ईरान में 12 से 17 रबीउल अव्वल के बीच एकता सप्ताह मनाया जाता है।

इसे एकता सप्ताह का नाम स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी ने इसलिए दिया था क्योंकि सुन्नी मुसलमान, पैग़म्बरे इस्लाम (स) के जन्मदिन को 12 रबीउल अव्वल मानते हैं जबकि शिया मुसलमान इसे 17 रबीउल अव्वल मानते हैं।  प्रतिवर्ष रबीउल अव्वल की 12 से 17 रबीउल अव्वल को बड़े उत्साह से यह मनाया जाता है।

 

हालिया वर्षों के दौरान इस्लामी जगत को एकजुट रखने के लिए स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी और आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई के प्रयास सराहनीय रहे हैं।  इन दोनों हस्तियों ने मुसलमानों के बीच एकता स्थापित करने के लिए केवल मौखिक काम नहीं किया बल्कि व्यवहारिक रूप में बहुत कुछ किया है।  एकता वास्तव में एक बहुत जटिल विषय है।  जब हम इस बारे में अध्ययन करते हैं तो हमारी नज़रों से कुछ ऐसे सुधारकों के नाम गुज़रते हैं जिन्होंने मुसलमानों को एकजुट करने के लिए बहुत प्रयास किये जैसे जमालुद्दीन असदाबादी, शैख मुहम्मद अब्दो, शैख़ शलतूत, आयतुल्लाह बोरोजर्दी, सैयद क़ुत्ब, स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी और इस्लामी क्रांति के वर्तमान वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई।  स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी का मानना था कि अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़े बिना मुसलमानों के बीच एकता का कोई अर्थ नहीं है।  यही कारण है कि उन्होंने एकता के संबन्ध में अथक प्रयास किये।

पवित्र क़ुरआन के अनुसार सृष्टि में संसार के सब लोग एक समान हैं।  इस प्रकार से कहा जा सकता है कि पूरी मानवता एक राष्ट्र है।  सब लोगों को एकजुट करने के लिए यह बहुत अच्छा आधार है किंतु कुछ ऐसे कारक होते हैं जिनके कारण लोगों के बीच एकता, अनेकता में परिवर्तित हो जाती है जैसे अत्याचार, सांसारिक मायामोह, जातिवाद, सांप्रदायिक्ता, शैतानी उकसावे और आपसी शत्रुता आदि।  पवित्र क़ुरआन ने इन नकारात्मक कारकों से उत्पन्न अनेकता को पुनः एक करने के लिए प्रेम, बंधुत्व, भाईचारा, मेहरबानी और इस जैसी अन्य विशेषताओं को पेश किया है।  इमाम ख़ुमैनी इस बात पर विशेष बल देते हैं कि विश्व के सारे मुसलमान, आपस में भाई हैं।  इस प्रकार इन भाइयों के एकजुट होने से संयुक्त इस्लामी समाज की स्थापना की जा सकती है।

 

स्वर्गीय इमाम ख़ुमैनी का कहना था कि मुसलमानों के बीच एकता के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वे जिस पंथ या संप्रदाय को मानते हैं उसको छोड़ दें और कोई नया पंथ स्वीकार करें।  वे कहते हैं कि इस्लाम की संयुक्त बातों के आधार पर दुनिया भर के मुसलमान एकजुट हो सकते हैं।  इसके लिए उन्हें राष्ट्रवाद, भाषा या भौगोलिक स्थिति की दृष्टि से किसी भी प्रकार की विशिष्टता से ऊपर उठना होगा।  इमाम ख़ुमैनी के अनुसार मुसलमानों के बीच मतभेद बहुत अधिक दुखदाई है।  उनका कहना था कि मुसलमानों के बीच मतभेद केवल उन लोगों के हित में है जो न तो सुन्नी मुसलमनों को मानते हैं और न ही शिया मुसलमानों को।  वे न तो हनफ़ी, हंबली, शाफ़ेई और मालेकी को मानते हैं और न ही शिया मुसलमानों को।  इस्लाम के ऐसे दुश्मन न सुन्नी मुसलमानों के दोस्त हैं और न ही शिया मुसलमानों के।  वे चाहते हैं कि न ही सुन्नी रहें न ही शिया।  एसे इस्लाम विरोधी, सुन्नी और शिया मुसलमानों के बीच मतभेद फैलाकर दोनों को ही समाप्त करना चाहते हैं।  उनकी इच्छा है कि यह लोग सदैव आपस में लड़ते रहें।  एसे में हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम सब मुसलमान हैं।  हमारा ईश्वर एक है, हमारा क़ुरआन एक है और हमारा क़िब्ला भी एक है।

इमाम ख़ुमैनी इस बात को भलिभांति जानते थे कि मुसलमानों के बीच मतभेद फैलाने के पीछे उन वर्चस्ववादियों का हाथ है जो विश्व पर अपना वर्चस्व बनाए रखना चाहते हैं।  इमाम ख़ुमैनी का कहना था कि मुसलमान यदि इस्लाम के आरंभिक काल के वैभव को प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें आपस में एकजुट हो जाना चाहिए।

इमाम ख़ुमैनी के स्वर्गवास के बाद इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने मुसलमानों के बीच एकता के उस ध्वज को उठाये हुए हैं जिसे इमाम ख़ुमैनी ने फहराया था।  उनका कहना है कि अगर मुसलमान धर्मगुरू इस बात को सही मानते हैं कि ईश्वरीय धर्मों का उद्देश्य, न्याय स्थापित करना, अत्याचार समाप्त करना और मानवता के लिए अच्छे जीवन का चयन करना है तो उनको चाहिए कि वे अपने प्रयास आरंभ करें और यह काम संभव है।

 

हर वह समाज जिसकी बुनियाद अनेकेश्वरवादी विचारधारा पर होगी उसमें जातिवाद और मतभेद अवश्य पाए जाएंगे।  इसके विपरीत एकेश्वरवादी विचारधारा पर अस्तित्व में आने वाले समाज में एकता पाई जाती है क्योंकि वहां पर सब एक ही रस्सी से जुड़े हुए होते हैं।  आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई कहते हैं कि आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार की सफलता के लिए मुसलमानों के बीच एकता बहुत ज़रूरी है।  उनका कहना है कि यदि इस्लामी जगत यह चाहता है कि वह ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में विकास करे और वर्चस्ववादियों के चंगुल से स्वतंत्र हो तो उसे आपस में एकजुट होना होगा।  वे कहते हैं कि दुनिया भर के मुसलमानों को एकजुट हो जाना चाहिए।  उनको आपसी दुश्मनी को समाप्त करना चाहिए।  आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई का कहना है कि मुसलमानों का केन्द्र बिंदु पवित्र क़ुरआन, पैग़म्बरे इस्लाम और इस्लाम होना चाहिए।  वे कहते हैं कि इतिहास हमें बताता है कि मुसलमान जबतक एकजुट रहे और उनके भीतर एकता स्थापित थी उस समय तक शत्रु, मुसलमानों को कोई क्षति नहीं पहुंचा सका।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता का कहना है कि मुसलमानों को एकजुट रहने के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए जैसे सांसारिक मायामोह से दूरी, अत्याचार के सामने घुटने न टेकना, जातिवाद और सांप्रदायिकता से बचना, इस्लाम के दुश्मनों के षडयंत्रों का डटकर मुक़ाबला करना, इस्लामी सरकारों और राष्ट्रों के बीच व्याप्त भ्रांतियों को समाप्त करना और इनके साथ ही एकता के लिए पैग़म्बर इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे वआलेही वसल्लम को एकता की धुरी बनाना।  वे कहते हैं कि पूरी दुनिया के मुसलमान जहां पर पैग़म्बरे इस्लाम को मानते हैं वहीं पर उनके हृदयों में पैग़्मबरे इस्लाम के प्रति विशेष लगाव और स्नेह पाया जाता है जो मुसलमानों के बीच एकता का मूल मंत्र सिद्ध हो सकता है।

इसके अतिरिक्त वरिष्ठ नेता का कहना है कि मुसलमानों को एकजुट करने में इस्लामी संप्रदायों के धर्मगुरूओं के फ़त्वे भी बहुत प्रभावी सिद्ध हो सकते हैं।  एक बार जब कुवैत में स्वयं को शिया धर्मगुरू कहने वाले ने पैग़म्बरे इस्लाम (स) की धर्मपत्नी के स्वर्गवास के अवसर पर उनका अपमान किया तो इसके तुरंत बाद इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने अपने एक फ़त्वे में पैग़म्बरे इस्लाम (स) की पत्नियों के अनादर को हराम बताया था।

आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई के फ़त्वे पर इस्लामी जगत में व्यापक प्रतिक्रयाएं व्यक्त की गईं।  इस बारे में मिस्र के अलअज़हर विश्वविद्यालय के प्रमुख शैख़ुल अज़हर "अहमद अत्तयब" ने कहा कि यह उचित समय पर दिया गया फ़त्वा है जिससे मतभेदों को समाप्त करने में सहायता मिलेगी।  अपने एक बयान में उन्होंने कहा था कि जो लोग मुसलमानों के बीच मतभेद फैलाते हैं उनके षडयंत्रों को विफल बनाने में इस प्रकार के फ़त्वे बहुत महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं।

Dec ०२, २०१७ १७:११ Asia/Kolkata
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