Oct १७, २०२१ ११:२० Asia/Kolkata
  • कश्मीर में हिंसा में नई तेज़ी...अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान के नियंत्रण से चिंता में है दिल्ली सरकार

भारत सरकार इस समय इस बात पर गहरी चिंता में है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान का शासन स्थापित हो जाने के बाद भारत नियंत्रित कश्मीर में हिंसक घटनाएं बढ़ रही हैं और हालिया दिनों कम से कम 9 सैनिक मारे गए हैं जबकि सुरक्षा बलों के हमलों में भी अनेक लोगों की मौत हुई है।

इस चिंता के कारण भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों रोम में आयोजित जी-20 की शिखर बैठक में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को आतंकवाद और चरमपंथ का नया ठिकाना बनने से बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों की ज़रूरत है।

अगस्त में अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान का नियंत्रण हो जाने के बाद से कश्मीर में हिंसा बढ़ी है और दोनों ओर से 40 लोग मारे गए हैं जबकि सैकड़ों लोगों को गिरफ़तार किया गया है।

भारत सरकार ने कश्मीर में बढ़ती हिंसा को अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान से शासन से तो नहीं जोड़ा है लेकिन कश्मीर नियंत्रण रेखा के क़रीब भारतीय सैनिकों की गश्त और तैनाती बढ़ गई है।

नरेन्द्र मोदी ने अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाक़ात में अपनी चिंता ज़ाहिर की और राष्ट्र संघ महासभा के अधिवेशन में भी भारत ने ज़ोर दिया कि अफ़ग़ानिस्तान को कोई भी हथकंडे के रूप में इस्तेमाल न करने पाए।

भारत को यह चिंता है कि कश्मीर में नए सिरे से हथियारों और लड़ाकों की बाढ़ न शुरू हो जाए। भारत के चीफ़ आफ़ आर्मी स्टाफ़ जनरल नरवणे ने हाल ही में बयान दिया कि अतीत से जो पाठ मिले हैं उनके आधार पर हम कह सकते हैं कि इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में जब तालेबान का शासन था तो जम्मू व कश्मीर में हमें अफ़ग़ान मूल के लड़ाकों से मुक़ाबला करना पड़ा था अतः हमें यह सोचना चाहिए कि वही स्थिति दोहराई जा सकती है।

कश्मीर में वैसे तो प्रदर्शनों पर रोक लगी हुई है लेकिन कुछ लोगों ने अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान शासन की स्थापना पर ख़ुशी ज़ाहिर की।

श्रीनगर में एक व्यापारी ने एएफ़पी से बातचीत में कहा कि जब तालेबान ने सुपर पावर को हरा दिया तो हम भी अपनी आज़ादी हासिल कर सकते हैं।

अफ़ग़ानिस्तान में ट्रेनिंग ले चुके एक कश्मीरी छापामार ने कहा कि तालेबान की विजय से हमें नया उत्साह मिला है।

भारत के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने एएफ़पी से बातचीत में कहा कि सुरक्षा बलों के भीतर थोड़ा भय दिखाई  दे रहा है।

वाशिंग्टन स्थित विल्सन सेंटर में दक्षिणी एशिया के मामलों के विशेषज्ञ माइकल कोगलमैन ने कहा कि तालेबान नेता हो सकता है कि कश्मीर में झड़पों को हवा दें, तालेबान ख़ुद तो इस लड़ाई में शामिल नहीं होंगे लेकिन उनके क़न ने कहा कि तालेबान नेता हो सकता है कि कश्मीर मरीबी लोग यह काम कर सकते हैं। तालेबान के भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते हैं जिन्हें वह ख़त्म नहीं करना चाहेंगे।  

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