Feb ०६, २०१९ १७:१६ Asia/Kolkata

ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता का जश्न हर वर्ष की भांति पूरे हर्षोउल्लास से मनाया जा रहा है।

हर वर्ष की भांति ईरानी जनता 12 बहमन को तथा अत्याचारी और पिट्ठू शाही व्यवस्था के पतन की चालीसवीं वर्षगांठ के अवसर पर इस साल भी सड़कों पर निकली और इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी तथा क्रांति के मार्ग में शहीद होने वाले हज़ारों शहीदों की याद मना रही है।  यह वह शहीद थे जिन्होंने इस्लामी क्रांति की सफलता और इस्लामी व्यवस्था को मज़बूत करने के मार्ग में अपने प्राणों को न्योछावर कर दिए।

इस वर्ष ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता की चालीसवीं वर्षगांठ के जश्न मनाए जाने की दो महत्वपूर्ण विशेषता है। इन कार्यक्रमों और उत्सवों की पहली विशेषता, इस्लामी क्रांति के दुश्मनों विशेषकर अमरीका और अवैध ज़ायोनी शासन के षड्यंत्रों का जवाब देना है। इस प्रकार से कि अमरीका के दिल में द्वेष रखने वाले कुछ अधिकारियों ने इस्लामी क्रांति के बारे में कहा था कि इस्लामी गणतंत्र ईरान अपनी चालीसवीं वर्षगांठ में गंभीर चुनौतियों का सामना करेगा, यहां तक कि व्यवस्था धराशायी हो जाएगी। अमरीका ने इस्लामी क्रांति की सफलता के आरंभिक दिनों से ही हमेशा से ईरानी व्यवस्था को गिराने का प्रयास किया है। ईरान का तानाशाह मुहम्मद रज़ा पहलवी अमरीका का पिट्ठु था और ईरान, मध्यपूर्व के क्षेत्र में अमरीका की दो स्तंभीय रणनीति का मुख्य स्तंभ था। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति और यह रणनीति बनाने वाले रिचर्ड निकसन ने ईरान को मध्यपूर्व क्षेत्र में अमरीका के हथकंडे और साधन के रूप में याद करते थे।

 

अमरीका की मध्यपूर्व की रणनीति की परिधि में मुहम्मद रज़ा पहलवी के हवाले आधुनिक हथियार और सैन्य उपकरण किए गये। ईरान में चालीस हज़ार से अधिक अमरीकी सलाहकार सक्रिय थे और व्यवहारिक रूप से ईरान में उन्हीं का राज था। मुहम्मद रज़ा पहलवी अमरीका का पिट्ठु था। ईरान में अमरीकी राजदूत, हर अधिकारी से अधिक ईरान के शाह से निकट था और शाह हर फ़ैसले में सबसे पहले उनसे सलाह लेता था। ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता अमरीका की विस्तारवादी नीतियों पर बहुत बड़ा हमला था। यही कारण है कि ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के आरंभसे ही अमरीकी सरकार ने इस्लामी सरकार को गिराने के लिए किसी भी प्रकार के संकोच से काम नहीं लिया।  पिछले चालीस वर्षों के दौरान अमरीका ने समस्त क्रांति विरोधी गुटों और धड़ों तथा अलगाववादियों का समर्थन किया और उनके साथ सांठगांठ की है।  इसी के साथस अमरीकी सरकार ने आर्थिक प्रतिबंधों, अधिकारियों की टारगेड किलिंग, तथा अलगावादियों और भगौड़े विरोधियों का समर्थन करके और फिर ईरान पर हमले के लिए सद्दाम का समर्थन करके ईरान की सरकार को गिराने के लिए बहुत अधिक प्रयास किए।

इस्लामी गणतंत्र ईरान से अमरीका की इस शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों के कारण पिछले चार दश्कों के दौरान इस्लामी व्यवस्था और अधिक मज़बूत हुए और इस्लामी व्यवस्था के आधार और अधिक सुदृढ़ और मज़बूत हुए हैं और इसी के साथ इस्लामी गणतंत्र ईरान के नेताओं की दुनियाभर में लोकप्रियता पहले से अधिक बढ़ी है। इस प्रकार से इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी की शवयात्रा में लगभग पूरे ईरान से एक करोड़ लोगों ने भाग लिया। यह संख्या, 15 साल के निर्वासन से लौटते समय स्वागत के लिए एकत्रित हुई जनता के दो गुना था। पहली फ़रवरी 1979 को हवाई अड्डे से तेहरान की सड़कों पर इमाम ख़ुमैनी के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। इमाम ख़ुमैनी के उतराधिकारी और इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई भी ज़िम्मेदारियां और नेतृत्व की बागडोर संभालने के लगभग तीन दश्क बीत जाने के बाद आज भी ईरानी जनता के बीच सबसे अधिक लोकप्रिय व्यक्ति हैं।

 

पिछले चालीस वर्षों के दौरान ईरान की जनता ने 36 चुनावों में भरपूर ढंग से भाग लिया और इनमें से हर एक अपने पहले अतीत के चुनाव से अधिक भव्य रहा है। वर्ष 2017 में ईरान में 12वां राष्ट्रपति चुनाव हुआ जिसमें लगभग 73 प्रतिशत मतदताओं ने भाग लिया। इस चुनाव में राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने 56 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे और एक बार फिर वह चार साल के लिए राष्ट्रपति बने।

पिछले चालीस वर्षों के दौरान इस्लामी गणतंत्र ईरान के विरुद्ध अमरीकी की अपनी समस्त कार्यवाहियों के विफलता के बावजूद, अमरीकी सरकार ने इसी प्रकार क्षेत्र और दुनिया में विभिन्न बहानों से ईरानोफ़ोबिया की लहरें शुरु करा दीं ताकि वह अपनी तुच्छ सोच से कि वह इस कार्यवाही से ईरान की व्यवस्था को गिरा देगा किन्तु वाशिंग्टन की समस्त कार्यवाहियों के बावजूद ईरान की इस्लामी व्यवस्था के आधार इतने अधिक मज़बूत हुए हैं कि आज ईरान मध्यपूर्व की शांति और सुरक्षा में एक प्रभावी देश, क्षेत्र के संकटों से निपटने वाले एक महत्वपूर्ण देश में बदल चुका है।

पिछले आठ वर्षों के दौरान इस्लामी गणतंत्र ईरान, सऊदी अरब, अमरीका और क्षेत्र तथा क्षेत्र की बाहर की कुछ सरकारों के समर्थित आतंकवादी गुटों से संघर्ष में अग्रणी रहा है। अमरीकी सरकार यथावत यह सोच रही है कि आर्थिक प्रतिबंधों और मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़कर ईरान में अप्रसन्नता पैदा करके ईरान की जनता को सरकार करे मुक़ाबले में लाकर खड़ा कर देगी। अमरीकी सरकार ने वर्ष 2018 के आरंभ में सोचा कि कुछ लोगों की अप्रसन्नताओं और दंगों का व्यापक स्तर पर समर्थन करके वह जनता को निर्वाचित सरकार के मुक़ाबले में  खड़ा कर देगी किन्तु जनता द्वार दंगाईयों के व्यापक विरोध और इस्लामी क्रांति की सफलता की 39वीं वर्षगांठ के अवसर पर जनता की व्यापक स्तर पर उपस्थिति से इस्लामी क्रांति के दुश्मनों के सारे षड्यंत्र विफल होकर रह गये।

इस्लामी क्रांति की सफलता की 40वीं वर्षगांठ पर होने वाले व्यापक प्रदर्शनों और रैलियों में व्यापक स्तर पर जनता की उपस्थिति, इस्लामी क्रांति के बारे में निराधार दावे करने वालों के मुंह पर एक और ज़ोरदार तमाचा और दुनिया के लिए यह संदेश भी लिए हुए है जैसा कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने कहा है कि ईरान की इस्लामी क्रांति ने अपनी चलना शुरु किया है, उसे बहुत लंबी यात्रा करनी है और आगामी वर्षों में अपने लक्ष्यों तक पहुंचने का प्रयास करेगा।

 

अमरीका में डोनल्ड ट्रम्प के सत्ता में पहुंचने के बाद से ईरान के विरुद्ध अमरीका की कार्यवाहियों का नया दौर शुरु हो गया किन्तु ट्रम्प को ईरान के विरुद्ध सीधी कार्यवाही करने में बहुत सी रुकावटों का सामना करना पड़ा। इन्हीं रुकावटों में से एक ईरान और गुट पांच धन एक के बीच होने वाला परमाणु समझौता जेसीपीओए था। इस्लामी गणतंत्र ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम की शांतिपूर्ण प्रवृत्ति को साबित करने तथा देश के परमाणु कार्यक्रम को ख़तरा बताने की ज़ायोनी नीति को विफल बनाने के लिए कुछ निर्धारित समय के लिए अपनी शांतिपूर्ण गतिविधियों व शोध के लिए कुछ सीमत्ताओं को स्वीकार कर लिया। अमरीका सहित ईरान से वार्ता करने वाले पक्षों ने तेहरान की ओर से इस वचन बद्धता के बाद ईरान के विरुद्ध आर्थिक प्रतिबंधों को समाप्त करने का वचन दिया था।  यह समझौता सुरक्षा परिषद में पास भी हो गया किन्तु अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को अमरीका के इतिहास का सबसे बुरा समझौता क़रार दिया और वह मई 2018 में इस समझौते से निकल गये।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ईरान पर सारे प्रतिबंध लौटा दिए और ईरान के साथ आर्थिक और व्यापारिक लेनदेन करने वाले पक्षों को धमकी दे दी कि यदि उन्होंने ईरान के साथ लेनदेन जारी रखी तो उन पर प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे किन्तु अमरीका की इस कार्यवाही पर यूरोपीय संघ की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने है और फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जो गुट पांच धन एक के सदस्य भी थे, इस समझौते पर प्रतिबद्ध रहने पर बल दिया और कहा कि वे अमरीकी प्रतिबंधों को प्रभावहीन बनाने के लिए एक वित्तीय मैकेनिज़्म लागू करेंगे। यूरोपीय संघ की ओर से किए गये वादे और ईरान से वित्तीय लेनदेन के लिए मैकेनिज़्म बनाया जाना, दस महीने के विलम्ब के बाद आख़िरकार शुरु हो गया और इस्लामी क्रांति की 40वर्षगांठ के अवसर पर इसे रजिस्टर्ड कर लिया गया। परमाणु समझौते को लेकर अमरीका और यूरोप के बीच मतभेद के गहराने के बावजूद, ट्रम्प सरकार और उनके सलाहकारों को इस्लामी क्रांति की 40वीं वर्षगांठ पर ईरान में सरकार गिरने की बहुत अधिक आशाएं थीं ।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शहीदों के परिजनों से मुलाक़ात में हॉट समर नामक विफल अमरीकी योजना की विफलता के बारे में कहा कि ईरान के दुश्मनों और अमरीका का लक्ष्य यह था कि प्रतिबंधों और सुरक्षा विरोधी कार्यवाहियों द्वारा देश में दो गुट, मतभेद और गुटों के बीच युद्ध छेड़ देगा, और कुछ लोगों को सड़कों पर खींच लाएगा, इसका नाम भी उन्होंने हॉट समर रखा था किन्तु नज़र न लगे, इस वर्ष गर्मी का मौसम, गर्मी के बेहतरीन मौसमों में से था।

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने हॉट समर नामक योजना और परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने पर अमरीकी अधिकारियों को संबोधित करते हुए जिन्होंने कहा था कि ईरानी जनता क्रांति की 40वीं वर्षगांठ नहीं देख पाएगी, कहा कि ईरानी राष्ट्र इस वर्ष भी क्रांति की सफलता की वर्षगांठ के अवसर पर सड़कों पर निकलेगी, रैलियां करेगी और जश्न मनाएगी।

वास्तविकता भी यही है कि इस्लामी क्रांति पिछले चालीस वर्षों से अपनी परिपूर्णता का मार्ग तय कर रही है और विश्व साम्राज्य और वर्चस्ववादी व्यवस्था के मुक़ाबले में प्रतिरोध तथा डटे रहने को दुनिया में फैलाया है। इन सभी चीज़ों ने इस्लामी गणतंत्र ईरान को एक मज़बूत व्यवस्था बना दिया है जो दुनिया की राजनीति में उभरता हुआ सूर्य और चमकता हुआ भविष्य प्रतीत होता है। (AK)

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