Jan २९, २०२२ ०८:१८ Asia/Kolkata
  • यूपी, बच्चों की ज़िंदगी से खिलवाड़, कोरोना से बचाने के लिए मुफ़्त दी गई दवा जांच में फ़ेल

भारत में कोरोना की तीसरी लहर से बच्चों को बचाने के लिए एंटीबायोटिक दवा एजिथ्रोमाइसिन का जो सीरप उत्तर प्रदेश के अस्पतालों से मुफ़्त बांटा जा रहा था, वह मानकों पर खरा नहीं उतरा है जिसके चलते राज्य के सभी ज़िलों से यह दवा वापस मंगाई जा रही है।

भारतीय समाचार पत्र दैनिक जागरण की एक ख़बर के मुताबिक, यह दवा मिसब्रांड पाई गई है। मतलब कि इस पर न तो ढंग से इसकी एक्सपायर होने की तारीख अंकित थी और न ही संबंधित अन्य जानकारियां लिखी गई थीं।

बड़ी संख्या में इस सीरप की आपूर्ति सरकारी अस्पतालों में की गई थी। सरकारी अस्पतालों में दवा पहुंचाने की ज़िम्मेदारी उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाईज कॉरपोरेशन के पास है। कॉरपोरेशन ने यह दवा मेसर्स टेरेस फ़ार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी थी।

अब कॉरपोरेशन द्वारा सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र लिखकर सीरप वापस मंगाई जा रही है और अस्पतालों से इसका वितरण रोक दिया गया है।

100 मिलीलीटर सीरप की कुल 2.78 लाख शीशियां राजधानी लखनऊ में मंगाई गई थीं। इसके अलावा अन्य ज़िलों में भी लाखों की संख्या में सीरप भेजे गए थे।

प्रदेश भर के अस्पतालों में निशुल्क वितरण के लिए भेजे गए सीरप की कुल संख्या 5 लाख से अधिक बताई जा रही है। आधी से अधिक दवा का वितरण और इस्तेमाल भी हो गया। (AK)

 

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