Jul ०२, २०२० १८:४६ Asia/Kolkata
  • भारत-चीन टकराव पर प्रधान मंत्री मोदी की ख़ामोशी और चीन का नाम तक नहीं लेने का क्या मतलब है?

30 जून को टीवी पर राष्ट्र के नाम प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन में भारत के लोग यह उम्मीद कर रहे थे कि वह लद्दाख़ में जारी चीन-भारत टकराव पर ज़रूर कुछ बोलेंगे। लेकिन लोगों की उम्मीदों पर उस वक़्त पानी फिर गया, जब मोदी ने चीन के साथ जारी तनाव पर एक लफ़्ज़ भी नहीं बोला।

ऐसा नहीं है कि मोदी ने चीन के साथ जारी तनाव पर अपना मुंह ही नहीं खोला है। लद्दाख़ में 5 मई से चीन के साथ भारत का टकराव शुरू हुआ। 15 जून को दोनों देशों के सैनिकों के बीच मुठभेड़ में 20 भारतीय सैनिकों की मौत के दो दिन बाद, 17 जून को भारतीय प्रधान मंत्री ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहाः भारत शांति चाहता है, लेकिन अगर उसे उकसाया गया तो वह उचित जवाब देने की क्षमता रखता है... हमारे सैनिक दुश्मन के सैनिकों को मारते हुए मरे हैं। लेकिन उन्होंने अपने पूरे भाषण में चीन का नाम तक नहीं लिया।

19 जून को ऑल पार्टी मीटिंग के दौरान, मोदी ने यह दावा करते हुए कि न ही कोई हमारी सीमा में घुसा है और न ही किसी ने हमारी किसी चौकी पर क़ब्ज़ा किया है। इस मुद्दे को ही सिरे से ख़ारिज कर दिया।

तीसरी बार 26 जून को क़रीब 30 मिनट तक अपनी मन की बात में भारतीय पीएम ने गलवान घाटी में हुई झड़प और भारतीय जवानों के बलिदान का तो उल्लेख किया, लेकिन चीन का कहीं ज़िक्र नहीं किया।

30 जून को टीवी पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में चीन का नाम लेना तो दूर मोदी ने इस मुद्दे पर लब कुशाई तक नहीं की।

हालांकि फ़रवरी 2019 में आम चुनाव से ठीक पहले पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में 40 सीआरपीएफ़ के 40 जवानों की मौत के बाद हमें उनका दूसरा ही अंदाज़ देखने को मिला था। हमले के अगले ही दिन 15 फ़रवरी को मोदी ने गरजते हुए पाकिस्तान को बदले की धमकी देते हुए देश में आक्रोश और ग़ुस्सा भड़काने की कोशिश की थी।     

यहां यह सवाल उठता है कि लद्दाख़ में चीन ने 20 भारतीय जवानों की हत्या के साथ ही कई किलोमीटर तक विवादित इलाक़ों पर क़ब्ज़ा कर लिया है, लेकिन मोदी का ख़ून नहीं खोल रहा है और वह हत्यारे या हमलावर का नाम तक नहीं ले रहे हैं, इसका क्या कारण है?

इसे हम एक मिसाल से समझने की कोशिश करते हैं। अगर कोई शख़्स आपके घर पर हमला करके आपके परिवार के किसी सदस्य को मौत के घाट उतारने के साथ-साथ आपके घर के एक भाग पर क़ब्ज़ा करके बैठ जाए तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी?

स्वाभाविक तौर पर इस ज़ुल्म से टकराने और इंसाफ़ के लिए आप अपनी पूरी ताक़त झोंक देंगे। लेकिन इस ज़ुल्म के मुक़ाबले में आपकी प्रतिक्रिया कैसी होगी? इसके पीछे कई कारक हो सकते हैं। आपका स्वभाव, साहस, ताक़त, दृष्टिकोण, नैतिकता, परिस्थितियां, दुश्मन कौन है और कितना ताक़तवर है। लेकिन अगर आप कोई प्रतिक्रिया ही नहीं दिखायेंगे और यह दावा करने लगेंगे कि दुश्मन ने न ही हमारे किसी परिजन की हत्या की है और न ही वह हमारे घर में घुसा है, तो हर कोई समझ जाएगा कि आप इतने नुक़सान पर समझौता करने के लिए तैयार हैं और दुश्मन की ताक़त तथा अपनी कमज़ोरी को देखते हुए बात आगे बढ़ाना नहीं चाहते और अपने अधिकारों से समझौता करने के लिए तैयार हैं। इसलिए कि अगर आपने इंसाफ़ की मांग की, बदला लेने की बात कही या कोई प्रतिक्रिया दिखाई तो आपको अधिक जानी व माली नुक़सान पहुंचने का भय है।

यह मिसाल एक व्यक्तिगत झगड़े के बारे में है, जहां नैतिक सिद्धांतों का भी काफ़ी अमल दख़ल हो सकता है, लेकिन राष्ट्रों के स्तर पर कोई राष्ट्र अपनी संप्रभुता का किसी भी हालत में समझौता नहीं करता और अपनी रक्षा के लिए किसी नैतिक सिद्धांत का पालन नहीं करता है। हां अगर वह अपने दुश्मन से कमज़ोर है या उसका नेतृत्व कमज़ोर है, तो उसे इस तरह का अपमान सहना पड़ता है। भारत के साथ कुछ ऐसी ही स्थिति है। इसीलिए वही मोदी जो पाकिस्तान के मुक़ाबले में दहाड़ते हैं और घर में घुसकर मारने की बात करते हैं, चीन के मुक़ाबले में थप्पड़ खाकर भी थप्पड़ के वजूद से ही इनकार कर देते हैं। msm

टैग्स

कमेंट्स