Jan २५, २०२२ ११:०० Asia/Kolkata
  • भारत नियंत्रित कश्मीर में मीडिया सेंसरशिप पर चिंता गहरी होती जा रही है

भारत नियंत्रित कश्मीर से बार बार ख़बरें आ रही हैं कि मीडिया सेंसरशिप भयानक रूप लेती जा रही है। हाल ही में कश्मीर प्रेस क्लब का मुद्दा गर्माया और अंडर ट्रेनिंग पत्रकार सज्जाद गुल की गिरफ़तारी समेत अनेक घटनाएं हो रही हैं जिन्हें लेकर विश्व स्तर पर चिंता पायी जाती है।

बीबीसी की रिपोर्ट है कि 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार की ओर से कश्मीर का स्पेशल स्टेटस ख़त्म करने के बाद मीडिया पर पाबंदियों की घटनाएं बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं।

कई पत्रकारों को आम तौर पर उनके काम के संदर्भ में गिरफ़तार किया जाता रहा, हिरासत में लिया जाता रहा और पूछताछ के लिए तलब किया जाता रहा। कई पत्रकारों के घरों पर छापे मारे गए और पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ मुक़द्दमे भी दर्ज किए।

प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा और शांति जैसे विषयों को बहाना बनाकर पत्रकारों के ख़िलाफ़ कार्यवाहियां की हैं।

गत 17 जनवरी को जम्मू व कश्मीर प्रशासन की ओर से प्रेस क्लब की ज़मीन और इमारत पर क़ब्ज़े के एलान के बाद केपीसी को बंद करने की घटना को इलाक़े में मीडिया की आज़ादी का गला दबाने की कोशिश के तौर पर देखा जाता है।

हालांकि प्रशासन ने अपने इस क़दम का तर्क देते हुए कहा कि पत्रकार ग्रुपों में आपसी चपक़लिश की वजह से उसने यह क़दम उठाया लेकिन प्रेस क्लब के अपदस्थ एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा कि सरकार प्रेस क्लब को बंद करने की ठान चुकी थी।

केपीसी के जनरल सेक्रेटरी अशफ़ाक़ तांतरे ने बीबीसी को बताया कि बहुत ही कम समय में कश्मीरी पत्रकारों की भरोसेमंद, आज़ाद और निडर आवाज़ के तौर पर उभरने वाले कश्मीर प्रेस क्लब की ग़ैर क़ानूनी बंदिश कश्मीर में पत्रकारिता के साथ होने वाली बहुत बुरी घटना है।

कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और इसे ग़ैर क़ानूनी और एकतरफ़ा कार्यवाही करार दिया।

पत्रकारों और उनकी संस्थाओं ने बार बार मीडिया की आज़ादी की जगह कम होने पर गहरी चिंता जताई है।

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