने ख़तरनाक व्यवहार की परिभाषा बताई थी और कहा था ख़तरनाक व्यवहार उन व्यवहारों को कहा जाता है जिनके अवांछित व बुरे प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य और व्यापक विकास पर पड़ते हैं और उनकी सफलता व प्रगति के मार्ग में रुकावट बनते हैं। तेज़ ड्राइविंग, जो चालक और सड़क पर चल रहे अन्य लोगों व गाड़ियों के सामने मौत का ख़तरा पैदा कर देती है, ख़तरनाक व्यवहारों में शामिल है। इस प्रकार की ड्राइविंग के चलते संसार में हर साल बारह लाख लोगों की जान जाती है और लगभग पांच करोड़ लोग घायल होते हैं।

ख़तरनाक ड्राइविंग, समाज में एक अहम समस्या समझी जाती है क्योंकि सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर साल परिवारों व समाज को भारी क़ीम चुकानी पड़ती है। पूरी दुनिया में हर दिन सड़क दुर्घटनाओं के कारण तीन हज़ार से अधिक लोग अपनी जान से हाथ धो लेते हैं। कम व औसत आय वाले देशों में शारीरिक अक्षमताओं के कारण मरने वाले 85 प्रतिशत लोगों की मौत की वजह सड़क दुर्घटना होती है। इसी लिए इन देशों में ख़तरनाक ड्राइविंग का अर्थ मानव समाज की सकारात्मक व सृजनात्मक क्षमता की तबाही होता है जो समाज के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर ख़तरा होती है।

ड्राइविंग के ख़तरनाक रवैये में कई चीज़ें शामिल हैं जिनका लिंग, आयु, अनुभवहीनता, तनाव, शराब या मादक पदार्थों का सेवन, अवसाद और रोमांच प्रेम जैसी बातों से संबंध सिद्ध हो चुका है। अध्ययनों से पता चलता है कि 14 से 18 साल की आयु के किशोर व युवा ख़तरनाक ढंग से गाड़ी चलाने के इच्छुक होते हैं। अनुभवहीनता और ड्राइविंग में दक्षता का अभाव, युवाओं के इस ख़तरनाक व्यवहार के मुख्य कारणों में से है। जैसा कि पिछले कार्यक्रमों में भी कहा गया कि इस आयु वर्ग के लोगों में सामाजिक पथभ्रष्टता, ड्राइविंग नियमों का उल्लंघन और शराब व मादक पदार्थों का सेवन अधिक देखने में आता है।

ड्राइविंग के ख़तरनाक रवैये पर प्रभाव डालने वाली एक अन्य विशेषता जो सड़क दुर्घटनाओं का कारण भी बनती है, चालक का पुरुष होना है। अध्ययन के अनुसार महिलाएं, नैतिक क़ानूनों का अधिक पालन करती हैं और इसी लिए वे ट्रेफ़िक के नियमों को अधिक महत्व देती हैं। हालांकि महिलाओं को पुरुषों से अधिक रोमांचकारी समझा जाता है लेकिन ड्राइविंग में पुरुष विशेष कर युवा चालक महिलाओं से अधिक रोमांचकारी व्यवहार का प्रदर्शन करते हैं। इसी प्रकार का रोमांचकारी व्यवहार अधिकतर ऐसी दुर्घटनाओं का कारण बनता है जिसमें एक या कुछ लोगों की जान चली जाती है।

ख़तरनाक ड्राइविंग का अर्थ है कि कोई वाहन चालक एक ऐसी गतिविधि में भाग ले जो गाड़ी चलाने के दौरान वाहन के वास्तविक संचालन से संबंधित न हो और वह गतिविधि चालक को सड़क और यातायात की स्थितियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए सुरक्षित रूप से वाहन के संचालन से रोक दे या उसमें रुकावट डाल दे। ड्राइविंग के दौरान मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल इसका एक उदाहरण है। इस प्रकार की ड्राइविंग से दुर्घटनाओं का ख़तरा बढ़ जाता है। अनेक अध्ययनों से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि ख़तरनाक ड्राइविंग किशोरों व युवाओं के बीच एक गंभीर समस्या है।

अगर ख़तरनाक ड्राइविंग के कुपरिणामों की संक्षित्प सूची तैयार की जाए तो वह इस प्रकार होगी। इससे गाड़ी क्षतिग्रस्त होने से लेकर चालक के घायल या मरने तक की आशंका होती है। ख़तरनाक ड्राइविंग के कारण ड्राइवर को दंडित किया जा सकता है जो जुर्माने से लेकर जेल तक की सज़ा हो सकती है। इस प्रकार की ड्राइविंग के परिणाम स्वरूप हमारे अपने परिवार और समाज की सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है। इसी तरह ख़तरनाक ड्राइविंग के माध्यम से लोग व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय संपत्ति को भी जोखिम में डालते हैं। ख़तरनाक ड्राइविंग का रोमांच दूसरों को भी इस तरह के काम के लिए प्रेरित करता है जिससे उनकी जान भी ख़तरे में पड़ जाती है। इसके अतिरिक्त इससे क़ानून तोड़ने की भावना को बल मिलता है जिसका परिणाम समाज में अराजकता और निरंकुशता के रूप में सामने आ सकता है।

हम आए दिन सुनते रहते हैं कि गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करने के कारण दुर्घटना में किसी की मौत हो गई या कोई घायल हो गया। ड्राइविंग एक ऐसा काम है जिसके लिए आपको पूरी एकाग्रता की ज़रूरत होती है क्योंकि इसमें आपकी कई इंद्रियां एक साथ काम करती हैं। अगर चालक का ध्यान संगीत सुनने या मोबाइल पर बात करने की ओर होगा तो दुर्घटना की काफ़ी आशंका है। इसका ख़तरा स्कूटर या मोटर साइकल चलाने वालों को अधिक रहता है लेकिन खेद की बात है कि अधिकतर लोग विशेष कर युवा इन बातों पर ध्यान नहीं देते जिसके चलते कभी कभी उन्हें भारी नुक़सान उठाना पड़ता है। यद्यपि सभी देशों की सरकारें ट्रेफ़िक के कड़े नियम बनाती हैं लेकिन बहुत से लोग उनका पालन नहीं करते जबकि उन्हें यह सोचना चाहिए कि ये क़ानून स्वयं लोगों की रक्षा और सुविधा के लिए बनाए गए हैं। उदाहरण स्वरूप बाइक और स्कूटर पर चलने वालों के लिए अधिकांश देश में हेलमेट अनिवार्य है लेकिन लोग इसकी ओर ध्यान नहीं देते और फिर उन्हें ऐसा नुक़सान हो जाता है जिसे बड़ी सरलता से हेलमेट पहन कर टाला जा सकता था।

ट्रेफ़िक के ख़तरों को समझना, सुरक्षित ड्राइविंग में प्रभावी क्षमताओं में से एक के रूप में जाना जाता है। ख़तरे को समझने का अर्थ उसे सही समय पर समझना, उसकी गंभीरता की सही समीक्षा करना और यह सोचना है कि उससे किस प्रकार बचा जा सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का ख़तरनाक ड्राइविंग के कारण एक्सिडेंट का रिकार्ड रहा है उनमें उन लोगों की तुलना में ख़तरों की समझ कम है जिनका कभी एक्सिडेंट नहीं हुआ है।

एक दूसरी बात यह भी है कि विभिन्न राष्ट्रों में ख़तरों के प्रति समझ अलग अलग होती है। इस संबंध में घाना और नार्वे में एक अध्ययन किया गया। इस अध्ययन के परिणामों से पता चला कि घाना के वाहन चालकों में, नार्वे के ड्राइवरों की तुलना में ट्रेफ़िक के ख़तरों की समझ अधिक थी क्योंकि ड्राइवर ख़तरे की समीक्षा करके ही अपनी गाड़ी की स्पीड को नियंत्रित करता है। ख़तरे के बारे में मस्तिष्क की समीक्षा जितनी सटीक होगी, ड्राइवर उतनी ही अधिक सावधानी से काम करेगा। यही कारण था कि नार्वे के ड्राइवर सड़क और अपनी गाड़ी की स्थिति की ओर से निश्चिंत हो कर अधिक तेज़ रफ़्तारी से गाड़ी चला रहे थे।

मनोवैज्ञानिक दृष्टि से ड्राइविंग भी सीखने की उन क्रियाओं में से है जो कुछ समय बाद अपने आप काम करने लगती हैं और व्यक्ति के ध्यान व चेतना का छोटा सा भाग अपने आपसे विशेष करती हैं। यही कारण है कि अधिकतर वाहन चालक अपनी ड्राइविंग पर बहुत अधिक ध्यान नहीं देते और अपने आप ही ड्राइविंग के साथ साथ विभिन्न बातों और समस्याओं के बारे में सोचते रहे हैं। इसी लिए जब ड्राइविंग के समय उनकी सोच क्रोध, भय, दुख, सुख या उत्तेजना के रूप में सामने आती है तो उनकी समस्या बढ़ जाती है। इसी लिए कहा जाता है कि ड्राइविंग के समय मोबाइल पर बात करने, एसएमएस भेजने, खाने-पीने, पीछे की सीट पर देखने और साथ चल रहे बच्चों को नियंत्रित करने जैसी बातों से अवश्य बचना चाहिए।

अंत में हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि प्रायः ठोस व्यक्तित्व वाले लोग, जिनमें भरपूर आत्म विश्वास होता है, पूरे संतोष के साथ और क़ानूनी रफ़्तार से गाड़ी चलाते हैं। इस आधार पर कहा जा सकता है कि संतोषजनक रफ़्तार भी एक स्वस्थ व प्रफुल्लित जीवन और आत्म विश्वास के लिए अपनी देखभाल की राहों में से एक है। (HN)

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