Jan २५, २०२० २१:०९ Asia/Kolkata
  • पूरे भारत में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन जारी, लखनऊ की प्रदर्शनकारी महिलाओं के ख़िलाफ़ पुलिस का बर्बरतापूर्ण रवैया

विवादित नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ पूरे भारत में विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत के पंजाब और केरल राज्य की सरकारों के बाद अब राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने भी नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के ख़िलाफ़ विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया है। इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार से इस क़ानून को रद्द करने का आग्रह किया है।

समाचार एजेंसी तसनीम की रिपोर्ट के मुताबिक़, राजस्थान की विधान सभा में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि, ‘भारतीय संसद में हाल ही में पारित किए गए नागरिकता संशोधन क़ानून का उद्देश्य धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों को अलग-थलग करना है। धर्म के आधार पर इस तरह का भेदभाव संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष विचारों के अनुरूप नहीं है और यह स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान की धारा 14 का उल्लंघन है।’ प्रस्ताव में कहा गया, ‘देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक ऐसा क़ानून पारित हुआ, जो धार्मिक आधार पर लोगों को बांटता है। यही वजह है कि देशभर में नागरिकता क़ानून को लेकर ग़ुस्सा और रोष है और इसके ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।’

इससे पहले राजस्थान विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते समय कहा गया था, ‘नागरिकता संशोधन क़ानून भारतीय संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, इसलिए सदन केंद्र सरकार से इसे रद्द करने की अपील करता है ताकि नागरिकता प्रदान करने में धर्म के आधार पर किसी तरह का भेदभाव नहीं हो और भारत धर्मों के लिए क़ानून एकसमान बना रहे।’ इसमें कहा गया कि नागरिकता कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर मतभेद हैं और इससे लोगों को असुविधा हो रही है। प्रस्ताव में कहा गया, ‘देश के एक बड़े वर्ग के लोगों को चिंता है कि एनपीआर, एआरसी का आधार है और नागरिकता क़ानून में हाल में किए गए संशोधनों से भारतीय नागरिकता से एक वर्ग वंचित रह जाएगा।’ प्रस्ताव में प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) और असम का भी उल्लेख है। बीते साल अगस्त में जारी एनआरसी की अंतिम सूची में से 19 लाख से अधिक लोगों को बाहर रखा गया था।

दूसरी ओर भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी के ऐतिहासिक घंटा घर में सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ महिलाओं द्वारा एक सप्ताह से अधिक समय जारी विरोध-प्रदर्शन को बार-बार इस प्रदेश की योगी सरकार के इशारे पर स्थानीय पुलिस ख़त्म कराने के लिए नए-नए हथकंड़े अपना रही है। शनिवार को स्थानीय पुलिस प्रशासन ने धरना स्थल पर पहुंच कर कई महिलाओं को गिरफ़्तार कर लिया और वहां उनकी सहायता करने वाले दर्जनों पुरुषों को भी गिरफ़्तार कर लिया है। इस बीच कई महिला प्रदर्शनकारियों पर मुक़द्दामा भी दर्ज हुआ है जबकि उससे पहले भी दर्जनों महिलाओं पर मुक़द्दमा दर्ज किया जा चुका है।

भारत की राजधानी दिल्ली सहित पूरे भारत में इस नए विवादित क़ानून के ख़िलाफ़ लगातार आम जनता में रोष बढ़ता जा रहा है और दिन प्रतिनदिन इसके ख़िलाफ़ इस देश की जनता, जिसमें महिलाएं सबसे आगे हैं अपने घरों से बाहर निकल कर विरोध-प्रदर्शन कर रही है और इस विवादित क़ानून को देश की सरकार से वापस लेने की मांग कर रही है। दूसरी ओर भारत की मोदी सरकार अपने अड़ियल रवैये पर डटी हुई है और बार-बार इस क़ानून को वापस न लेने की बात दोहरा रही है। (RZ)

 

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