जैसाकि आप जानते हैं कि नये ईरानी वर्ष का आरंभ हो चुका है और आज ईरान के नये साल की 13 तारीख है और नौरोज़ की छुट्टियों का आज अंतिम दिन है।

प्रकृति से प्रेम करने वाले ईरानी लोग आज के दिन एक प्राचीन परंपरा के अनुसार अपने घरों से बाहर निकल जाते हैं और प्राकृतिक क्षेत्रों, मरुस्थलों, पार्कों, और जंगलों आदि में जाकर अपने परिजनों, निकट संबंधियों व मित्रों के साथ नौरोज़ की अंतिम छुट्टी बिताते हैं। आज के दिन को प्रकृति दिवस का नाम दिया गया है। आज के दिन लोग प्राकृतिक क्षेत्रों व पार्कों आदि में जाकर प्रकृति और उसमें मौजूद अनुकंपाओं के प्रति सम्मान व्यक्त करते और उनसे लाभ उठाते हैं। कहा जा सकता है कि आज का दिन वसंत ऋतु का वास्तिक जश्न है। प्रकृति में हरियाली लौट आयी है। यह आकर्षक हरियाली लोगों को अपनी ओर बुला रही है। जब हम इस प्राचीन परंपरा की समीक्षा करते हैं तो प्रकृति और उसकी सुरक्षा के संबंधों के महत्व को समझ जाते हैं। यह संबंध इंसान और भावी पीढ़ी के हित में है। ईरानियों ने सदैव प्रकृति में उपस्थिति के प्रभाव को समझा है और वे प्रकृति से लाभ उठाकर अपने आप से समस्याओं व कठिनाइयों को दूर करने और खुशी उत्पन्न करने का प्रयास करते हैं और लोगों की खुशी के चरम पर पहुंच जाने में नौरोज़ के 13वें दिन और आज के दिन होने वाले कार्यक्रमों का बहुत प्रभाव है। आज के दिन मनाई जाने वाली परंपरा और कार्यक्रम ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में अलग- अलग और विस्तृत पैमाने पर होते हैं। चारों तरफ फैली हरियाली खुशी और बरकत का निमंत्रण देती है। जहां- जहां पुष्प खिले हैं वहां लोग मौजूद हैं। दूसरे शब्दों में आज के दिन प्रकृति में लोगों की उपस्थिति इतनी अधिक है कि बहुत से ईरानी नागरिक आज के दिन को पार्कों और नगर के हर भरे स्थानों पर बिताते और उनसे लाभ उठाते हैं। हमने उचित समझा कि आपको आज ईरानी प्रकृति की सैर करायें।

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ईरान की राजधानी तेहरान के आस- पास की ऊंचाईयों पर वसंत ऋतु के पुष्प खिले हैं और शीतल जल के झरने जारी हैं जिससे इन ऊंचाइयों की प्राकृतिक सुन्दरता में चार चांद लग गये हैं और ये स्थान व क्षेत्र पर्यटकों, खिलाड़ियों और पर्वतारोहियों के एकत्रित होने के केन्द्र में परिवर्तित हो गये हैं। आज के दिन लवासानात, फशम, कन व सुलक़ान ,दरबंद और फरहज़ाद जैसे तेहरान के आस- पास के क्षेत्र उन परिवारों से भरे पड़े हैं जो प्रकृति की नेअमतों से लाभावित हो रहे हैं। शेमीरानात या रूदबार क़स्रान की अछूती जलवायु, सुन्दर जंगल, तालेक़ान के किनारे नदियां और तेहरान के जंगली पार्क भी वे स्थान हैं जहां तेहरान के लोग प्रकृति दिवस मनाने जाते हैं।  

ईरान के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले भी आज के दिन पवर्तों के दामन और मरुस्थलों में जाते हैं और बहार की ठंडी जलवायु का आनंद लेते हैं। बर्फ से ढ़की ऊंची 2 चोटियां, गहरे दर्रे, शीतल जल के झरने और बलूत के घने जंगल ईरान के पश्चिम में स्थित ज़ाग्रोस के पर्वतीय क्षेत्र हैं जो बड़े मनोहर व आकर्षक हैं। लुरिस्तान प्रांत का एक दर्शनीय स्थल “आब सफीद” नामक झरना है जहां प्रतिवर्ष गर्मी और वसंत ऋतु में बहुत से प्रकृति प्रेमी जाते हैं। यह झरना अलीगूदर्ज़ नगर से 90 किलोमीटर दूर ठंडे क्षेत्र में स्थित है। जहां यह झरना है वहां गगनचुंबी पहाड़ और बलूत एवं आखरोट के जंगल हैं। “आब सफीद” झरना 60 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित पहाड़ की सुरंग से निकलता है और वह ईरान के सुन्दरतम झरनों में से एक है।  इस झरने के पास समय गुज़ारकर और उसके पानी के गिरने की आवाज़ सुनकर इंसान का ध्यान हर चीज़ से अधिक महान ईश्वर की असीम शक्ति की महानता की ओर जाता है।

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खुन्सार इस्फ़हान प्रांत का एक नगर है और उसके पास “गुलिस्तान कूह” नामक सुन्दर व हरा भरा मैदान है जिसके कारण बहुत से पर्यटक प्रकृति दिवस मनाने के लिए वहां जाते हैं। वसंतु ऋतु में ट्यूलिप के दुर्लभ लाल और पीले रंग के पुष्प, नाना प्रकार की जड़ी बूटियों और सुन्दर चरागाहों ने गुलिस्तान कूह मैदान की सुन्दरता में चार चांद लगा दिया है। फूलों से भरे इस मैदान के विभिन्न क्षेत्रों में जो सोते बहते हैं उन्होंने भी इस मैदान की सुन्दरता में वृद्धि कर दी है। ईरान के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में चूंकि समुद्र हैं इसलिए प्रकृति दिवस मनाने के लिए वहां भी बहुत से लोग जाते हैं। ईरान के उत्तर में जो हरे - भरे जंगल हैं उसके कारण प्रकृति का आनंद लेने के लिए वहां जाने वालों का पूरे साल भर तांता लगा रहता है परंतु आज के दिन यानी प्रकृति दिवस के अवसर पर स्थानीय लोगों के अलावा क्षेत्र से बाहर के हज़ारों लोग भी नौरोज़ की छुट्टियां  बिताने के लिए उत्तरी ईरान की यात्रा करते हैं।

महारलू झील के किनारे के क्षेत्र, पेर्स पुलिस के आस- पास के प्राकृतिक क्षेत्र, क़लात के मनोरंजन स्थल, सद्रा शहर के प्राकृतिक क्षेत्र, ज़रकान का जंगली पार्क, पीर बनू के आस- पास के प्राकृतिक क्षेत्र, तियून के बाग़ और बेर्म दलक शीराज़ नगर के निकट के वे क्षेत्र हैं जहां लोग प्रकृति दिवस मनाने के लिए जाते हैं। इसी तरह आबादान, ख़ुर्रम शहर और ईरान के दक्षिण में स्थित ख़ूज़िस्तान प्रांत के दूसरे नगर भी हैं जहां लोग प्रकृति दिवस पर अपना घर बार छोड़कर बाहर चले जाते हैं और अरवन्दरूद नदी के पास के गांवों, बहमनशीर और क्षेत्र के सुन्दर खजूर के बागों में जाकर प्रकृति दिवस मनाते हैं।

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प्रकृति दिवस की एक प्रचलित परंपरा यह है कि जो लोग प्रकृति दिवस मनाने के लिए घर से बाहर गये होते हैं वे ताज़ा उगाई गयी हरियाली को बहते पानी में छोड़ देते हैं। यह वही हरियाली होती है जिसे वे हफ्त सीन दस्तरखान के लिए तैयार किये होते हैं। उसके बाद वे अपने अपने घरों को लौट आते हैं।

उस दिन का खाना प्रायः दो प्रकार से तैयार किया जाता है या तो घर से बाहर जाने से पहले खाना पका लिया जाता है या खाना पकाने की सारी ज़रुरत की चीज़ें लोग बाहर लेकर जाते हैं और वहीं खाना पकाते हैं। प्रकृति दिवस का एक पसंदीदा खाना विभिन्न प्रकार की आश है और उस दिन विभिन्न प्रकार की आश प्रकृति दिवस मनाने वाले ईरानियों के दस्तरखान की शोभा होती हैं। आश के अलावा सलादपत्ता और इसी तरह खजूर व अंगूर का शीरा खाना भी बहुत से ईरानी परिवारों के मध्य प्रचलित है। पश्चिमी ईरान के कुछ क्षेत्रों के लोगों के मध्य यह परम्परा है कि वे प्रकृति दिवस के अवसर पर दोपहर के खाने के लिए कोफ्ता नाम का विशेष व्यंजन तैयार करते हैं। इसी तरह कुछ परिवार आज के दिन मछली, कबाब और सब्जी पोलो नाम का विशेष खाना खाते हैं। तेहरान प्रांत के लोगों के मध्य विभिन्न प्रकार के व्यंजन और सूखे बीज खाने की परंपरा को विशेष महत्व व स्थान प्राप्त है। तेहरान प्रांत के अधिकांश परिवार प्रकृति दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रकार के कबाब बनाते हैं इसी कारण तेहरान के विभिन्न क्षेत्रों से उठता हुआ धूआं देखा जा सकता है।

प्रायः आज का दिन दोस्ती के लिए अच्छा अवसर होता है क्योंकि लोगों के समूहों, परिजनों और मित्रों के साथ होने से एक विशेष प्रकार का वातावरण उत्पन्न हो जाता है और निजी स्थानों की अपेक्षा सार्वजनिक स्थानों पर हंसी, मजाक, खेल कूद और खेल के मुकाबले का अवसर अधिक होता है इसलिए दोस्ती के लिए आज का दिन अधिक उपयुक्त है।

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प्रकृति दिवस प्रकृति से सही तरह से लाभ उठाने की संस्कृति को मज़बूत करने का दिन है। प्रतिवर्ष ईरान के विभिन्न नगरों में विभिन्न संगठन इस बात का प्रयास करते हैं कि प्रकृति दिवस खुशी, सुरक्षा और प्रकृति के प्रति सम्मान के दिवस में परिवर्तित हो जाये। अतः इसीलिए नगर के पार्कों आदि में लोगों के लिए कार्यक्रम तैयार किये जाते हैं। कूड़ा- करकट फेकने के लिए लोगों के मध्य पॉलिथिन की थौलियां बांटी जाती है और प्राकृतिक स्थानों से विशेष वाहनों द्वारा कूड़ा एकत्रित किया जाता है। इसी तरह प्राकृतिक स्थलों और हरे -हरे स्थानों की सुरक्षा कैसे की जाये इस बात की शिक्षा देने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इसी तरह ये कार्यक्रम इस उद्देश्य से आयोजित किये जाते हैं कि लोग नौरोज की छुट्टियों के अंतिम दिन को प्रेम, दोस्ती और प्रकृति से प्रेम व लगाव के साथ समाप्त करें और प्रफुल्लित मन व आत्मा और ताज़ी ऊर्जा के साथ नये साल में कार्य व प्रयास आरंभ करें।

 

 

 

Apr ०५, २०१७ ०९:३१ Asia/Kolkata
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