Sep २०, २०२० १८:३६ Asia/Kolkata
  • शिया-सुन्नी करके हिंदुत्ववादी ताक़तों को मज़बूत बनाने की बात करने वाले स्वामी का शियों के लिए छलका दर्द!

बीजेपी नेता सुब्रामणियम स्वामी ने रविवार 20 सितम्बर को एक ट्वीट करके हिंदुओं से कहा है कि उन्हें भारत में शियों की रक्षा के लिए तैयार हो जाना चाहिए, इसलिए कि पाकिस्तान में उनके नरसंहार और भारत में उनके ख़िलाफ़ नफ़रत पैदा करने के लिए सुन्नी साज़िश रच रहे हैं। याद रखें कि राम मंदिर मुद्दे में शियाओं ने राम भक्तों का समर्थन किया था।

स्वामी शियों के लिए घड़ियाली आंसू तो बहा रहे हैं, लेकिन वह यह भूल रहे हैं कि वह ख़ुद सार्वजनिक मंच से कई बार शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच फूट डालने और हिंदुत्ववादी ताक़तों को मज़बूत बनाने की बात कर चुके हैं।

 

 

दर असल, मोदी सरकार ने अपनी ग़लत नीतियों और ग़लत फ़ैसलों की वजह से जहां देश के सामाजिक ताने-बाने को नीस्तो नाबूद कर दिया है, वहीं अर्थव्यवस्था को भी अभूतपूर्व नुक़सान पहुंचाया है।

इसी के साथ नए कृषि विधेयक के दोनों सदनों में पारित होने के बाद, मोदी सरकार पर मज़दूर और छात्र विरोधी होने के साथ ही अब किसान विरोधी होने का भी आरोप लग रहा है। बेलगाम कोरोना महामारी, आर्थिक संकट और चीन जैसी चुनौतियों के मुक़ाबले में बेबस नज़र आ रही भारतीय जनता पार्टी की सरकार के ख़िलाफ़ अब देश में किसानों ने भी मोर्चा खोल दिया है। इन समस्त मुद्दों से आम लोगों का ध्यान भटकाने के लिए स्वामी जैसे बीजेपी के नेता, देश में शिया-सुन्नी खेल खेलना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने मुसलमानों के इन दोनों समुदायों में अपने कुछ गुर्गे तैयार कर रखे हैं, जो इशारा मिलते ही नफ़रत फैलाने के काम में लग जाते हैं।

दूसरी तरफ़, जहां मोदी सरकार की नीतियों के चलते हर क्षेत्र में भारत की हालत ख़स्ता है, वहीं एक समय दिवालिया होने की कगार पर पहुंचने वाला उसका पारंपरिक दुश्मन, पाकिस्तान इमरान ख़ान के नेतृत्व में न केवल कोरोना जैसी महामारी पर क़ाबू पाने में सफल रहा है, बल्कि अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी तुलनात्मक रूप से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने भी पिछले दिनों भारतीय ख़़ुफ़िया एजेंसियों पर देश में शिया-सुन्नी मुसलमानों के बीच नफ़रत फैलाकर एक बार फिर देश को विकास की पटरी से उतारने की साज़िश रचने का आरोप लगाया था।    

घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोदी सरकार की बदमानी से आरएसएस और बीजेपी नेता परेशान हैं, जिससे लोगों का ध्यान भटकाने के लिए रोज़ वे नित-नए मुद्दे उठाते रहते हैं। लेकिन बेरोज़गार होने वाले करोड़ों जवान, लगारार सरकार से रोज़गार और अच्छे दिनों के वादों के बारे में सवाल पूछ रहे हैं।

जहां तक सुब्रामणियम स्वामी की बात है, वह विवादित बयान देकर, सुर्ख़ियों में बने रहना चाहते हैं, इसलिए कि बीजेपी में आजकल उन्हें कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा है। पिछले हफ़्ते उन्होंने बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय को उनके पद से हटाने के लिए मोदी सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन उनकी इस मांग पर किसी ने कान तक नहीं धरा।

2016 में एक इंटरव्यू के दौरान, आज तक टीवी चैनल के एक कार्यक्रम में पत्रकार राहुल कंवल ने देश और ख़ास तौर पर उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के बारे में बीजेपी के एजेंडे के बारे जब स्वामी से पूछा था तो उन्होंने जवाब में कहा थाः हमारा काम है हिंदूओं को एकजुट करना और मुसलमानों को आपस में बांटना, जब तक मुसलमानों को तोड़ा नही जाएगा, तब तक इस देश में बीजेपी का राज नही हो सकता!

उनका कहना था कि भारत में तब तक हिंदुओं का राज नहीं हो सकता, जब तक के हम मुसलमानों को आपस में लड़ा दें। शियों को सुन्नियों से, और सुन्नियों में बरेलवियों को देवबंदियों से! भारत में अगर हिंदुओं का राज करना है तो हमें इन्हें आपस में बांटना ही होगा, तभी हम लम्बे समय तक उत्तर प्रदेश और देश पर राज कर पाएगें!

अब फ़ैसला मुसलमानों को करना है कि आपस में लड़कर हिंदुत्ववादी ताक़तों के हाथों का खिलौना बनेंगे, या एकजुट होकर फासीवादी ताक़तों का मुक़ाबला करते हुए जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाढ़ेंगे। msm

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