Dec २३, २०२१ १७:१७ Asia/Kolkata
  • राम नाम पर किया जा रहा है खुलकर भ्रष्टाचारः प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के निकट जमीन की खरीद में घोटाला होने और मंदिर ट्रस्ट के पैसों का दुरुपयोग करने की बात कही है। 

प्रियंका गांधी ने बृहस्पतिवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेना चाहिए और शीर्ष अदालत के स्तर पर इसकी जांच होनी चाहिए।

भारतीय संचार माध्यमों के अनुसार प्रियंका गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि राम मंदिर के लिए देश के तकरीबन हर परिवार ने चंदा दिया। लोगों की आस्था को चोट पहुंचाई जा रही है।

प्रियंका के अनुसार दलितों की जमीनें खरीदी गईं जो कानून के तहत खरीदी ही नहीं जा सकती। यानी दलितों की जमीनें हड़पी गई हैं। यह जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को बहुत अधिक दाम पर बेची गई जिसका मतलब यह है कि बहुत बड़ा घोटाला हुआ है।

प्रियंका ने कुछ भूखंड के कथित सौदों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के नेता और अधिकारी जमीनों की लूट में लगे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के पैसे का दुरुपयोग भाजपा, आरएसएस के नेताओं तथा अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है।  प्रियंका ने कहा कि भगवान राम, मर्यादा और नैतिकता के प्रतीक हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी, भगवान के नाम पर भी भ्रष्टाचार कर रही है।  वह पूरे देश की आस्था को चोट पहुंचा रही है।

इसी बीच कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के नाम पर सारी मान-मर्यादा को ताक पर रखकर राम मंदिर के चंदे की लूट, का खेल खेला जा रहा है।  उन्होंने कहा कि यह साफ है कि भाजपा नेताओं, उनके मित्रों व राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट के नुमाइंदों द्वारा चंदे की लूट का यह खेल, मोदी-आदित्यनाथ सरकारों की सरपरस्ती में खेला जा रहा है।

सुरजेवाला ने दावा किया कि 2 करोड़ रुपये की ज़मीन को, राममंदिर निर्माण ट्रस्ट को 26.50 करोड़ रुपये में बेचा गया।  उन्होंने कहा कि मंदिर के चंदे की चोरी का क्या इससे बड़ा भी कोई सबूत हो सकता है?

याद रहे कि खबरों में दावा किया गया है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में उच्चतम न्यायालय के फैसले से राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद कई विधायकों, महापौरों, आयुक्त, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट तथा डीआईजी के रिश्तेदारों ने अयोध्या में जमकर जमीनें खरीदीं।  राम जन्‍मभूमि क्षेत्र के पांच किलोमीटर की परिधि में नेताओं और अफसरों द्वारा जमीन लेने का मामला सामने आया है।

आरोप है कि राम जन्मभूमि क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में विधायकों, उनके रिश्तेदारों और मेयर ने जमीनें खरीदी हैं। राजस्व संहिता में दी गई व्यवस्था के मुताबिक केवल दलित ही दलित की जमीन खरीद सकता है। आरोप है कि दलित की जमीन पहले महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट को दान किया गया। इसके बाद इस जमीन को अफसरों, नेताओं, विधायकों के नातेदारों और रिश्तेदारों ने औने-पौने दामों पर ले लिया।

बताया गया है कि राम जन्मभूमि क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में एक मंडलायुक्त के ससुर ने 2530 स्क्वायर मीटर ज़मीन ख़रीदी जबकि उनके साले ने 12060 स्क्वायर मीटर जमीन खरीदी। एक डीआईजी की साली ने 1020 स्क्वायर मीटर जमीन खरीदी। अयोध्या में तैनात रहे एक मुख्य राजस्व अधिकारी ने साले व उनकी पत्नी के लिए 1130 स्क्वायर मीटर जमीन ली।

एक भाजपा विधायक के साले ने 2593 स्क्वायर मीटर व 6320 स्क्वायर मीटर जमीन ली। एक ट्रस्ट के नाम पर 9860 स्क्वायर मीटर जमीन ली गई। भाजपा के एक अन्य विधायक और उनके भतीजे ने 5174 स्क्वायर मीटर जमीन ली। एक रिटायर्ड आईएएस ने 1680 स्क्वायर मीटर, मेयर ने 1480 स्क्वायर मीटर जमीन ली। एक सूचना आयुक्त ने पत्‍नी वे बेटे के नाम पर, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य ने, लेखपाल व कानूनगो ने भी जमीनें ली हैं।  इस प्रकार से कुल 44557 वर्ग मीटर ज़मीनें ख़रीदी गईं।

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