Feb १५, २०२० ००:१३ Asia/Kolkata
  • उत्तर प्रदेश सरकार को हाईकोर्ट से धचका, भरपाई की सरकारी नोटिस पर लगा रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन करने के दौरान हुए सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई करने के उत्तर प्रदेश सरकार के नोटिस पर रोक लगा दी है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीएए के विरुद्ध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को हुए कथित नुक़सान की भरपाई करने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की नोटिस पर रोक लगा दी है।

कानपुर के एक याचिकाकर्ता ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नुक़सान की भरपाई के लिए दिए गए नोटिस की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता को नागरिकता संशोधन क़ानून "सीएए" के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुक़सान की भरपाई के लिए वसूली नोटिस दिया गया था। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को नुकसान की भरपाई के नोटिस से अंतरिम संरक्षण दिया है।

जस्टिस पंकज नक़वी और जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की खंडपीठ ने सरकार के वसूली नोटिस पर रोक लगा दी है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि राज्य सरकार द्वारा नियोजित नियमों के कथित अभ्यास में एडीएम की ओर से नोटिस जारी किया गया था जबकि ऐसा करना डिस्ट्रक्शन ऑफ पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टीज़ बनाम सरकार एसीसी 212 में पारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

इन दिशा–निर्देशों में कहा गया है कि हर्जाने या जांच की देयता का अनुमान लगाने के लिए एक वर्तमान या सेवानिवृत्त हाईकोर्ट के न्यायाधीश को दावा आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। ऐसा कमिशनर हाईकोर्ट के निर्देश पर सबूत ले सकता है। देयता का आकलन करने के बाद इसे हिंसा के अपराधियों और घटना के आयोजकों द्वारा वहन किया जाएगा।

ज्ञात रहे कि कानपुर में बीते 19 व 20 दिसम्बर को सीएए के विरोध में हिंसा हुई थी, जिसमें दो पुलिस चौकियों को आग के हवाले कर दिया गया, साथ ही कुछ सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुक़सान पहुंचाया गया था। (AK)

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