पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ईश्वरीय संदेश “वहि” की प्रतीक्षा में थे।

समय नहीं गुज़रा था कि ईश्वरीय दूत हज़रत जिब्राईल महान व सर्वसमर्थ ईश्वर का संदेश लेकर उतरे और कहा हे मोहम्मद! महान ईश्वर ने आपको सलाम कहा है और वह आदेश दिया है कि चालिस दिन खदीजा से दूर रहिये। इस आदेश के बाद पैग़म्बरे इस्लाम दिनों को रोज़ा रखने और रातों को उपासना करने लगे। पैग़म्बरे इस्लाम ने अम्मार को हज़रत ख़दीजा के घर भेजा ताकि वह यह कह सकें कि पैग़म्बरे इस्लाम ने जो आपसे दूरी की है वह ईश्वर का आदेश है न कि नाराज़गी और द्वेष के कारण।

 

पैग़म्बरे इस्लाम को इस प्रकार उपासना करते और रोज़ा रखते हुए चालिस दिन हो गये। हज़रत जिब्राईल दोबारा नाज़िल हुए। इस बार उनके हाथ में एक सेब था जिसे उन्होंने पैग़म्बरे इस्लाम को दिया और कहा हे मोहम्मद! ईश्वर ने आपको सलाम कहा है और यह उपहार आपके लिए स्वर्ग से भेजा है। पैगम्बरे इस्लाम ने उस सेब को खाया और हज़रत खदीजा के पास गये। हज़रत खदीजा जब बिस्तर से उठीं तो उन्होंने अपने पेट में हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के प्रकाश का आभास किया।

एक दिन पैग़म्बरे इस्लाम जब घर आये तो देखा कि हज़रत खदीजा किसी से बात कर रही हैं। उन्होंने पूछा हे खदीजा! तुम किससे बात कर रही थी? इस पर हज़रत खदीजा ने कहा मैं उस बच्चे से बात करती हूं जो मेरे पेट में है। इतने में हज़रत जिब्राईल नाज़िल हुए और कहा हे मोहम्मद! खदीजा से कह दीजिये कि जो शिशु उनके पेट में है वह बच्ची है और पैग़म्बर की नस्ल उसी से चलेगी।

पैग़म्बरे इस्लाम को अपनी पैग़म्बरी की घोषणा किये हुए पांच साल का समय हो चुका था। 20 जमादीस्सानी का दिन था। हज़रत खदीजा को प्रसव पीड़ा होने लगी। उन्होंने किसी को कुरैश और बनी हाशिम की महिलाओं के पास भेजा ताकि वे उनकी सहायता करें परंतु उन सबने सहायता करने से इंकार कर दिया।

 

हज़रत खदीजा प्रसव पीड़ा के साथ अकेली थीं अचानक उन्होंने देखा कि चार महिलाएं उनके पास आ गयी हैं। यह देखकर वह डर गयीं। आने वाली महिलाओं ने उनसे कहा हे खदीजा परेशान व दुःखी न हो  डरो   नहीं हमें ईश्वर ने भेजा हैं। उन चार महिलाओं में हज़रत इब्राहीम की पत्नी की सारा, फिरऔन की पत्नी आसिया, हज़रत इमरान की बेटी और हज़रत ईसा की मां हज़रत मरियम और हज़रत मूसा की बहन कुलसूम थीं। ये चारों महिलाएं हज़रत खदीजा के चारों ओर बैठ गयीं।

हज़रत खदीजा ने पवित्र बच्ची को जन्म दिया। उस बच्ची के प्रकाश से समूचा घर प्रकाशित हो उठा। स्वर्ग की अप्सरायें कौसर का जल लेकर हज़रत खदीजा के घर आयीं और उस जल से बच्ची को नहलाया और उसे दूध से अधिक सफेद एक कपड़े में लपेट दिया। उस सफेद कपड़े से कस्तूरी की सुगंध आ रही थी।

उस बच्ची का नाम रखना चाहते थे कि महान ईश्वर की ओर से हज़रत जिब्राईल नाज़िल हो गये और उस बच्ची का नाम फातेमा रखा। यह इस्लाम में पहला बच्चा था जिसका नाम फातेमा रखा जा रहा था और यह पहली बच्ची थी जिसने अज्ञानता के काल में महिलाओं के संबंध में अरबों के दृष्टिकोण को बदल दिया। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर खुशी मनाई जाती है और इस दिन का नाम ईरान में महिला दिवस रखा गया है।

जो चीज़ इंसान के अस्तित्व को मूल्यवान बनाती है और उसके कार्यों व  दृष्टिकोणों को व्यवस्थित बनाती है वह इंसान की सोच है और जो चीज़ इंसान की सोच को दिशा प्रदान करती है वह ज्ञान है। इसी प्रकार जो चीज़ इंसान की सोच और ज्ञान को प्रभावी व लाभदायक बनाती है वह महान ईश्वर पर ईमान है। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा समस्त मानवीय और नैतिक सदगुणों से सम्पन्न थीं। वह महान ईश्वर की उपासना और प्रार्थना को बहुत अधिक पसंद करती थीं।

हज़रत फातेमा की एक प्रसिद्ध उपाधि ज़हरा है जिसका अर्थ प्रकाश है। इमाम जाफर सादिक अलैहिस्सलाम से पूछा गया कि हज़रत फातेमा को ज़हरा क्यों कहा गया? तो इमाम ने फरमाया। क्योंकि जब हज़रत फातेमा उपासना के लिए खड़ी होती थीं और उपासना में लीन हो जाती थीं तो आसमान पर रहने वालों पर उनका प्रकाश चमकता था जिस तरह तारे ज़मीन वालों के लिए चमकते हैं।" हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के ज्ञान का संबंध पैग़म्बरे इस्लाम के ज्ञान के कारण बहुत मज़बूत था। वह हदीसों अर्थात पैग़म्बरे इस्लाम के कथनों को बयान करती थीं। पैग़म्बरे इस्लाम की एक पत्नी उम्मे सलमा और कुरैश की दूसरी महिलाओं से भेंट में विद्वानों की भाषा में बात करती थीं और ज़रुरत पड़ने पर यहां तक कि खलीफा और कुछ लोगों की उपस्थिति में उन्होंने मस्जिद में एतिहासिक भाषण दिया और पैगम्बरे इस्लाम के बाद समाज के गुमराह हो जाने के प्रति चेतावनी दी। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की दासी और उनकी शिष्या हज़रत फिज़्ज़ा ने लगभग 20 वर्षों तक पवित्र कुरआन के अलावा किसी दूसरी भाषा में बात ही नहीं की।

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा जहां बात करने में एक अच्छी वक्ता थीं वहीं व्यवहार व आचरण में भी पवित्रता की प्रतिमूर्ति थीं। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा का मानना था कि महिला के लिए बेहतरीन चीज़ यह है कि न उसे कोई मर्द देखे और न वह किसी नामहरम मर्द को देखे। पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को बहुत चाहते थे। एक स्थान पर वह फरमाते हैं” फातेमा मेरा टुकड़ा है।“ बाप और बेटी के बीच जो संबंध था उसका आधार प्रेम, आदर- सम्मान और शिष्टाचार था। पैग़म्बरे इस्लाम जब भी हज़रत फातेमा के पास जाते थे वह उनके सम्मान में खड़ी हो जाती थीं और अपनी जगह पर उन्हें बिठाती थीं और पैग़म्बरे इस्लाम भी एसा ही करते थे। ईरान की इस्लामी व्यवस्था के संस्थापक स्वर्गीय इमाम खुमैनी के शब्दों में” इस्लामी इतिहास पैग़म्बरे इस्लाम द्वारा इस पैदा होने वाले बच्चे अर्थात हज़रत फातेमा के प्रति बेहिसाब सम्मान का साक्षी है ताकि यह दिखा दे कि समाज में महिला की विशेष महानता है अगर मर्दों से अधिक नहीं है तो कम भी नहीं है।“

पवित्र कुरआन ने हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की बहुत प्रशंसा की है। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की प्रशंसा में पवित्र कुरआन का सूरे कौसर नाज़िल हुआ है जो उनकी महानता का मुंह बोलता सबूत है। इस सूरे में महान व सर्वसमर्थ ईश्वर हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के जन्म की शुभ सूचना पैग़म्बरे इस्लाम को देता और कहता है कि पैग़म्बरे इस्लाम को बहुत अधिक भलाई दी गयी है और उनकी नस्ल ख़त्म नहीं होगी।

इस्लामी विद्वान और धर्मगुरु हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की शान और उनकी महानता के बारे में पवित्र कुरआन की दूसरी आयतों को बयान करते हैं जैसे आयते मुबाहेला, आयते मवद्दत और आयते तत्हरीर। प्रसिद्ध सुन्नी विद्वान जलालुद्दीन सियुती पवित्र कुरआन की अपनी व्याख्या की किताब में विभिन्न हवालों से लगभग 20 रिवायतों को बयान करते हुए पवित्र कुरआन के सूरे अहज़ाब की 33वीं आयत के बारे में कहते हैं” आयत में जो अहले बैत का उल्लेख हुआ है उससे तात्पर्य केवल पैग़म्बरे इस्लाम, अली, फातेमा, हसन और हुसैन हैं।“

यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि पवित्र कुरआन के सूरे अहज़ाब की 33वीं आयत में आया है कि ईश्वर तुम अहलेबैत को हर बुराई व गंदगी से पाक रखना चाहता और तुम्हें उस तरह से पवित्र रखेगा जिस तरह से पवित्र रखने का हक है।

पवित्र कुरआन की यह आयत, आयते ततहीर के नाम प्रसिद्ध है और यह आयत पैग़म्बरे इस्लाम की एक पत्नी उम्मे सल्मा के घर में पैग़म्बरे इस्लाम पर नाज़िल हुई थी। इमाम अहमद बिन हंबल उम्मे सलमा के हवाले से लिखते हैं" पैग़म्बरे इस्लाम ने हज़रत फातेमा से कहा अपने पति और अपने दोनों बेटों को मेरे पास लाओ। जब वे पैग़म्बरे इस्लाम की सेवा में पहुंचे तो पैगम्बरे इस्लाम ने उन सब पर अबा अर्थात कपड़े के उपर से ओढ़ा जाने वाला एक विशेष प्रकार का वस्त्र उन पर डाल दिया और अपना पावन हाथ उन सब पर रखा और फरमाया। पालने वाले यह हमारे अहले बैत हैं। इन पर अपना सलाम भेज कि तू महान है। उम्मे सल्मा कहती हैं मैंने अबा का एक कोना उठाया ताकि मैं भी उनमें शामिल हो जाऊं। पैग़म्बरे इस्लाम ने मुझे अनुमति नहीं दी और सम्मान के साथ कहा अलबत्ता, तुम भी नेकी व भलाई पर हो।

इब्ने हजर हैसमी भी कहते हैं कि अधिकांश व्याख्याकर्ताओं का मानना है कि आयते ततहीर अली, फातेमा, हसन व हुसैन के बारे में नाज़िल हुई है।

सादा व साधारण जीवन और कम से कम पर राज़ी रहना हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की मुख्य विशेषताएं हैं। वह जब बाप के घर थीं या अपने पति के घर में थीं तो उनकी यही विशेषता थी। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की जो आत्मिक विशेषता यह थी वह उन्हें सांसारिक चमक दमक व मोह- माया से दूर रखती थी। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा का पूरा जीवन सादा और अध्यात्म से भरा था। वह फरमाती हैं” तुम्हारी दुनिया की मुझे तीन चीज़ें पसंद हैं” ईश्वर की किताब की तिलावत, पैग़म्बरे इस्लाम के चेहरे को देखना और ईश्वर की राह में दान देना।

पैग़म्बरे इस्लाम की एक पत्नी आयशा कहती हैं" मैंने किसी को नहीं देखा जो बात करने और जीवन शैली में फातेमा से अधिक पैग़म्बरे इस्लाम से मिलता- जुलता हो। अपने बेटी के प्रति बाप का प्रेम इस सीमा तक था कि जब भी पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत फातेमा को देखते थे फरमाते थे" फातेमा के अस्तित्व से मुझे स्वर्ग की सुगंध आती है।"

हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा संपूर्ण महिला एक उत्कृष्टतम नमूना हैं। उन्होंने सांसारिक लाभ के लिए कभी भी अपने व्यक्तित्व के किसी भी पहलू की भेंट नहीं चढ़ायी और उन्होंने अपने सद्व्यवहार से दर्शा दिया कि परिपूर्णता के शिखर को तय करने की उनके अंदर क्षमता मौजूद है। हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा दुनिया की समस्त महिलाओं को मानवता और ईश्वरीय भय के शिखर दृष्टि से देखती हैं और उन सबका आह्वान इस रास्ते को तय करने के लिए करती हैं।

 

Mar १०, २०१८ १२:१८ Asia/Kolkata
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