इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई ने हज के अवसर पर हाजियों के नाम अपने संदेश में मुसलमानों में एकता को अत्याधिक महत्वपूर्ण बताया है। वरिष्ठ नेता का हज संदेश इस प्रकार हैः

 

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

धन्य है ईश्वर और सलाम हो उसके संदेशवाहक और उनके पवित्र वंश पर। ईश्वर ने कहा है कि लोगों को हज के लिए पुकारो ताकि वह पैदल और दूर से आने वाले कमज़ोर ऊंटों पर सवार होकर तुम्हारे पास आएं ताकि अपने लाभ को देखें और विशेष दिनों में अल्लाह के नाम को याद करें।

आसमान से आने वाले यह पुकार, यथावत दिलों को बुला रही है और सदियों व युगों से मानवता को, एकेश्वरवाद के ध्रुव पर एकजुट होने का बुलावा दे रही है। मानव समाज का हर सदस्य, इस इब्राहीमी पुकार का गंतव्य है और हरेक को यह गौरव प्राप्त है भले ही बहुत से लोगों के कान यह पुकार न सुन पाएं और भले ही अचेतना व अज्ञानता के पर्दे के पीछे होने की वजह से  बहुत से लोगों के दिल उससे वंचित हों  भले ही कुछ लोग इस अतंरराष्ट्रीय आतिथ्य में शामिल होने की योग्यता स्वंय में पैदा न कर पाएं या किसी वजह से यह गौरव उन्हें प्राप्त न हो।

इस समय आप को यह गौरव प्राप्त है और आप लोगों ने ईश्वरीय अतिथिगृह की शांतिमय घाटी में क़दम रखा है, अरफात, मशअर, मेना, सफा व मरवा, काबा, मस्जिदुल हराम , मस्जिदुन्नबी, इन संस्कार का एक एक चरण, सब कुछ , हज के लिए आध्यात्म व आत्मा के विकास की कड़ी है इस लिए इस अवसर का मूल्य समझें और उसे अपनी पवित्रता के लिए प्रयोग करें और बची हुई आयु में उससे लाभ उठाएं।

वह बिन्दु जो सोचने वाले हर मनुष्य को चिंतन व संवेदनशीलता पर उभारता है, वह सभी लोगों, सभी पीढ़ियों, के लिए हर साल एक स्थाई स्थल का निर्धारण, एक निर्धारित बिन्दु पर एक निर्धारित समय में सब को एकत्रित करना है। समय व स्थल की यह एकता हज के संस्कार का एक रहस्य है। निसंदेह " अपने हितों को देखें " का एक बेहतर व  स्पष्ट अर्थ काबे के पास इस्लामी राष्ट्र के सदस्यों की एक दूसरे से वार्षिक भेंट है। यह, इस्लमी एकता का राज़ और इस्लाम की ओर से राष्ट्र निर्माण का प्रतीक है जो अल्लाह के घर की छत्रछाया में होना चाहिए । अल्लाह का घर, सब का है, चाहे वहां रहने वाला हो, चाहे रेगिस्तान से आया हुआ हो, । हज इस स्थान पर और इस निर्धारित समय में हमेशा, और हर साल, अत्यन्त स्पष्ट व तार्किक भाषा में मुसलमानों को एकता की ओर बुलाता है और यह चीज़, इस्लाम के दुश्मनों की इच्छा के विपरीत है कि जो हर युग में और विशेषकर वर्तमान समय में, मुसलमानों को एक दूसरे के खिलाफ खड़े होने के लिए भड़काते रहते हैं। आज आप साम्राज्यवादी अमरीका के व्यवहार को देखें। इस्लाम और मुसलमानों के प्रति उसकी मुख्य नीति, युद्ध भड़काना है। उसकी दुष्टतापूर्ण कोशिश और इच्छा, एक दूसरे के हाथों मुसलमानों का जनसंहार है। कुछ अत्याचारियों को पीड़ितों पर अत्याचार के लिए प्रोत्साहित करना, अत्याचारियों का समर्थन करना, उसके हाथों पीड़ितों का क्रूरता के साथ दमन करना, और इस भयानक साज़िश की आग को हमेशा जलाए रखना, उसकी नीतियों में शामिल है। मुसलमानों को सचेत रहना  और इस शैतानी नीति को विफल बनाना चाहिए। हज, इस प्रकार की चेतना की भूमिका तैयार करता है, हज के दौरान, अनेकेश्वरवादियों और साम्राज्यवादियों से विरक्तता की घोषणा की मुख्य वजह यही है।

ईश्वर को याद करना, हज की आत्मा है। हर हाल में हमें अपने दिलों को इस कृपा की फुहार से जीवन व प्रफुल्लता प्रदान करना चाहिए और उस पर भरोसे व विश्वास को ,  कि जो शक्ति, वैभव, न्याय व सुन्दरता की जड़ व स्रोत है, अपने दिलों की गहराई में उतारना चाहिए। इस दशा में हम दुश्मन की हर धूर्तता के मुक़ाबले में कामयाब होंगे। प्रिय हाजियो! सीरिया, इराक़, फिलिस्तीन, अफगानिस्तान, यमन, बहरैन, लीबिया, पाकिस्तान, कश्मीर व मियांमार सहित अन्य क्षेत्रों में इस्लामी राष्ट्र और पीड़ितों के लिए दुआ को भूलिएगा नहीं और ईश्वर से प्रार्थना करें कि अमरीका और अन्य साम्राज्यवादियों के हाथ कट जाएं।

वस्सलामो अलैकुम व रहमतुल्लाह

सैयद अली ख़ामेनई

7 ज़िलहिज्जा सन 1439 हिजरी क़मरी 

 

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Aug २०, २०१८ १७:०४ Asia/Kolkata
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