Jan १७, २०२० १५:५४ Asia/Kolkata
  • भारत आख़िर किस रास्ते पर जा रहा है? कश्मीर के छोटे-छोटे बच्चों के लिए भारतीय सेना का क्या है प्लान? अगर कश्मीरी बच्चे कट्टरवाद के रास्ते पर हैं तो फिर आरएसएस और अन्य हिन्दू संगठन किस रास्ते पर हैं?

भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत का कहना है कि कश्मीर में 10 और 12 साल के छोटे बच्चों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। उनके इस विवादित बयान पर न केवल भारत में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं बल्कि पूरी दुनिया में एक सैन्य अधिकारी द्वारा इस तरह का बयान देने पर गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है।

भारत के अंग्रेज़ी भाषी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ‘रायसीना डायलॉग’कार्यक्रम में सीडीएस जनरल रावत ने कहा कि जो बच्चे पूरी तरह से कट्टरपंथी बन गए हैं, उनकी पहचान कर उन्हें ऐसे शिविरों में रखने की ज़रूरत हैं, जहां से वे वापस मुख्यधारा में लौट सकें। उन्होंने कहा कि सबसे पहले लोगों को कट्टर बनाने वालों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करने की ज़रूरत है। इस दौरान उनसे पूछा गया कि अगर देश में कट्टरता के ख़िलाफ़ अभियान कारगर साबित नहीं हो रहा है तो आतंकवाद पर नियंत्रण कैसे पाया जा सकता है? इसके जवाब में जनरल बिपिन रावत ने कहा, ‘कट्टरवाद को समाप्त किया जा सकता है, वे कौन लोग हैं जो लोगों को कट्टर बना रहे हैं, स्कूलों में, विश्वविद्यालयों में, धार्मिक स्थलों में ऐसे लोग हैं, ऐसे लोगों का समूह है जो कट्टरता फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि, सबसे पहले आपको नब्ज़ पकड़ना होगा, आपको ऐसे लोगों की पहचान कर इन्हें लगातार अलग-थलग करना होगा।’

भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफेंस स्टाफ़ (सीडीएस) ने कहा, ‘यह स्कूलों, यूनिवर्सिटी, धार्मिक स्थलों हर जगह हो रहा है, ऐसे कुछ लोगों का समूह है, जो यह फैला रहे हैं। इस तरह के लोगों की पहचान कर दूसरे लोगों को धीरे-धीरे इनसे अलग करने की ज़रूरत है।’ उन्होंने कहा, ‘लोगों को कट्टरपंथी बनाए जाने से रोकने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए, सबसे पहले पूरी तरह कट्टरपंथी बन चुके लोगों को पहचानने की ज़रूरत है।’ रावत ने कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा, ‘हम कश्मीर में जो देख रहे हैं, हम वहां लोगों को कट्टरपंथी बनते देख रहे हैं, आज छोटे-छोटे बच्चों तक को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है, 10 से 12 साल तक के बच्चे, बच्चियों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है।’ बिपिन रावत ने कहा, ‘इन लोगों को भी धीरे-धीरे इस कट्टरपंथ से अलग किया जा सकता है लेकिन दूसरी तरफ ऐसे भी लोग हैं, जो पूरी तरह से कट्टरपंथी बन गए हैं, जिन्हें अलग करके ऐसे कैंपों ले जाने की ज़रूरत हैं, जहां से वे मुख्यधारा में लौट सकें।’

भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने आतंकवाद और कट्टरवाद से मुक़ाबले के लिए पाकिस्तान सराकार द्वारा उठाए जा रहे क़दमों का उल्लेख किया और कहा कि, “आपको बता दूं कि पाकिस्तान भी यह कर रहा है, वहां ऐसे कैंप हैं क्योंकि कुछ आतंकवादी संगठन जिन्हें उसने बढ़ावा दिया, अब उसे ही नुक़सान पहुंचाने लगे हैं।” उन्होंने कहा कि, लोगों को धीरे-धीरे कट्टरता से दूर किया जा सकता है, इसके लिए ‘डीरैडिकलाइज़ेशन कैंप’बनाना होगा। उन्होंने कहा, ‘हमें आतंकवाद को ख़त्म करना होगा और ऐसा सिर्फ उसी तरीक़े से किया जा सकता है जो तरीक़ा अमेरिका ने 9/11 हमले के बाद अपनाया था। रावत ने कहा कि, अमेरिकियों ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ वैश्विक युद्ध छेड़ दिया था।’ कश्मीर घाटी में पैलेट गन के इस्तेमाल पर जनरल रावत ने कहा, ‘सेना पैरों पर ही निशाना बनाती है, लेकिन जब लोग पत्थर उठाने के लिए नीचे झुकते हैं, तब उनके चेहरे पर चोट पहुंचती है, यही वजह है कि पैलेट गन से लगी चोटों के लिए सेना को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।’

भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के बयान के बारे में कई राजनीतिक टीकाकारों ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि उनका यह बयान पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। टीकाकारों का कहना है कि भारत में चरमपंथ और कट्टरवाद को जिसने सबसे अधिक फैलाया है और फैला रहे हैं वह हैं हिन्दूवादी संगठन और विशेषकर भारत में कट्टरवाद का जन्मदाता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। जानकारों का मानना है कि अगर भारत सरकार इन सगंठनों पर प्रतिबंध लगा दे, जो कि मोदी सरकार के रहते असंभव है, तो पूरे भारत से कट्टरवाद और चरमपंथ लगभग समाप्त हो जाएगा। जानकारों का यह भी कहना है कि जिस तरह भारत की मौजूदा सरकार ने लगभग इस देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं में राष्ट्रवाद के नाम पर हिन्दूवाद का ज़हर घोला है उससे इस देश में कट्टरवाद और चरमपंथ के बढ़ने में अधिक सहायाता मिली है। अगर भारत के पहले सीडीएस चाहते हैं कि इस उनके देश से चरमपंथ और कट्टरवाद की समाप्ति हो तो सबसे पहले उन्हें हिन्दुत्व नामक कट्टरवाद और चरमपंथ को समाप्त करना होगा और उन लोगों को अलग से एक कैम्प में रखना होगा जो गांधी के देश में गोडसे की भक्ति कर रहे हैं ताकि उन्हें देश और दुनिया की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। (RZ)   

 

 

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