Sep २०, २०२० २१:५९ Asia/Kolkata
  • देश में मुसलमानों को बदमान करने की साज़िश की जा रही है, जिसकी इजाज़त नहीं दी जा सकती, सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि 15 सितंबर को उसने आगे बढ़कर सुदर्शन न्यूज़ के ‘यूपीएससी जिहाद’ कार्यक्रम के प्रसारण पर इसलिए रोक लगाई, क्योंकि कोई (सरकार) और कुछ नहीं कर रहा था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहाः सुप्रीम कोर्ट का किसी चीज़ पर रोक लगाना. न्यूक्लियर मिसाइल की तरह है। लेकिन हमें आगे आने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि कोई और कोई क़दम नहीं उठा रहा था।

ग़ौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन न्यूज़ के बिंदास बोल कार्यक्रम के विवादित ‘नौकरशाही जिहाद’एपिसोड के प्रसारण को रोकते हुए कहा था कि देश की शीर्ष अदालत होने के नाते यह आरोप लगाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं।

कोर्ट का यह भी कहना था कि यह कार्यक्रम पहली नज़र में ही मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने वाला लगता है।

इस विवादित शो का प्रसारण 28 अगस्त को रात आठ बजे होना था, लेकिन जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्रों की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने  उसी दिन इस पर रोक लगा दी थी।

इसके बावजूद, 9 सितंबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चैनल को कार्यक्रम के प्रसारण की अनुमति दे दी, जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे नोटिस भेजा था, लेकिन प्रसारण रोकने से इनकार कर दिया गया।

इसके बाद इस कार्यक्रम के प्रसारण के बारे में शीर्ष अदालत में याचिका दायर की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि चैनल ख़बर दिखाने को अधिकृत हैं, लेकिन उसे पूरे समुदाय की छवि बिगाड़ने का कोई अधिकार नहीं है, और इस तरह के कार्यक्रम कर उन्हें अलग-थलग नहीं कर सकता।

मामले की सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, यह वास्तविक मुद्दा है। जब भी आप उन्हें प्रशासनिक सेवा से जुड़ते दिखाते हैं, आप आईएसआईएस (दाइश) को दिखाते हैं। आप कहना चाहते हैं कि प्रशासनिक सेवा से मुस्लिमों का जुड़ना गहरी साज़िश का हिस्सा है। क्या मीडिया को एक पूरे समुदाय को निशाना बनाने की अनुमति दी जा सकती है? msm

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