ईरान में आने वाली इस्लामी क्रांति, अब अपना चौथा दशक पूरा करने जा रही है।

इतना समय बीत जाने के बावजूद इसके प्रभाव को क्षेत्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देखा जा सकता है।  ईरान की इस्लामी क्रांति आज भी संचार माध्यमों का केन्द्र बनी हुई है।  सन 1979 में ईरान में आने वाली क्रांति ने न केवल यह कि विस्तारवादी शक्तियों को चुनौती नहीं दी बल्कि मानवता को भी संदेश दिया।  इस क्रांति के संदेश आज भी ताज़ा हैं और वर्तमान काल के लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की इस्लामी क्रांति, बहुत से आयामों से अन्य क्रांतियों की तुलना में अलग है।  इसका कारण है कि इसके संदेश भी उन क्रांतियों से भिन्न हैं।  सामान्यतः क्रांतियां किसी भूकंप की भांति अपने प्रभाव छोड़ती हैं।  जिस क्रांति का संदेश जितना आकर्षक होता है उसी अनुपात में लोग उससे जुड़ते हुए इस क्रांति को अपना आदर्श बनाते हैं।  ईरान की इस्लाम क्रांति मानवता के लिए मान-सम्मान, आज़ादी, गौरव और आत्मविश्वास लाई।  यह क्रांति शुद्ध इस्लामी शिक्षाओं पर आधारित हैं।  जिस समय बहुत से विचारक यह कहा करते थे कि लोगों को एकजुट करने की क्षमता केवल मार्क्सवाद में है, ईरान की इस्लामी क्रांति ने यह सिद्ध कर दिया कि यह दावा निराधार है।

यह क्रांति, एकेश्वरवाद पर भरोसे, ईश्वरीय संदेश पर भरोसे और इस्लामी शिक्षाओं पर आधारित है।  इसमें आध्यात्म की ओर झुकाव होने के साथ ही धार्मिक पहचान भी पाई जाती है।  विशेष बात यह है कि ईरान की इस्लामी क्रांति एसे क्षेत्र में आई जो क्षेत्र, लंबे समय से राजशाही व्यवस्था और तानाशाही सरकार का केन्द्र रहा है।  इस क्रांति ने वर्चस्सवादी शक्तियों के सारे समीकरणों को धराशायी कर दिया।  धर्म की ओर वापसी, अन्याय और विश्व की बड़ी शक्तियों के मुकाबले में प्रतिरोध, धर्म की ओर वापसी तथा समाज में सुधार जैसे विषय, ईरान की इस्लामी क्रांति के उद्देश्यों में शामिल हैं।  ईरानी राष्ट्र आरंभ से ही नैतिक बुराइयों से मुक़ाबले, धार्मिक मूल्यों को जीवित करने और न्याय को व्यवहारिक बनाने जैसी बातों पर मूल्यों बल देता आया है।  ईरान की इस्लामी क्रांति में अध्यात्म और नैतिकता का विशेष स्थान था।  क्रांति के दौरान क्रांतिकारी, संघर्ष करने के साथ ही साथ आत्म प्रशिक्षण का भी प्रयास करते थे। 

 

ईरान की इस्लामी क्रांति ने यह विचार पेश किया कि नैतिकता व अध्यात्मे जीवन के समस्त क्षेत्रों में होना चाहिए।  इस क्रांति के अनुसार राजनीतिक को धर्म का एक भाग होना चाहिये। अतः आवश्यकता इस बात की है कि राजनेता और शासक, सदाचारिता और न्यायप्रेम को अपना आदर्श बनायें ताकि विश्व में हर स्थान पर शांति व सुरक्षा स्थापित हो सके। ईरान की इस्लामी क्रांति के आने से एक बार फिर पैग़म्बरे इस्लाम के सदाचरण और धार्मिक शिक्षाओं की ओर वापसी हुई। इन विशेषताओं के साथ इस्लामी क्रांति ने दर्शा दिया कि पैग़म्बरे इस्लाम और उनके पवित्र परिजनों के प्रयास के रूप में इस्लाम किसी समय या स्थान से विशेष नहीं है और इस्लाम के संबोधक समस्त काल के समस्त इंसान हैं और वह पूरी मानवता का कल्याण चाहता है।रित है।  विशेष बात यह है कि ईरान की इस्लामी क्रांति एसे क्षेत्र में आई जो क्षेत

वर्तमान काल के लोगों के लिए ईरान की इस्लामी क्रांति का एक संदेश, अत्याचार का मुक़ाबला करना है।  यह क्रांति ज़ायोनी शासन को पूर्ण रूप से अवैध शासन मानते हुए फ़िलिस्तीनियों को उनका मूल अधिकार दिलाने की पक्षधर है।  इसका अन्तर्राष्ट्रीय संदेश वर्चस्सवाद का कड़ा मुक़ाबला है।  इस्लामी क्रांति के अनुसार विश्व के हर हिस्से में वर्चस्ववाद का मुक़ाबला किया जाना चाहिए।  यही कारण है कि ईरान की इस्लामी लोकतांत्रिक व्यवस्था, जो इस्लामी क्रांति का ही परिणाम है, विश्व स्तर पर अन्याय की निंदा का मुक़ाबला करती है।  यह क्रांति अन्य राष्ट्रों के साथ मैत्रीपूर्ण संबधों की पक्षधर है।

ईरान की इस्लामी क्रांति का एक अन्य संदेश, अन्य धर्मों के साथ सहयोग बनाना है।  यह क्रांति अपने आरंभिक काल से ही इस्लामी देशों के बीच एकता की ध्वजवाहक रही है।  ईरान की विदेश नीति में परस्पर सम्मान के आधार पर पड़ोसियों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार को वरीयता दी गई है।

वर्तमान काल के इन्सान के लिए ईरान की इस्लामी क्रांति का मुख्य संदेश, आध्यात्म की ओर वापसी है।  यह संदेश केवल इस्लामी राष्ट्रों के लिए नहीं बल्कि पूरे संसार के लिए है।  यह संदेश उन लोगों के लिए विशेष रूप से है जो भौतिकवाद में पूरी तरह से डूब चुके हैं।  इस समय भौतिकवाद में डूबे समाजों में आत्महत्याएं, मनोरोग और नैतिक पतन जैसी विभिन्न प्रकार की समस्याएं पाई जाती हैं।  भौतिक संसाधनों से संपन्न होने के बावजूद आज का इन्सान स्वयं को अकेला पाता है।  एसे समाजों में झूठे धर्म बहुत तेज़ी से फैल रहे हैं।  इससे पता चलता है कि मनुष्य को आध्यात्म की आवश्यकता है।  आज जिधर भी देखों हर ओर भौतिकता दिखाई दे रही है और लोग दिन-प्रतिदनि भौतिकता में डूबते जा रहे है।  इन हालात को देखते हुए पता चलता है इन समस्याओं का समाधान आध्यात्म के पास मौजूद है।  इस्लामी शिक्षाएं, वर्तमान समय के आध्यात्मिक शून्य को भरने की क्षमता रखती हैं।  यही कारण है कि आज दुनिया में बहुत से लोग इस्लाम स्वीकार कर रहे हैं।

एक फ़्रांसीसी नागरिक मैरी फोलेट, अपने मुसलमान होने के बारे में कहती हैं कि अब मैं समझी हूं कि इस्लाम, शांति और प्रेम का संदेश है।  यह वही संदेश है जो यूरोपियों को बहुत तेज़ी से अपनी ओर खींच रहा है।  उन्होंने कहा कि मानवता को एसे क़ानून की ज़रूरत है जो उसकी समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति करता हो।  ईसाई धर्म की शिक्षाओं में यह विशेषता नहीं पाई जाती।  वे कहती हैं कि इस्लाम की विशेषता यह है कि इसकी शिक्षाएं बहुत साधारण होने के साथ ही बहुत व्यापक हैं।  इसमें व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों ढंग से जीवन व्यतीत करने के नियम बताए गए हैं।  इस्लामी शिक्षाओं में बताया गया है कि प्रलय के लिए इस संसार में ही तैयार की जाती है।  इस्लाम में नैतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और कई अन्य प्रकार के विषयों को पेश किया गया है।

न्यूज़ीलैण्ड की एक महिला श्रीमती मारिया जीन ने इस्लाम स्वीकार किया है।  वे कहती है कि लंबे समय से मैं इस्लाम और मुसलमानों के विरुद्ध दुष्प्रचार देख रही थी।  इसको देखते हुए मैंने इस्लाम का अध्ययन करने का निर्णय किया।  अध्ययन करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंची कि जो दुष्प्रचार किये जा रहे हैं इस्लाम उसके विपरीत है।  इस्लाम विरोधी दुष्प्रचार में इसे हिंसक धर्म दिखाया गया था जबकि अध्ययन से मैंने पाया कि ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्लामी शिक्षाओं में वे बातें बताई गई हैं जिनकी ज़रूरत स्वभाविक रूप में एक मनुष्य को होती है।  इन्हीं सब बातों को पढ़ने के बाद मैंने इस्लाम स्वीकार करने का निर्णय किया।

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद पश्चिमी सरकारों ने इस्लाम की छवि धूमिल करने के उद्देश्य से इस्लामोफोबिया फैलाना शुरू किया।  इस कार्य से उनका उद्देश्य यह था कि लोग इस्लाम की वास्तविक शिक्षाओं से दूर रहें।  पश्चिमी सरकारों की ओर से इस्लाम विरोधी प्रयास करने के बावजूद वर्तमान समय में स्थिति यह है कि यूरोप में लोग बहुत बड़ी संख्या में मुसलमान हो रहे हैं।

जिस प्रकार से ईरान में इस्लामी क्रांति और जागरूकता का आरंभ धार्मिक नेतृत्व से हुआ और बाद में वह चारों ओर फैल गई उसी प्रकार से दूसरे स्थानों पर भी धार्मिक नेतृत्व के माध्यम से ही अत्याचार का मुक़ाबला किया जा सकता है।  यह वही विषय है जो इस्लामी क्रांति का एक विषय रहा है।  इस्लामी क्रांति का दूसरे देशों में फैलना इस अर्थ में नहीं है कि किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया जाए बल्कि यह इस्लामी पहचान को समझने वालों के उत्तर के अर्थ में है।

 

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Feb ०४, २०१८ १७:२९ Asia/Kolkata
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