Dec १४, २०१९ २१:०५ Asia/Kolkata
  • विवादित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ बंगाल में हिंसक प्रदर्शन, स्टेशन और बसों में लगाई आग, जानें पूर्वोत्तर का हाल

विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में भारत के असम, त्रिपुरा, नगालैंड समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा लेकिन कहीं से भी हिंसक वारदातों की ख़बर नहीं आई। हालांकि, पश्चिम बंगाल में हिंसा की लपटें शनिवार को राज्य के कई हिस्सों में फैल गईं। प्रदर्शनकारियों ने हावड़ा में रेलवे स्टेशन पर आग लगा दी तो कोना एक्सप्रेसवे पर छह बसों को आग के हवाले कर दिया। हाईवे बंद कर दिए और रेलगाड़ियां रोकीं।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के हावड़ा ज़िले में भीड़ ने संकरेल रेलवे स्टेशन को आग के हवाले कर दिया और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की। रेलवे सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, दोपहर के समय भीड़ स्टेशन परिसर में घुसी और टिकट काउंटर में आग लगा दी। जब रेलकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उनकी पिटाई की गई। प्रदर्शनकारियों ने स्टेशन मास्टर के कमरे में तोड़फोड़ की और सिग्नल केबिन को भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कई दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया।

मुर्शिदाबाद में भीड़ ने बेलडांगा स्टेशन पर रखी रेलवे की संपत्ति को आग लगा दी। एक फायर ब्रिगेड के इंजन को क्षतिग्रस्त कर जला दिया। मौक़े पर पहुंची पुलिस पर भी पथराव किया गया। इसी ज़िले के सुती में, प्रदर्शनकारियों ने तीन सरकारी बसों में तोड़-फोड़ की और यात्रियों को जबरन बस से उतारकर एक बस को आग लगा दी। बसुदेवपुर हॉल्ट स्टेशन में भी तोड़-फोड़ की गई। ज़िले के फरक्का, ज़ंगीपुर और पोरडांगा स्टेशनों पर ट्रेनें रोक दीं और पथराव भी किया। रेलवे प्रवक्ता ने बताया कि प्रदर्शनकारी संकरेल, नालपुर, मोरीग्राम और बकरनवाबाज़ स्टेशनों पर पटरियों पर बैठे रहे, जिससे रेल यातायात ठप रहा।

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंसक प्रदर्शन और तोड़फोड़ करने वालों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और लोकतांत्रिक तरीक़े से प्रदर्शन करने की अपील की। ममता ने कहा, क़ानून अपने हाथ में मत लीजिए। सड़क और रेल यातायात जाम मत कीजिए। सड़कों पर आम लोगों के लिए परेशानी खड़ी मत कीजिए। सरकारी संपत्तियों को नुकसान मत पहुंचाइए। जो लोग परेशानियां खड़ी करने के दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि नए कानून और एनआरसी का राज्य में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लोगों के बीच भ्रम मत फैलाइए।

दूसरी ओर असम में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए 16 दिसंबर तक इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी गई हैं। भारत के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं राजनीतिक विभाग) संजय कृष्ण ने बताया कि फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर और यू-ट्यूब जैसे सोशल मीडिया मंच का इस्तेमाल अफवाह फैलाने और तस्वीरों, वीडियो आदि को प्रसारित करने के लिए किया जा सकता है, जो लोगों उकासाने के साथ ही क़ानून-व्यवस्था को ख़राब कर सकती है। इसीलिए यह फ़ैसला लिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि परिस्थिति सामान्य होने पर ही इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएंगी. हालांकि बंद के बाद भी कुछ इलाकों में कुछ घंटो के लिए ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू हो गई थीं। (RZ)

 

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