• मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 12

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 12

    Sep ११, २०१९ १६:३३

    आज मोहर्रम की 12 तारीख है।

  • मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 11

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 11

    Sep ११, २०१९ १६:३०

    आज मोहर्रम की 11 तारीख है।

  • मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 10

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 10

    Sep ०८, २०१९ १५:५८

    इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का कारवां,  इस्लामी कैलेन्डर के पहले महीने अर्थात मुहर्रम की दूसरी तारीख को कर्बला पहुंचा तो उस समय यह स्थान एक मरूस्थल था।

  • मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 9

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 9

    Sep ०८, २०१९ १५:४३

    कर्बला के तपते हुए मरुस्थल में इतिहास रचने की तैयारी की जा रही है।

  • इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का आंदोलन और उसकी व्यापकता

    इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का आंदोलन और उसकी व्यापकता

    Sep ०८, २०१९ १५:२५

    इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का आंदोलन और उसकी व्यापकता

  • मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 8

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 8

    Sep ०८, २०१९ १५:१२

    हमने कर्बला की महात्रासदी के समय की परिस्थितियों पर चर्चा की थी और इमाम हुसैन के महा अभियान और उस अभियान के सिपाहियों पर चर्चा की थी जो मौत को बेहद मीठी समझते थे।

  • मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 7

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 7

    Sep ०७, २०१९ १३:३५

    हमने बताया कि मुआविया ने धूर्तता के साथ इस्लामी सत्ता पर अधिकार किया और फिर अपने बाद अपने कुकर्मी बेटे यज़ीद को सत्ता सौंपी यज़ीद ने अपने बुरे कामों और इस्लाम की शिक्षाओं में फेरबदल के अपने अभियान को औपचारिकता प्रदान करने के लिए इमाम हुसैन से आज्ञापालन की प्रतिज्ञा मांगी। 

  • मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 6

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 6

    Sep ०७, २०१९ १३:१२

    पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम ने अपने जीवन में इस्लामी शासन को अत्यंत मज़बूत बना दिया था और इस्लाम बड़ी तेज़ी से दुनिया में फैलता जा रहा था।

  • मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 5

    मुहर्रम पर विशेष कार्यक्रम- 5

    Sep ०४, २०१९ १६:३९

    पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के नाती हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने यज़ीद के ख़लीफ़ा बनने के बाद उसके आज्ञापालन की मांग को ठुकरा दिया जिसके बाद उनके लिए मदीना नगर में रहना ख़तरनाक हो गया क्योंकि यज़ीद के कारिंदे उनकी जान के पीछे पड़ गए थे।