Sep २५, २०२२ ११:५५ Asia/Kolkata
  • अस्पताल के ख़ाली कमरे में लड़की के नमाज़ पढ़ने की वीडियो पर कार्यवाही करना चाहती थी पुलिस, बुद्धिजीवियों ने जमकर लताड़ा

भारत में अस्पताल के एक ख़ाली कमरे में एक लड़की के नमाज़ पढ़ने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई जिसके साथ ही एक नई बहस भी छिड़ गई है।

कुछ ही घटों के भीतर इस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा। यह घटना इलाहाबाद के एक अस्पताल की है। इलाहाबाद की पुलिस का कहना है कि लड़की चूंकि कोई क़ानून नहीं तोड़ा इसलिए उसके ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती।

हालांकि इससे पहले सोशल मीडिया यह ख़बर फैल गई कि योगी सरकार की पुलिस इस लड़की के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने जा रही है जिस पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने लड़की से सहानुभूति जताई।

फ़ायर ब्रांड सांसद असदुद्दीन उवैसी ने यह वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि जब एक परिवार कठिनाई के समय अपने किसी मरीज़ को लेकर अस्पताल गया है और ख़ाली कमरे में परिवार की लड़की नमाज़ पढ़कर बीमार के लिए दुआ कर रही है तो इसमें समस्या क्या है? क्या उत्तर प्रदेश की पुलिस को कोई और काम नहीं है?

भारतीय लेखक वरुण ग्रोवर ने लिखा कि अब तो अस्पताल में भागवान का नाम लेना भी जुर्म बन गया है अगर सारे धर्मों के उपासकों पर इस कारण चार्ज लगाया जाएगा तो फिर तो देश के सारे अस्पतालों का नाम सेंट्रल जेल ही रख देना चाहिए।

एक महिला पत्रकार ने पुलिस पर तीखा हमला करते हुए लिखा कि पुलिस दिन बदिन ज़्यादा बेवक़ूफ़ होती जा रही है, उस व्यक्ति को गिरफ़तार करना चाहिए जिसने यह वीडियो बनाई। लड़की ने क्या अपराध किया है? क्यों इस तरह की वकवास बहसों पर समय नष्ट किया जा रहा है?

भारत में जब से मोदी सरकार सत्ता में है मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को बेरहमी से निशाना बनाया जा रहा है।  

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