May २४, २०२२ ०८:३७ Asia/Kolkata
  • लगातार चर्चा में है मुसलमान समझकर बुज़ुर्ग की निर्मम हत्या का मामला, सहिष्णुता की भावना मर चुकी है या कभी थी ही नहीं?!

भारत के मध्य प्रदेश राज्य में जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार है भाजपा से जुड़े नेता ने एक बुज़ुर्ग की कथित रूप से बेरहमी से पिटाई करके हत्या कर दी जिसके बाद यह मामला कई दिन तक भारत में चर्चा में रहने के बाद अब विश्व में गहरी चिंता का विषय बना हुआ है।

अलजज़ीरा डाट नेट ने इस घटना की रिपोर्ट और इस पर आने वाली प्रतिक्रियाओं को प्रकाशित किया है।

भारतीय मीडिया ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेता ने मुसलमान समझकर जैन धर्म के बुज़ुर्ग की हत्या कर डाली और इसकी वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर वायरल करवाई।

हालात पर नज़र रखने वाले कहते हैं कि भाजपा या उसके सहयोगी संगठनों से जुड़े लोग इससे पहले भी कई मामलों में यही कर चुके हैं कि उन्होंने किसी मुसलमान की बेहरमी से पिटाई यहां तक कि हत्या कर डाली और उसके बाद इस पूरी घटना की वीडियो बनाकर बेफ़िक्री से सोशल मीडिया पर शेयर कर दी। इसकी वजह यह है कि वे भाजपा की सरकार होने के नाते ख़ुद को हर क़ानूनी कार्यवाही से सुरक्षित समझते हैं और व्यवहारिक रूप से यही नज़र भी आ रहा है।

क्रूर भाजपाई नेता बड़ी बेशर्मी से बुज़ुर्ग की पिटाई करता है और उससे पहचान पत्र दिखाने की मांग करता है, बुज़ुर्ग अपना पहचान पत्र नहीं दिखा पाता तो चरमपंथी भाजपाई नेता उसके मुंह पर तमाचे बरसाता हुआ बार बार कहता है कि क्या तुम्हारा नाम मुहम्मद है?

भारतीय मीडिया का कहना है कि बाद में पता चला कि वह बुज़ुर्ग मुसलमान नहीं था और मानसिक रूप से अस्वस्थ भी था।

बुज़ुर्ग पर हमला करने वाला चरमपंथी दिनेश कुशवाहा बताया जाता है। कुशवाहा और उसकी पत्नी दोनों भाजपा के नेता हैं।

गुजरात दंगों पर खोजी पत्रकारिता पर आधारित किताब लिखने वाली पत्रकार राना अय्यूब ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि दुनिया वालो! भारत की अब यह हालत हो गई है, मानसिक संतुलन खो चुके बुज़ुर्ग को मुसलमान होने के शक में पीट पीट कर मार दिया जाता है, हां! जो आपने सुना वह बिल्कुल सही है।

सामाजिक कार्यकर्ता राहुल मेहरा ने घटना की वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया कि अगर यह घटना आपको बेचैन नहीं करती तो अपने आपको मुर्दा समझिए। मुझे यक़ीन है इस घटना ने भारतीय न्यायपालिका के ज़मीर को झिंझोड़ा होगा।

एक पत्रकार ने लिखा कि इस घटना पर भारतीय मीडिया में इतनी अधिक चर्चा इसलिए हो गई कि मारा गया बुज़ुर्ग ग़ैर मुस्लिम निकला। अगर वह मुसलमान होता तो मीडिया में किसी को कोई फ़िक्र ही न होती।

कुछ टीकाकार यह बहस कर रहे हैं कि इस तरह की दरिंदगी भारत जैसे देश में जहां अलग अलग धर्मों और जातियों के लोग सदियों से साथ रहते हैं यह सवाल पैदा करती है कि क्या इस देश में सहिष्णुता की भावना मर चुकी है या समाज का एक वर्ग कभी सहिष्णु था ही नहीं?!  

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