Nov ३०, २०२१ १०:३६ Asia/Kolkata
  • किसानों के हक़ में आवाज़ उठाने वाले 12 सांसदों के निलंबन पर हंगामा तेज़ होने के आसार

राज्यसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही विपक्षी दलों के 12 सदस्यों को मौजूदा सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किए जाने की विपक्षी नेताओं ने कड़ी निंदा की है।

मोदी सरकार द्वारा तीन कृषि क़ानूनों को बिना चर्चा के रद्द किए जाने और संसद में किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाने की अनुमति नहीं देने को लेकर विपक्षी दलों के सांसदों ने दोनों सदनों में जमकर हंगामा किया और सरकार पर संसदीय प्रणाली और लोकतंत्र को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत 14 दलों ने सांसदों के निलंबन की निंदा की है और इसे मोदी सरकार की तानाशाही क़रार देते हुए इसके ख़िलाफ़ संयुक्त रणनीति तय करने की बात कही है।

कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना समेत अन्य सभी विपक्षी दलों ने संयुक्त बयान जारी कर सांसदों के निलंबन की निंदा की है। बयान में कहा गया है कि पिछले सत्र की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर सांसदों को निलंबित करने के लिए सरकार की ओर से लाया गया प्रस्ताव अप्रत्याशित और राज्यसभा के कामकाज व प्रक्रियाओं से संबंधित नियमों का उल्लंघन है।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर दूसरों के लिए आवाज़ उठाने वालों की आवाज़ दबाई जाती है, तो यह लोकतंत्र का गला घोटने जैसा है। हम इसकी निंदा करते हैं, सभी दल इसकी निंदा करते हैं।

विपक्षी दलों ने सांसदों के निलंबन की कार्यवाही का ज़ोरदार विरोध करने का संकेत दे दिया है, जिसके बाद शीतकालीन सत्र की कार्यवाही का सुचारू रूप से चल पाना और भी मुश्किल हो गया है। msm

टैग्स