Jan २९, २०२२ १०:१५ Asia/Kolkata
  • नगालैंड, निहत्थे नागरिकों की हत्या का मामला, गृहमंत्री की राह पर चली सेना,  पहचान में हुई ग़लती का नतीजा थी घटना

भारत के नगालैंड के मोन ज़िले में 13 निहत्थे आम नागरिकों की भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा हत्या के ठीक दो दिन बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में दावा किया था कि घटना ‘पहचान करने में हुई ग़लती’ का नतीजा थी।

इस असंवेदनशील बयान और हत्याओं को जल्दबाजी में छिपाने के शाह के इस प्रयास की हर ओर आलोचना हुई लेकिन अब एक महीने बाद सेना भी अपने बचाव में शाह की राह पर चल दी है।

फायरिंग और उसके बाद हुई मौतों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) के सामने गवाही देने वाले सुरक्षा बल के 37 जवान सर्वसम्मति से इस बात पर अड़े हुए हैं कि उन्हें जो ख़ुफ़िया जानकारी मिली थी, वह ग़लत साबित हुई जिसके चलते 13 नागरिक मारे गए।

पूछताछ में शामिल सेना के इन 37 जवानों में से 31 उस ऑपरेशन में शामिल थे। एसआईटी ने अन्य 85 नागरिकों से भी पूछताछ की, इनमें से ज्यादातर उस ओटिंग गांव से थे जहां घटना हुई।

इनमें से दो बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए। एसआईटी का मानना है कि ये दो गवाह जांच के लिए महत्वपूर्ण हैं और वे अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे।

ऑपरेशन में शामिल रहे सेना के अधिकारियों को अलग-अलग तारीखों पर गवाही के लिए बुलाया गया था और उनके बयान 6 दिसम्बर से मध्य जनवरी के बीच दर्ज किए गए थे।

एसआईटी ने पाया है कि 4 दिसम्बर को नगालैंड पुलिस, आईबी, सैन्य एजेंसी और कुछ सहयोगी एजेंसियों से ख़ुफिया जानकारी मिली थी। अब उन सूचनाओं की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारी ने यह भी बताया कि अब एसआईटी घटना वाले दिन मिले ख़ुफ़िया इनपुट और अतीत में मिले ऐसे इनपुट्स की बारीकी से तुलना करने जा रही है।

उन्होंने बताया कि सेना को रोजाना ऐसी सूचनाएं मिलती हैं, हर सूचना चरमपंथियों की गतिविधियों की ओर इशारा करती है.

उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा बलों की टीम ने घात लगाकर हमला किया था, इसलिए यह अचानक हुआ टकराव नहीं था और ऐसा नहीं था कि विशेष बल इससे अनजान थे। ज्ञात रहे कि कोन्याक जाति से ताल्लुक रखने वाले सभी ग्रामीण कोयला खदान में मज़दूरी करते थे, जब उन्हें गोली मारी गई तब शाम के चार बजे से कुछ अधिक ही समय हुआ था और उस समय उजाला भी था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि घात लगाए बैठे सैन्यकर्मियों का दावा है कि उन्होंने तब ग्रामीणों के पास हथियार जैसा कुछ देखा था, हालांकि, वे सभी निहत्थे थे, उनमें से छह की मौक़े पर ही मौत हो गई जबकि बाकी दो गंभीर रूप से घायल हो गए। (AK)

 

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