Mar ३१, २०२० १८:४० Asia/Kolkata
  • कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में ताली और थाली बजाने के पीछे था वैज्ञानिक तर्क, क्योंकि इससे पैदा होने वाले कंपन से...

किसी ने कभी नहीं सोचा होगा कि एक वक़्त ऐसा आएगा, जब भारत जैसे बड़े देशों की पूरी आबादी का स्वास्थ्य प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जैसे नेताओं के हाथों में आ जाएगा।

कितनी अजीब बात है कि दुनिया की दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश का नेता जिसे राष्ट्रवादी हिंदुओं के बीच अत्यधिक लोकप्रियता हासिल है, इस वैश्विक महामारी पर अपनी शुरूआती प्रतिक्रिया में 130 करोड़ भारतीयों से कहेगा कि अपने दरवाज़ों, बालकनियों और खिड़कियों में खड़े होकर थालियां पीटें और तालियां बजाएं।

इससे भी विचित्र बात यह है कि इस उपदेश के बाद, मोदी भक्त नक़ली वैज्ञानिकों ने सोशल मीडिया पर धावा बोल दिया और मोदी के इस नुस्ख़े का वैज्ञानिक तर्क पेश करना शुरू कर दिया कि थाली और ताली बजाने से पैदा होने वाले वाइब्रेशन या कंपन से इंसानों का हत्यारा यह वायरस मर जाएगा!

उसके बाद मोदी ने एक ही झटके में 130 करोड़ लोगों को कम से कम 3 हफ़्तों के लिए लॉकडाउन में रखने का तुग़लक़ी फ़रमान जारी कर दिया और कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई की महाभारत की लड़ाई से तुलना करके एक बार फिर अपने भक्तों की वाह वाही लूट ली।

हालांकि जब पहले ही हफ़्ते में ग़रीब और मज़दूर भूख से बिलबिलाकर सड़कों पर निकल आए और अपनी जान देने लगे तो प्रधान मंत्री को अपनी ग़लती का कुछ अहसास हुआ और उन्होंने इसके लिए राष्ट्र से माफ़ी तो मांगी, लेकिन साथ ही यह दावा किया कि कोरोना से लड़ने के लिए उनके पास इससे बेहतर कोई और विकल्प नहीं था। उनके भक्तों ने और मीडिया ने भी इसके लिए मोदी की क़सीदाख़ानी में कोई कसर नहीं छोड़ी।     

मोदी के आलोचक हैरान हैं कि उनके ग़लत फ़ैसले भी उनकी लोकप्रियता में कमी लाने के बजाए उसमें वृद्धि कर रहे हैं।

यहां यह समझने की ज़रूरत है कि लोकलुभावन नेता के लिए संकट जैसे समय में अपनी लोकप्रियता बढ़ाने से अच्छा और कोई अवसर नहीं होता है। ऐसे नेता मतदाताओं को लुभाने के लिए संकटमय स्थिति का लाभ उठाते हुए लोगों की भावनाओं से खेलना ख़ूब जानते हैं और नई नई तिगड़मबाज़ी करते हैं।

अपने मानने वालों के बीच ऐसे नेताओं की छवि संकट के मुक्तिदाता वाली होती है। उन्हें यह लगता है कि उनका नेता इतना समझदार और संकटों का समाधान करने वाला है कि वह उन्हें दुनिया की सबसे ख़राब से ख़राब स्थिति से बचा सकता है। उनके इस कौशल के बदले में वे लोग उन्हें अपना वोट देकर और अपना जीवन उनके हाथों में सौंपकर काफ़ी ख़ुश होते हैं।

इसलिए आलोचकों को यह समझना होगा कि इस तरह के ग़लत फ़ैसले भी मोदी का कुछ बिगाड़ नहीं सकते, बल्कि उनके भक्तों की भक्ति में वृद्धि ही करेंगे। msm

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