May १५, २०२२ ११:३५ Asia/Kolkata
  • नौकरी देने के बजाए भारतीय रेलवे ने 72 हज़ार पद ही ख़त्म कर दिए

सरकारी दस्तावेज़ों के अनुसार भारत के सबसे बड़े नियोक्ता भारतीय रेलवे ने पिछले छह वर्षों में 72 हज़ार से अधिक पदों को खत्म कर दिया है हालांकि इस अवधि में 81 हज़ार पदों को ख़त्म करने का प्रस्ताव रखा था।

उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, खत्म किए गए सभी पद ग्रुप सी और ग्रुप डी श्रेणी के हैं, जो रेलवे के संचालन में नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ने के कारण अब अर्थहीन हो गए हैं, इसलिए रेलवे ने भविष्य में इन पदों पर भर्ती न करने का फ़ैसला किया है। हालांकि वर्तमान में इन पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को रेलवे के विभिन्न विभागों में समायोजित किए जाने की संभावना है।

अधिकारियों ने कहा कि इन पदों को खत्म करने का फैसला करना पड़ा, क्योंकि अब रेलवे का संचालन आधुनिक और डिजिटल हो गया है। उत्तर रेलवे ने 9 हज़ार से अधिक पदों को ख़त्म किया जबकि दक्षिण पूर्व रेलवे ने लगभग 4 हज़ार 677 पदों को खत्म किया। दक्षिण रेलवे ने 7 हज़ार 524 और पूर्वी रेलवे ने 5 हज़ार 700 से अधिक पदों को समाप्त कर दिया है।

रेलवे में आउटसोर्सिंग बढ़ने के कारण भी स्वीकृत पदों की संख्या घट रही है। रेलवे को अपनी कुल आय का एक-तिहाई हिस्सा वेतन एवं पेंशन पर खर्च करना पड़ता है। रेलवे कर्मचारियों की संख्या वेतन और पेंशन दोनों के मामले में इसके लिए एक बोझ रही है। भारतीय रेलवे को अपनी कुल आय का एक तिहाई वेतन और पेंशन पर खर्च करना पड़ता है। यह वर्तमान में श्रमिकों के वेतन पर अर्जित प्रत्येक एक रुपये में से 37 पैसे और पेंशन पर 16 पैसे खर्च करता है। (AK)

 

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