Jun २३, २०२१ १८:५७ Asia/Kolkata
  • भारत से हुए वैक्सीन कांट्रैक्ट पर ब्राज़ील में बवाल, करप्शन के संदेह में जांच शुरू

ब्राज़ील के फ़ेडरल प्रासिक्यूटर्ज़ ने भारत के साथ हुए 320 मिलियन डालर के कोविड-19 वैक्सीन के सौदे के बारे में जांच शुरू कर दी है। ब्राज़ील ने भारत बायोटेक द्वारा निर्मित वैक्सीन के 2 करोड़ डोज़ के लिए 32 करोड़ डालर का सौदा किया था।

महान्यायवादी के कार्यालय पीजीआर का कहना है कि महंगे दाम, बहुत तेज़ गति से बातचीत, रेग्युलेट्री अप्रूवल की पेंडिंग आपत्तिजनक है।

भारत के साथ हुए इस कांट्रैक्ट के बारे में ब्राज़ील की सेनेट ने भी ब्राज़ील में भारत की मध्यस्थ कंपनी प्रेशिसा मेडिकामेन्टोस से पूछगछ की तैयारी शुरू कर दी है।

आरंभिक जांच के पक्ष में अपने तर्क रखते हुए प्रासिक्यूटर्ज़ ने एक दस्तावेज़ जारी किया है जिसके अनुसार प्रेशीसा कंपनी के पार्टनर्ज़ में ग्लोबल साउदे कंपनी भी शामिल है जिस पर हेल्थ मिनिस्ट्री को दवाएं बेचने के बावजूद सप्लाई न करने का आरोप है और पुलिस इस मामले में जांच कर रही है।

प्रेशिसा का कहना है कि उसे प्रोसिक्यूटर्ज़ की ओर से की जा रही जांच के बारे में कोई सूचना नहीं है और सेनेट के जांचकर्ताओं के साथ वह पूरा सहयोग करेगी। कंपनी का कहना है कि भारत की वैक्सीन की क़ीमत के मामले में पूरा सौदा पारदर्शी है और वैक्सीन की वही क़ीमत रखी गई जिस क़ीमत पर दुनिया के एक दर्जन से अधिक अन्य देशों ने यह वैक्सीन ख़रीदी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि लीगल डिपार्टमेंट ने केस की जांच शुरू कर दी है अलबत्ता प्रेशिसा कंपनी को किसी तरह की अदायगी नहीं की गई है।

प्रासिक्यूटर्ज़ ने यह सवाल उठाया है कि हेल्थ मिनिस्ट्री भारत वैक्सीन को ख़रीदने पर क्यों तैयार हो गई जबकि अभी इसके रास्ते में रेग्युलेट्री अड़चनें मौजूद थीं।

हेल्थ मिनिस्ट्री ने एक डोज़ के लिए 15 डालर की क़ीमत अदा की है जो फ़ायज़र की क़ीमत से काफ़ी ज़्यादा है और फ़ायज़र को रेग्युलेट्री अप्रूवल भी हासिल है।

प्रासिक्यूटर्ज़ का कहना है कि इस मामले की क्रिमनल और सिविल दोनों पहलुओं से जांच की जा रही है।

भारतीय कंपनी की ओर से इस बारे में अभी कोई टिप्पणी नहीं आई है।  

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