Oct २५, २०२१ ११:५० Asia/Kolkata
  • भारतः विवादित सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने स्कूल परिसर में हो रही नमाज़ पर उठाया सवाल

भारतीय जनता पार्टी की विवादित सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने स्कूल परिसर में दशकों से हो रही नमाज़ पर आपत्ति जताई है।

मीडिया में आने वाली जानकारी के अनुसार भोपाल के केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 को लेकर यह मामला उठा है जो 7 नंबर क्षेत्र में है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सेंट्रल स्कूल के कैम्पस में बनी एक मस्जिद में शुक्रवार को परिसर में हो रही नमाज़ के वक्त स्थानीय सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर पहुंच गईं और उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से इस मामले में पूछताछ की, अब सांसद इस मामले को लेकर प्रिंसिपल को ज़िम्मेदार मान रही हैं। वहीं मस्जिद में नमाज़ पढ़ने वाले लोगों का कहन है कि यह मस्जिद 1966 से इस जगह पर है।

मालेगांव बम धमाकों की आरोपी और भाजपा सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि स्कूल में नमाज़ पढ़ने के लिए जिस तरह से लोगों को आने दिया जा रहा था वो ग़लत है, वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता बाहर ही खड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह बच्चों की सुरक्षा को ख़तरा है, लेकिन इसकी शिकायत कभी भी स्कूल प्रिंसिपल ने नहीं की।

वैसे अब तक स्कूल परिसर में छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया है।

इस स्कूल के चारों तरफ़ शिक्षा संस्थाएं हैं और क़रीब में ही लड़कियों का कॉलेज भी है, वहीं स्कूल प्रिंसिपल सूर्यकांत पाठक का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ उस जगह पर यथास्थिति बनाए रखी है।

सांसद को इसी बात से एतराज़ था कि प्रिंसिपल ने इस मामले की शिकायत क्यों नहीं की, वहीं उन्होंने इस मुद्दे पर प्रिंसिपल से कई सवाल किए और उनका आरोप है कि प्रिंसिपल बचाव ही करते रहे।

प्रज्ञा ठाकुर अपने विवादित अतीत और भड़काऊ बयानों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने एक बार तो महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे से भी अपनी गहरी श्रद्धा ज़ाहिर की थी जिस पर बवाल भी हुआ था।

प्रज्ञा ठाकुर शुक्रवार की नमाज़ के दिन स्कूल परिसर में पहुंची थीं और उनका दावा है कि उस दिन लगभग 300 लोग नमाज़ पढ़ रहे थे। वहीं उस परिसर में नमाज़ पढ़ने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वहां पर शुक्रवार को ज़्यादा लोग नमाज़ पढ़ते हैं और बाक़ी दिनों में सिर्फ़ 10-12 लोग दो वक़्त की नमाज़ पढ़ते हैं।

अब इस घटना के सामने आने के बाद शनिवार से स्कूल प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में मात्र पांच लोगों को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी है, माना जा रहा है कि इस मस्जिद पर फ़ैसला होने तक यही स्थिति बनाई रखी जाएगी।

यह बात बार बार अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और संस्थाओं के स्तर पर उठती रही है कि भारत में अल्पसंख्यकों विशेष रूप से मुसलमानों को परेशान किया जा रहा है।

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